हाल ही में इंडिया एआई समिट में मुकेश अंबानी ने राष्ट्रव्यापी एज कंप्यूटिंग नेटवर्क को वित्तपोषित करने के लिए निवेश की प्रतिबद्धता जताई।
एज कंप्यूटिंग के बारे में
- एज कंप्यूटिंग में डेटा को स्थानीय स्तर पर (डिवाइस में या नजदीकी सर्वर में) प्रोसेस किया जाता है।
- केवल आवश्यक डेटा ही केंद्रीय डेटा सेंटर (क्लाउड) को भेजा जाता है। इससे डेटा ट्रांसफर में लेटेंसी (देरी) कम होती है।
- उदाहरण के लिए: दूर स्थित किसी गोदाम में लगा सुरक्षा कैमरा AI की मदद से संदिग्ध गतिविधि को पहचानता है और हर समय पूरा वीडियो भेजने की बजाय केवल ज़रूरी क्लिप मुख्य डेटा सेंटर को भेजता है।
- अन्य कंप्यूटिंग मॉडल से अंतर:
- फॉग कंप्यूटिंग : जब एज डिवाइस में पर्याप्त कंप्यूटिंग क्षमता नहीं होती, तब क्लाउड और एज के बीच डेटा का भंडारण और प्रोसेसिंग की जाती है।
- क्लाउड कंप्यूटिंग: इसमें डेटा केंद्रीय डेटा सेंटर्स में प्रोसेस होता है। इसमें लेटेंसी (देरी) अधिक होती है, विशेषकर रियल-टाइम एप्लिकेशन के मामले में।
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1 sourceकेंद्रीय गृह मंत्री ने असम के कछार जिला से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) का दूसरा चरण 20 फरवरी, 2026 को शुरू किया।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) के बारे में
- लक्ष्य: सीमा से सटे चिन्हित ब्लॉकों के सभी गांवों को चार विषयगत क्षेत्रों में लक्ष्य की पूर्ण प्राप्ति सुनिश्चित करना है। चार विषयगत क्षेत्र हैं:
- हर मौसम में उपयोग वाला सड़क संपर्क
- टेलीकॉम कनेक्टिविटी
- टेलीविजन कनेक्टिविटी
- विद्युतीकरण
- उपर्युक्त लक्ष्यों को विभिन्न योजनाओं में समन्वय के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-I: यह 2023 में शुरू की गई केंद्र प्रायोजित योजना थी। इसमें देश की उत्तरी सीमा से सटे चयनित गांवों के विकास पर जोर दिया गया।
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II: यह 2025 में स्वीकृत केंद्रीय क्षेत्रक योजना है। इस चरण में 15 राज्यों और 2 संघ राज्य क्षेत्रों की अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं से सटे चिन्हित गांवों के विकास पर जोर दिया गया।
- इसमें देश की उत्तरी सीमा से सटे उन क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया जो VVP-I में शामिल थे।
- मुख्य उद्देश्य:
- समृद्ध और सुरक्षित सीमाएं सुनिश्चित करना,
- सीमा-पार से होने वाले अपराध की रोकथाम,
- सीमा क्षेत्रों की आबादी को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ना,
- लोगों में यह भावना विकसित करना कि वे सीमा सुरक्षा बलों की “आँख और कान” बनें—जो आंतरिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हाल ही में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में ‘भारत GI (Bharat GI)’ का अनावरण किया गया।
भारत GI के बारे में
- यह भारत के विशिष्ट भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है।
- प्रारंभकर्ता: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)।
- लाभ:
- भारतीय कारीगरों और किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना,
- GI उत्पादों की प्रीमियम ब्रांडिंग सुनिश्चित करना,
- वैश्विक बाज़ार तक भारतीय उत्पादों को सुगम तरीके से पहुँचाना।
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1 sourceहाल ही में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने घोषणा की कि सरकार “बायो-एआई मूलांकुर (Bio-AI Mulankur) हब्स” की स्थापना करेगी।
“बायो-एआई मूलांकुर” हब्स के बारे में
- उद्देश्य: ऐसे एकीकृत और क्लोज्ड-लूप शोध प्लेटफॉर्म विकसित करना, जहाँ AI आधारित पूर्वानुमान और प्रयोगशाला द्वारा सत्यापन एक ही ढाँचे में साथ-साथ कार्य करें।
- मुख्य क्षेत्रक: जीनोमिक्स डायग्नोस्टिक्स, बायो-मॉलिक्यूलर डिजाइन, सिंथेटिक बायोलॉजी, आयुर्वेद-आधारित अनुसंधान।
- ये सभी बायो E3 (पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति के अनुरूप हैं।
- कार्यान्वयन एजेंसी: भारत सरकार का जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC)।
वैज्ञानिकों ने ग्रिड में ऊर्जा भंडारण के लिए जिंक-आयन बैटरी के उपयोग हेतु एक नया कैथोड पदार्थ तैयार किया है।
जिंक-आयन बैटरी के बारे में
- यह मेटल-आयन बैटरी का एक प्रकार है। यह कुछ हद तक लिथियम-आयन बैटरी जैसी होती है।
- महत्त्व: तुलनात्मक रूप से सस्ती, पर्यावरण के अनुकूल, लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में अधिक सुरक्षित। .
