प्रधान मंत्री ने कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के ऋण लक्ष्य को ₹1 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2 लाख करोड़ करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य भारत की संपूर्ण कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है।

कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के बारे में
- उद्देश्य: इसके तहत फसल कटाई के बाद फसलों के प्रबंधन हेतु अवसंरचना निर्माण और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के निर्माण हेतु व्यवहार्य परियोजनाओं में निवेश के लिए मध्यम से दीर्घावधि हेतु ऋण दिया जाता है। इस ऋण पर ब्याज छूट और क्रेडिट गारंटी सहायता भी दी जाती है।
- प्रकार: यह एक केंद्रीय क्षेत्रक की योजना (Central Sector Scheme) है।
- कार्यान्वयन अवधि: वर्ष 2020-21 से 2029-30 तक।
- प्रमुख विशेषता: इस योजना के तहत बैंक और वित्तीय संस्थान 2 लाख करोड़ रुपये तक का ऋण प्रदान कर सकते हैं। ऋण पर 3% प्रतिवर्ष की ब्याज छूट दी जाती है और CGTMSE के तहत 2 करोड़ रुपये तक के ऋण को क्रेडिट गारंटी कवरेज दिया जाता है।
- CGTMSE: सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी निधि न्यास।
- पात्र लाभार्थी:
- प्राथमिक लाभार्थी: जैसे- किसान, प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS), किसान उत्पादक संगठन (FPOs), स्वयं सहायता समूह (SHGs) आदि।
- सरकारी एजेंसियां: जैसे कृषि उपज मंडी समितियां (APMCs)।
- पात्र परियोजनाएं
- कटाई के बाद प्रबंधन परियोजनाएं: जैसे गोदाम (Warehouses), शीत श्रृंखला, शीत भंडारण और राइपनिंग चैंबर्स (फल आदि पकाने के कक्ष)।
- सामुदायिक कृषि संपत्तियां: जैसे स्मार्ट और परिशुद्ध कृषि (Precision Agriculture) के लिए अवसंरचना (उदाहरण: ड्रोन, सेंसर, AI आदि)।
भारत में कृषि अवसंरचना के विकास के लिए अन्य पहलें:
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