- परियोजना: भारत में सड़क सुरक्षा के लिए सतत वित्त-पोषण: एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण।
- वित्त-पोषण: संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) (बॉक्स देखें)।
- तकनीकी सहायता प्रदाता: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), तथा एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (UNESCAP)।
- राज्य: राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और असम।
- मुख्य फोकस: सड़क सुरक्षा कार्य योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय एवं उप-राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करना।
- लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों (जो दिव्यांगता का कारण बनती हैं) को कम करना।
भारत में सड़क सुरक्षा का परिदृश्य (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार)
- वर्ष 2022-23 में लगभग 1.68 लाख मौतें दर्ज की गई थीं।
- पीड़ितों की अधिकता: 18-45 वर्ष आयु वर्ग में सर्वाधिक पीड़ित थे।
- दुर्घटना कारक वाहनों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी: दुपहिया वाहन।
- प्रमुख कारण: अत्यधिक गति (ओवर-स्पीडिंग)।
- आर्थिक प्रभाव: सड़क दुर्घटनाओं के कारण भारत को वार्षिक अपनी GDP का लगभग 3% नुकसान होता है।
सरकार की सड़क सुरक्षा पहलें
- मोटर वाहन संशोधन अधिनियम, 2019: यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए शासन, जवाबदेही और जुर्माने को बढ़ाया गया है।
- राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा रणनीति 2018-2030: 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50% तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस (IRAD): राजमार्ग मंत्रालय और गृह मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक एकीकृत दुर्घटना डेटा प्रबंधन प्रणाली है।
- सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य सहायता कार्यक्रम: यह विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB) और भारत सरकार द्वारा ₹7,270 करोड़ की सहायता से 14 उच्च-मृत्यु दर वाले राज्यों में कार्यान्वित 6 वर्षीय कार्यक्रम है। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) के बारे में
अन्य वैश्विक प्रयास: मार्राकेश घोषणा
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