भारत: एक उभरती हुई वैश्विक समुद्री महाशक्ति | Current Affairs | Vision IAS

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भारत का समुद्री क्षेत्रक

  • 'नीली अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी)' की क्षमता: भारत की 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा है। भारत का 23 लाख वर्ग किलोमीटर का संसाधन-संपन्न अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है। साथ ही, 14,500 किलोमीटर अंतर्देशीय जलमार्ग हैं। 
  • GDP में योगदान: वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 4% का योगदान।
  • पत्तनों की भूमिका: भारत के व्यापार का लगभग 95% मात्रा (Volume) के आधार पर और 70% मूल्य (Value) के आधार पर पत्तनों के माध्यम से व्यापार होता है।
    • वित्त वर्ष 2024-25 में महापत्तनों ने लगभग 855 मिलियन टन कार्गो का प्रबंधन किया था।
  • जलमार्गों में वृद्धि: अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से कार्गो की आवाजाही 2014 के 18 MMT से बढ़कर 2025 में 146 MMT हो गई है।

भारतीय समुद्री क्षेत्रक की मौजूदा चुनौतियां

  • पुराना बेड़ा (Ageing Fleets): भारत के पास कई जहाज 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इससे रखरखाव की लागत बढ़ती है, कार्यक्षमता कम होती है और पर्यावरणीय चिंताएं उत्पन्न होती हैं।
  • विदेशी बेड़ों पर निर्भरता: 2023 में भारत ने विदेशी स्वामित्व वाले जहाजों को समुद्री माल ढुलाई (Sea Freight) के रूप में 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया था।
  • हरित संक्रमण की बाधाएं: 'हरित पोत परिवहन' अपनाने में उच्च रेट्रोफिट लागत (30-50% प्रीमियम), कौशल की कमी और तकनीकी अवशोषण क्षमता का अभाव प्रमुख बाधाएं हैं।

समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख पहलें

  • नीतिगत कार्रवाई: सागरमाला कार्यक्रम (2015); मैरीटाइम इंडिया विज़न (2030); मैरीटाइम अमृत काल विजन (2047) आदि। 
  • नए बंदरगाहों का विकास: महाराष्ट्र में वधावन बंदरगाह का विकास; ग्रेट निकोबार द्वीप की गैलाथिया खाड़ी में एक ट्रांसशिपमेंट हब का निर्माण आदि।
  • विधायी सुधार: पुराने कानूनों को प्रतिस्थापित करने के लिए पांच ऐतिहासिक समुद्री क्षेत्रक अधिनियम पारित किए गए हैं। ये अधिनियम भारतीय बंदरगाहों, वाणिज्यिक पोत परिवहन, समुद्री मार्ग द्वारा माल की ढुलाई, तटीय पोत परिवहन और बिल ऑफ लैडिंग से संबंधित हैं।
  • हरित पोत परिवहन: बंदरगाह और जहाज संचालन को कार्बन मुक्त करने के लिए 'हरित सागर' (Harit Sagar) दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
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ट्रांसशिपमेंट हब (Transshipment Hub)

यह एक बंदरगाह होता है जहां माल को बड़े जहाजों से छोटे जहाजों में या इसके विपरीत स्थानांतरित किया जाता है, ताकि विभिन्न गंतव्यों तक अंतिम वितरण की सुविधा प्रदान की जा सके।

हरित पोत परिवहन (Green Shipping)

यह समुद्री परिवहन को अधिक पर्यावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया है, जिसमें कम उत्सर्जन वाले ईंधन का उपयोग, ऊर्जा-कुशल जहाजों का डिजाइन और संचालन, और शिपिंग से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने वाली अन्य तकनीकों को अपनाना शामिल है।

मैरीटाइम इंडिया विज़न (Maritime India Vision)

यह भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक दूरदर्शी योजना है, जिसका उद्देश्य 2030 तक भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति बनाना है, जिसमें बंदरगाहों, जहाजरानी, तटीय शिपिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

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