बैटरी के मूल घटक
- कैथोड: उपयोग वाले सामान्य पदार्थ-निकेल, कोबाल्ट, मैंगनीज, एल्युमिनियम आदि।
- एनोड: सामान्य पदार्थ-ग्रेफाइट, जिंक, सिलिकॉन, लिथियम आदि।
- इलेक्ट्रोलाइट: एक घोल, जो एनोड और कैथोड के बीच आयनों के प्रवाह को संभव बनाता है।
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1 sourceसंयुक्त राष्ट्र के एक मिशन ने सूडान में अल-फशेर शहर की घेराबंदी के दौरान एक अर्धसैनिक बल द्वारा नरसंहार को अंजाम देने के संकेत मिलने की सूचना दी है।
सूडान संघर्ष के बारे में
- शामिल सैन्य पक्ष: सूडानी सशस्त्र बल (सरकारी सेना) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (अर्धसैनिक बल) आमने-सामने हैं।
- प्रमुख प्रभावित क्षेत्र:
- खार्तूम (राजधानी) ,
- दारफुर क्षेत्र (पश्चिमी सूडान): अल-फशेर (उत्तर दारफुर की राजधानी), अल-जनीना, ज़मज़म विस्थापन शिविर।
- अन्य क्षेत्र: कोर्डोफान क्षेत्र (राजधानी – अल-उबैद), ब्लू नाइल प्रान्त।
- प्रभावित समुदाय: मसालित, ज़ागावा, फ़ुर।
हालिया वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार लायन-टेल्ड मकाक की संख्या स्थिर बनी हुई है। कुछ स्थानों पर बागान-प्रधान क्षेत्रों में इसकी संख्या बढ़ भी रही है।
लायन-टेल्ड मकाक के बारे में
- संरक्षण स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: एंडेंजर्ड
- CITES: परिशिष्ट–I में सूचीबद्ध।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम: अनुसूची–I और IV में सूचीबद्ध
- विशेषताएं:
- चेहरे के चारों ओर धूसर अयाल (गर्दन के बाल) होने के कारण इसे कभी-कभी दाढ़ी वाला बंदर भी कहा जाता है।
- इसकी पूंछ शेर की पूंछ जैसी दिखाई देती है।
- पर्यावास: दक्षिणी पश्चिमी घाट के सदाबहार वर्षावन (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक)।
- प्रमुख प्राप्ति क्षेत्र:
- नीलगिरि–साइलेंट वैली के क्षेत्र, अन्नामलाई–परंबिकुलम क्षेत्र, कर्नाटक का शरावती घाटी क्षेत्र, दक्षिणी केरल और तमिलनाडु में फैली अगस्त्यमलाई पर्वतमालाएँ।
- पालघाट दर्रे के उत्तर और दक्षिण में इसकी आनुवंशिक रूप से दो अलग-अलग उप-समष्टियां पाई गई हैं।
- मुख्य खतरे: कृषि क्षेत्र का विस्तार, नगरीकरण और खनन, – स्थलीय जीवों का शिकार और पकड़ना, वनों की कटाई और लकड़ी काटना।
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1 sourceभारत ने गाजा पर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में एक पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया।
बोर्ड ऑफ पीस के बारे में
- इसे जनवरी 2026 में स्थापित किया गया था।
- इसकी उत्पत्ति अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की “गाजा के लिए 20-सूत्री शांति योजना” से हुई है।
- इस योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा संकल्प 2803 के माध्यम से समर्थन दिया गया था।
- उद्देश्य: गाजा को एक विसैन्यीकृत और आर्थिक रूप से स्थिर क्षेत्र में बदलना।
- सदस्य: इसकी अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इसमें चुनिंदा वैश्विक नेताओं का एक कार्यकारी बोर्ड है। इसकी सदस्यता आमंत्रण-आधारित है।
- इसमें निश्चित कार्यकाल वाले और शुल्क का भुगतान करने वाले स्थायी सदस्य शामिल हैं।