वित्त वर्ष 2026-27 में 5.01 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11.55% की वृद्धि दर्शाता है।
- कुल केंद्रीय बजट में जेंडर बजट की हिस्सेदारी बढ़कर 9.37% हो गई है। इस वर्ष कुल 53 मंत्रालयों/ विभागों और पांच संघ राज्यक्षेत्रों ने आवंटन की रिपोर्ट दी है।
भारत में जेंडर बजट
- अर्थ: यह एक ऐसी प्रणाली है, जो यह सुनिश्चित करती है कि लैंगिक समानता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धताएँ वास्तविक बजटीय आवंटन में परिवर्तित हों।
- इसका उद्देश्य जेंडर संबंधी चिंताओं के लिए अलग विशेषीकृत बजट बनाना नहीं है, बल्कि सरकारी बजट को 'लैंगिक संवेदनशील दृष्टिकोण' से देखना है।
- भारत में अपनाना: भारत ने औपचारिक रूप से 2004-05 में जेंडर बजट को अपनाया था।
- भारत ने इसे राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर लागू किया है। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में जेंडर बजट प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं।
- जेंडर बजट के भाग:
- भाग A: वे योजनाएं, जिनमें महिलाओं के लिए 100% प्रावधान हैं।
- भाग B: वे योजनाएं, जहां महिलाओं के लिए आवंटन कम-से-कम 30% है।
- भाग C: इसे केंद्रीय बजट 2024-25 में शामिल किया गया था। इसमें आवंटन 30% से कम होता है।
- महत्त्व: यह योजना निर्माण में लैंगिक चिंताओं को एकीकृत करता है, संरचनात्मक असमानताओं को कम करने में मदद करता है और समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।
भारत में जेंडर बजट को बढ़ावा देने वाली प्रमुख पहलें
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