रक्षा मंत्री ने 'अभ्यास मिलन' (Exercise MILAN) के दौरान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से समुद्र में विकसित हो रही जटिल और परस्पर संबद्ध चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने का आह्वान किया।
उभरती चुनौतियां और समुद्री सुरक्षा
- भू-राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय विवाद: जलडमरूमध्यों और चैनलों के स्वामित्व के लिए प्रतिस्पर्धा; दुर्लभ भू-खनिजों (Rare-earth minerals) जैसे जल के नीचे के संसाधनों की ओर बढ़ता अंतर्राष्ट्रीय ध्यान।
- समुद्री डकैती, आतंकवाद और तस्करी: अदन की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ये गतिविधियां प्रमुख चुनौती हैं।
- पर्यावरणीय चुनौतियां: समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और विनाशकारी चक्रवातों का बढ़ता प्रभाव।
- साइबर सुभेद्यता: समुद्र नितल पर बिछे ऑप्टिकल केबल नेटवर्क को खतरा। बंदरगाह सुविधाओं, नेविगेशन नेटवर्क और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करने के लिए साइबर हमले।
भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का महत्त्व
- भारत की विशाल तटरेखा: भारत की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक विस्तृत है।
- व्यापार और आर्थिक जीवन रेखा: भारत के कुल व्यापार का 95% से अधिक हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है।
- बहुमूल्य समुद्री संसाधन: लगभग 20 लाख वर्ग किमी का विशाल अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) हाइड्रोकार्बन और दुर्लभ भू-खनिजों का एक बड़ा स्रोत है।
- क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक विश्वसनीय "विश्व-मित्र" और 'समग्र सुरक्षा प्रदाता' के रूप में भारत की छवि।
चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की पहलें
|