केंद्रीय बजट 2026–27 के साथ-साथ विभिन्न सुधारों का उद्देश्य भारत में व्यवसाय करने की सुगमता (Ease of Doing Business - EoDB) को बढ़ाना है। इसके लिए डिजिटल व्यापार सुविधा, कर निश्चितता, अनुपालन वाले नियमों में कमी और मुकदमेबाजी में कमी जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
भारत में व्यवसाय अनुकूल परिवेश के विस्तार की आवश्यकता
- घरेलू विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने के लिए: यह इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रकों में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की दृष्टि के अनुरूप आयात को कम करने के लिए आवश्यक है।
- निर्यात की मजबूती और विविधीकरण के लिए: ये अनिश्चित वैश्विक व्यापार परिवेश, मांग में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से निपटने के लिए आवश्यक हैं।
- आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने के लिए: यह वर्ष 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के राष्ट्रीय आर्थिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
- दीर्घकालिक मजबूती/लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए: यह बेहतर कराधान के माध्यम से जीवन स्तर में सुधार करने, निर्धनता कम करने और लोक स्वास्थ्य एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।
व्यावसायिक परिवेश को मजबूत करने के लिए की शुरू की गई पहलें

- संस्थागत सुधार: स्टार्टअप इंडिया, क्रेडिट गारंटी योजना, डिजिटल क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल आदि के माध्यम से पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित और निवेशक-अनुकूल प्रणाली निर्मित की जा रही है।
- विनियामकीय सुधार: जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम 2023 के द्वारा कई प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। छोटे तथा तकनीकी अपराधों के लिए देयताओं को कम किया गया। साथ ही विभिन्न श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया गया।
- कराधान सुधार:
- GST 2.0 सुधारों के तहत द्विस्तरीय कर दर संरचना लागू की गई ताकि मूल्य प्रतिस्पर्धा और नियमों के अनुपालन में सुधार हो सके।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) की दर को 15% से घटाकर 14% करने और इसे अंतिम कर (फाइनल टैक्स) के रूप में मानने का प्रस्ताव किया गया, आदि।