DRDO ने भारत की पहली ‘लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल’ का सफलतापूर्वक परीक्षण किया | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के पूर्वी तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया है। इस हाइपरसोनिक मिसाइल की रेंज 1500 किलोमीटर से अधिक है। 

  • इससे पहले यह तकनीक केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के पास थी। 

परीक्षण के दौरान प्रदर्शित तकनीकें

  • एयरोडायनामिक कार्यप्रणाली: यह तकनीक मिसाइल उड़ान के दौरान दिशा में बदलाव पर स्थिरता और नियंत्रण बनाए रखने के लिए जरूरी है। 
  • स्क्रैमजेट प्रणोदन का उपयोग: यह हाइपरसोनिक गति पर प्रज्वलन और निरंतर दहन बनाए रखने के लिए उपयोगी है। 
    • स्क्रैमजेट प्रणोदन प्रणाली ईंधन के दहन के लिए सामने की वायु को संपीडित करने हेतु जेट इंजन की आगे की गति का उपयोग करती है। यह तकनीक हाइपरसोनिक गति पर कार्य करती है। एक स्क्रैमजेट एयर-ब्रीदिंग जेट इंजन का एक रूप है।  
  • थर्मो-स्ट्रक्चरल प्रणाली: यह तकनीक हाइपरसोनिक उड़ानों के दौरान विमान को चरम वायु-तापीय वातावरण का सामना करने में सक्षम बनाती है।
  • हाइपरसोनिक वेग पर पेलोड से मिसाइल को अलग करने की प्रणाली। 

हाइपरसोनिक मिसाइल क्या है?

  • ये मिसाइलें न्यूनतम मैक-5 की गति यानी ध्वनि की गति से पांच गुना गति से उड़ सकती हैं। 
    • ध्वनि की गति मैक-1 है। मैक-1 से मैक-5 के बीच की गति सुपरसोनिक होती है। मैक-5 से अधिक की गति हाइपरसोनिक कहलाती है।
  • हाइपरसोनिक मिसाइलें उड़ान के दौरान अपनी दिशा और प्रक्षेप-पथ बदल सकती हैं। उच्च गति से उड़ने वाली ऐसी मिसाइलों का पता लगाना तथा उन्हें नष्ट करना अत्यंत कठिन होता है।

भारत की अन्य मिसाइल प्रणालियां

  • सेवा में शामिल की गई मिसाइलें: 
    • आकाश: सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, 
    • ब्रह्मोस: लंबी दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आदि।
  • विकास-चरण वाली मिसाइलें: 
    • नाग: एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, 
    • अस्त्र: हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, 
    • अग्नि: लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल, आदि।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के बारे में

  • इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। यह रक्षा मंत्रालय का अनुसंधान एवं विकास संगठन है। 
    • यह संगठन अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास तथा रक्षा क्षेत्रक में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। 
  • DRDO वास्तव में एरोनॉटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, लड़ाकू वाहनों, मिसाइलों, उन्नत कंप्यूटिंग और सिमुलेशन आदि के लिए स्थापित लगभग 41 प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क है।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED VIDEOS

1
न्यूज़ टुडे | डेली करेंट अफेयर्स | 17 और 18 नवंबर, 2024

न्यूज़ टुडे | डेली करेंट अफेयर्स | 17 और 18 नवंबर, 2024

YouTube HD
Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet