भारत-यूनाइटेड किंगडम अपतटीय पवन ऊर्जा कार्यबल का शुभारंभ किया गया | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • विजन 2035 और भारत-ब्रिटेन ऊर्जा संवाद के तहत गठित एक टास्कफोर्स का लक्ष्य भारत के अपतटीय पवन ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में रणनीतिक नेतृत्व हासिल करना है।
  • अपतटीय पवन ऊर्जा उच्च ऊर्जा उत्पादन और भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं की अनुपस्थिति जैसे लाभ प्रदान करती है, लेकिन उच्च पूंजी लागत और समुद्री परिस्थितियों जैसी चुनौतियों का भी सामना करती है।
  • भारत की अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता का अनुमान गुजरात में 36 गीगावाट और तमिलनाडु में 35 गीगावाट है, जिसमें FOWIND और FOWPI जैसी पहलें विकास में सहयोग कर रही हैं।

In Summary

इस कार्यबल का गठन 'विज़न 2035' (भारत-यूनाइटेड किंगडम रोडमैप) और चौथे भारत-यूनाइटेड किंगडम ऊर्जा संवाद के तहत किया गया है।

  • उद्देश्य: भारत के अपतटीय पवन ऊर्जा तंत्र के लिए रणनीतिक नेतृत्व और समन्वय प्रदान करना।

अपतटीय (Offshore) पवन ऊर्जा के बारे में

  • इसका तात्पर्य समुद्र या बड़ी झीलों जैसे जल निकायों में विद्युत उत्पन्न करने के लिए पवन टरबाइन के उपयोग से है।
  • तटवर्ती (Onshore) पवन ऊर्जा की तुलना में अपतटीय पवन ऊर्जा के लाभ
    • अधिक ऊर्जा उत्पादन: बड़े टरबाइन्स होने के कारण अपतटीय टरबाइन तटवर्ती टरबाइन्स की तुलना में 1MW अधिक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।
    • दक्षता: समुद्र के ऊपर हवाएं अधिक तेज होती हैं और जमीन की तुलना में अक्सर एक ही दिशा में चलती हैं।
    • भूमि की आवश्यकता नहीं: इसमें भूमि अधिग्रहण की समस्या नहीं होती और स्थानीय लोगों को कोई असुविधा भी नहीं होती।
  • अपतटीय पवन ऊर्जा के संबद्ध चुनौतियां
    • स्थापना के लिए उच्च पूंजीगत लागत
    • लवणीय जल के कारण होने वाले संक्षारण जैसी कठोर समुद्री स्थितियों से टूट-फूट का जोखिम बढ़ जाता है। इससे बार-बार और विशेष रखरखाव की आवश्यकता होती है।
    • जल के भीतर परिचालन के दौरान होने वाला शोर समुद्री जीवों और पारिस्थितिकी-तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
  • भारत में, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) अपतटीय पवन ऊर्जा विकास के लिए नोडल मंत्रालय है।
    • संभावित क्षमता: राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के अनुसार गुजरात (36 गीगावाट), तमिलनाडु (35 गीगावाट)।

प्रमुख परियोजनाएं और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

  • भारत में अपतटीय पवन ऊर्जा की सुविधा (FOWIND) (2013-2018): इसे वैश्विक पवन ऊर्जा परिषद (GWEC) और यूरोपीय संघ (EU) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा कार्यान्वित किया गया था। इसका मुख्य ध्यान गुजरात और तमिलनाडु पर था।
  • भारत में प्रथम अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजना (FOWPI, 2015): यूरोपीय संघ (EU) के सहयोग से COWI के नेतृत्व में संचालित।
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यूरोपीय संघ (EU)

यूरोप में स्थित 27 सदस्य राज्यों का एक राजनीतिक और आर्थिक संघ है। यह एकल बाजार, साझा नीतियां और कानून के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें व्यापार, सुरक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।

वैश्विक पवन ऊर्जा परिषद (GWEC)

यह पवन ऊर्जा उद्योग का एक अंतर्राष्ट्रीय निकाय है जो अपतटीय पवन ऊर्जा के विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों में भाग लेता है।

संक्षारण (Corrosion)

यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा धातुएं अपने पर्यावरण के साथ रासायनिक या विद्युत-रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से धीरे-धीरे खराब हो जाती हैं। अपतटीय पवन टरबाइनों के लिए, लवणीय जल के कारण संक्षारण एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

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