समुद्री सुरक्षा में उभरती चुनौतियां | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • रक्षा मंत्री ने भू-राजनीतिक तनाव, समुद्री डकैती, पर्यावरणीय खतरे और साइबर कमजोरियों जैसी उभरती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
  • भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा, समुद्र के माध्यम से होने वाला 95% व्यापार और विशाल ईईजेड संसाधनों के कारण इसकी समुद्री सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
  • भारत की पहलों में महासागर (2025), सागर (2015), आईएफसी-आईओआर, एनएमएससी की नियुक्ति, बहुपक्षीय सहभागिता और अंतरिक्ष-आधारित निगरानी शामिल हैं।

In Summary

रक्षा मंत्री ने 'अभ्यास मिलन' (Exercise MILAN) के दौरान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से समुद्र में विकसित हो रही जटिल और परस्पर संबद्ध चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने का आह्वान किया।

उभरती चुनौतियां और समुद्री सुरक्षा 

  • भू-राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय विवाद: जलडमरूमध्यों और चैनलों के स्वामित्व के लिए प्रतिस्पर्धा; दुर्लभ भू-खनिजों (Rare-earth minerals) जैसे जल के नीचे के संसाधनों की ओर बढ़ता अंतर्राष्ट्रीय ध्यान।
  • समुद्री डकैती, आतंकवाद और तस्करी: अदन की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ये गतिविधियां प्रमुख चुनौती हैं।
  • पर्यावरणीय चुनौतियां: समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और विनाशकारी चक्रवातों का बढ़ता प्रभाव।
  • साइबर सुभेद्यता: समुद्र नितल पर बिछे ऑप्टिकल केबल नेटवर्क को खतरा। बंदरगाह सुविधाओं, नेविगेशन नेटवर्क और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करने के लिए साइबर हमले।

भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का महत्त्व

  • भारत की विशाल तटरेखा: भारत की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक विस्तृत है।
  • व्यापार और आर्थिक जीवन रेखा: भारत के कुल व्यापार का 95% से अधिक हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है।
  • बहुमूल्य समुद्री संसाधन: लगभग 20 लाख वर्ग किमी का विशाल अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) हाइड्रोकार्बन और दुर्लभ भू-खनिजों का एक बड़ा स्रोत है।
  • क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक विश्वसनीय "विश्व-मित्र" और 'समग्र सुरक्षा प्रदाता' के रूप में भारत की छवि।

चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की पहलें

  • MAHASAGAR (म्यूच्यूअल एंड हॉलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस/ क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति- 2025): यह सागर (SAGAR) सिद्धांत से एक रणनीतिक बदलाव है, जो साझेदारी और साझा जिम्मेदारी के आधार पर वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा को सतत विकास के साथ जोड़ता है।
    • सागर (SAGAR - 2015) नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और एक सुरक्षित व स्थिर हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) सुनिश्चित करने का बुनियादी दृष्टिकोण था।
  • सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR): गुरुग्राम (2018) में स्थापित यह केंद्र वास्तविक समय में जानकारी साझा करने के लिए एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कार्य करता है।
  • राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (NMSC): विभिन्न मंत्रालयों (नौसेना, तटरक्षक बल, गृह मंत्रालय) के बीच समन्वय को सुव्यवस्थित करने और समुद्री सीमा की सुरक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए नियुक्त।
  • बहुपक्षीय जुड़ाव और समन्वित गश्त: उदाहरण के लिए- अभ्यास मिलन।
  • अंतरिक्ष-आधारित निगरानी: जहाजों की वास्तविक समय में ट्रैकिंग के लिए NavIC और इसरो (ISRO) के उपग्रह डेटा का एकीकरण।
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NavIC

An acronym for 'Navigation with Indian Constellation,' India's independent regional navigation satellite system, providing accurate positioning and timing services.

राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (NMSC - National Maritime Security Coordinator)

यह एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति है जिसका उद्देश्य विभिन्न सरकारी मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समुद्री सुरक्षा से संबंधित समन्वय को सुव्यवस्थित करना और समुद्री सीमा की सुरक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना है।

सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR - Information Fusion Centre – Indian Ocean Region)

गुरुग्राम में स्थापित यह केंद्र हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डोमेन जागरूकता बढ़ाने और क्षेत्रीय देशों के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करने के लिए एक नोडल केंद्र के रूप में कार्य करता है।

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