यह विशाखापत्तनम (विजाग) में एक नया अंतर्राष्ट्रीय सबसी (समुद्र के नीचे) गेटवे स्थापित करने के लिए एक सहयोगी अवसंरचनात्मक पहल है। यह 5 वर्षों में 15 बिलियन डॉलर के एआई अवसंरचना निवेश द्वारा समर्थित है।

प्रमुख विशेषताएं
- भारत के पूर्वी तट को जोड़ना: विजाग और चेन्नई से दक्षिण अफ्रीका के बीच एक सीधा फाइबर-ऑप्टिक मार्ग बनाया जाएगा। यह अफ्रीका के रास्ते संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट को विजाग से जोड़ेगा।
- इसके अतिरिक्त, विजाग और सिंगापुर के बीच एक सीधा मार्ग निर्मित किया जाएगा। यह ऑस्ट्रेलिया के माध्यम से अमेरिकी पश्चिमी तट को विजाग से जोड़ने वाला एक दक्षिण प्रशांत मार्ग प्रदान करेगा।
- भारत के पश्चिमी तट को जोड़ना: मुंबई और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच एक सीधा फाइबर-ऑप्टिक मार्ग बनाया जाएगा।
- यह पहल ब्लू, रमन और सोल समुद्री केबल्स की पूरक होगी। ये केबल्स मिलकर अमेरिकी पूर्वी तट से लाल सागर के रास्ते मुंबई तक एक डेटा कॉरिडोर बनाती हैं।
- महत्त्व: विशाखापत्तनम (विजाग) को एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सबसी गेटवे के रूप में स्थापित करना। "नए विश्व” और भारत के बीच समुद्री वाणिज्यिक पोत परिवहन मार्गों को डिजिटल व्यापार मार्गों में बदलना।
समुद्र के नीचे संचार केबल्स के बारे में
- अर्थ: ये महाद्वीपों के बीच डेटा संचारित करने के लिए समुद्र नितल पर बिछाई गई फाइबर-ऑप्टिक केबल्स होती हैं, जो वैश्विक इंटरनेट के आधार के रूप में कार्य करती हैं।
- महत्त्व: वैश्विक डेटा का 95% से अधिक इन्हीं के माध्यम से गुजरता है। ये प्रति सेकंड कई टेराबिट्स डेटा संचारित करने में सक्षम हैं।
- तकनीकी विशेषताएं:
- इनमें कई ऑप्टिकल फाइबर (कांच/ प्लास्टिक के पतले तंतु) होते हैं;
- संकेतों के कम नुकसान के लिए प्रकाश संकेतों का उपयोग होता है;
- इनमें इस्पात के कवच, वाटरप्रूफ इंसुलेशन और रिपीटर्स (सिग्नल एम्पलीफायर) लगे होते हैं।
- सुभेद्यताएं: मत्स्यन जहाजों एवं लंगर से आकस्मिक क्षति, टूट-फूट और भू-राजनीतिक जोखिम (जैसे 2024 में लाल सागर समुद्री केबल्स पर हमले)।
- भारतीय पहलें: चेन्नई और अंडमान-निकोबार के बीच तथा कोच्चि एवं लक्षद्वीप के बीच समुद्री ऑप्टिकल फाइबर केबल्स।