यह मिशन अपने 120 से अधिक सदस्य देशों में स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में AI को अपनाने में तेजी लाएगा। इसमें डिजिटल अवसंरचना और नागरिक-केंद्रित प्लेटफॉर्म्स को ऊर्जा संक्रमण के केंद्र में रखा जाएगा।
ऊर्जा प्रणालियों में AI की भूमिका
- ऊर्जा की बचत: वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्रक में AI अनुप्रयोगों में 2035 तक 13 एक्साजूल (EJ) से अधिक ऊर्जा बचाने की क्षमता है।
- किफायती समाधान: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के AI प्लेटफॉर्म ने उत्तर प्रदेश में एक ऑफ-ग्रिड प्रायोगिक परियोजना में परिचालन लागत में 15-20% की कमी की है।
- ग्रिड अनुकूलन: 'प्रवाह' (स्टार्ट-अप) द्वारा विकसित एक एआई-नेटिव निर्णय समर्थन इंजन ग्रिड का डिजिटलीकरण करता है, मांग का पूर्वानुमान लगाता है और नुकसान के स्थानीयकरण के लिए विद्युत प्रवाह का अनुकरण करता है।
- पूर्वानुमानित रखरखाव: कज़ाम की एआई-सक्षम ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली (EMS) इलेक्ट्रिक बस डिपो में चार्जिंग को अनुकूलित करने और मांग में लचीलेपन के लिए पूर्वानुमानित वैश्लेषिकी (predictive analytics) का उपयोग करती है।
- खनिज खनन क्षेत्रक: AI का उपयोग भू-भौतिकीय डेटा को संसाधित करने के लिए किया जा सकता है। इससे विसंगति का पता लगाने और अयस्क के पूर्वानुमान में सुधार हो सकेगा।
ऊर्जा क्षेत्रक में AI अपनाने की संभावित चुनौतियां
- उत्सर्जन: AI-संचालित डेटा केंद्र 2030 तक वैश्विक विद्युत मांग का लगभग 3% हिस्सा हो सकते हैं। इससे वैश्विक नेट-जीरो (शुद्ध शून्य उत्सर्जन) लक्ष्यों के साथ इस बढ़ती मांग को पूरा करने पर चिंताएं बढ़ रही हैं।
- ग्रिड अवसंरचना पर दबाव: एआई अपनाने की तीव्र गति दीर्घकालिक ग्रिड योजना और नीतिगत ढांचे के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां प्रस्तुत करती है, जबकि AI के प्रति इनका अनुकूलन धीमा है।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) (मुख्यालय: गुरुग्राम)
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