यह रिपोर्ट वर्तमान नीति परिदृश्यों (CPS) और भारत के 2070 के नेट जीरो परिदृश्य (NZS) प्रतिबद्धता के बीच समन्वय स्थापित करते हुए विद्युत क्षेत्रक में बदलाव की जांच करती है।
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 2024 तक के डेटा के तहत 2020 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में विद्युत क्षेत्रक की हिस्सेदारी 39.4% थी।
प्रमुख अनुमान
- विद्युतीकरण-आधारित मांग: विद्युत ऊर्जा का मुख्य माध्यम बन जाएगी। 2070 तक कुल ऊर्जा खपत में विद्युत की हिस्सेदारी बढ़कर 40% (CPS) और 60% (NZS) होने का अनुमान है।
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार: 2070 तक स्थापित विद्युत क्षमता में 9 से 14 गुना वृद्धि होगी। ग्रिड क्षमता का 90-93% हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा (मुख्यतः सौर फोटोवोल्टिक और पवन ऊर्जा) से आएगा। इसे वितरित उत्पादन से समर्थन प्राप्त होगा।
- भंडारण और : नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित ग्रिड की स्थिरता के लिए भारी भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी- लगभग 3,000 GW बैटरी भंडारण और 160 GW पंप्ड हाइड्रो पावर।
- सतत विद्युत उत्पादन के रूप में परमाणु ऊर्जा: परमाणु क्षमता को 8.8 GW से बढ़ाकर 2070 तक 300 GW से अधिक करने का लक्ष्य है। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) ग्रिड को लचीलापन और कम कार्बन उत्सर्जन वाला 'बेहतर बेसलोड' प्रदान करेंगे।

भारत के विद्युत क्षेत्रक के लिए प्रमुख सिफारिशें
- उत्पादन क्षेत्रक: सौर-पवन-ऊर्जा भंडारण हाइब्रिड मॉडल्स को बढ़ावा देना चाहिए। परमाणु ऊर्जा (विशेषकर SMRs) का विस्तार करना चाहिए। कोयला संयंत्रों के अनुकूल संचालन को सक्षम करना चाहिए और पुराने संयंत्रों को नए उद्देश्यों के लिए पुनर्विकसित करना चाहिए। साथ ही, ऊर्जा भंडारण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- पारेषण एवं वितरण: हरित ऊर्जा गलियारों का विस्तार करना चाहिए और ग्रिड का डिजिटलीकरण करना चाहिए। विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) में सुधार लाना चाहिए और 'पीयर-टू-पीयर' (P2P) ट्रेडिंग के माध्यम से प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना चाहिए।
- नीतिगत और विनियामक सुधार: विद्युत बाजारों को और गहन करना चाहिए। वास्तविक लागत को व्यक्त करने वाले टैरिफ लागू करने चाहिए और नवीकरणीय ऊर्जा कार्यदेशों को मजबूत करना चाहिए। संसाधन पर्याप्तता योजना निर्माण को संस्थागत रूप देना चाहिए।
- संधारणीयता और नवाचार: उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना चाहिए। पुनर्चक्रण और साइबर सुरक्षा मानदंडों को सख्ती से लागू करना चाहिए। पूर्वानुमान के लिए AI/ML का उपयोग करना चाहिए।
- परियोजना वित्त-पोषण: जलवायु वित्त और ग्रीन बॉण्ड्स के माध्यम से निवेश जुटाना चाहिए। दक्षता और निवेश प्रवाह में सुधार के लिए हरित विकार्बनीकरण कोष (GDF)/ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल्स अपनाने चाहिए।