जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्रक को गति प्रदान करने के लिए ₹1 लाख करोड़ की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) पहल के अंतर्गत ₹2,000 करोड़ के प्रथम BIRAC-RDI कोष की घोषणा की गई है।
जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद-अनुसंधान, विकास और नवाचार (BIRAC-RDI) कोष के बारे में
- अवलोकन: इसे नवंबर 2025 में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तहत आरंभ किया गया था। इसका संचालन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा किया जा रहा है।
- मुख्य विशेषताएं और फोकस क्षेत्र:
- उद्देश्य: प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक पैमाने पर विनिर्माण के बीच के अंतर को समाप्त करना ("लैब-टू-इंडस्ट्री")।
- यह इक्विटी, परिवर्तनीय लिखतों (instruments) और दीर्घकालिक ऋण के माध्यम से प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (TRL) 4 और उससे ऊपर का समर्थन करती है।
- कोष प्रबंधक: जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC)।
- क्षेत्रक: यह BioE3 नीति की पूरक है। साथ ही, बायोफार्मा, जैव-औद्योगिक विनिर्माण, जैव-ऊर्जा आदि में अगली पीढ़ी के उत्पादों को लक्षित करती है।
- उद्देश्य: प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक पैमाने पर विनिर्माण के बीच के अंतर को समाप्त करना ("लैब-टू-इंडस्ट्री")।
RDI (अनुसंधान, विकास और नवाचार) योजना के बारे में
- यह योजना केंद्र सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तत्वावधान में संचालित है।
- वित्तीय परिव्यय: 6 वर्षों में ₹1 लाख करोड़, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹20,000 करोड़ शामिल हैं।
- उद्देश्य:
- अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार में निजी क्षेत्रक की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- डीप टेक, बायोटेक, AI जैसी रणनीतिक प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
- आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना।
भारत का जैव-अर्थव्यवस्था क्षेत्रक
प्रमुख पहलें:
|