वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की स्टार्ट-अप इंडिया पहल के 9 वर्ष पूरे हुए | Current Affairs | Vision IAS
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स्टार्ट-अप इंडिया पहल को 2016 में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) की एक प्रमुख पहल के रूप में शुरू किया गया था।

स्टार्ट-अप इंडिया पहल की मुख्य विशेषताएं

  • उद्देश्य: भारत में स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा देना तथा नवाचार और उद्यमिता के लिए एक मजबूत एवं समावेशी इकोसिस्टम का निर्माण करना।
  • इस पहल की मुख्य विशेषताओं पर एक नजर:
    • कारोबार करने की सुगमता: इसके तहत सरलीकृत अनुपालन, स्व-प्रमाणन और सिंगल विंडो क्लियरेंस को बढ़ावा दिया गया है।
    • कर संबंधी लाभ: इसमें लगातार तीन वित्त वर्षों के लिए कर संबंधी छूट का प्रावधान किया गया है।
    • वित्त-पोषण संबंधी सहायता: स्टार्ट-अप्स के लिए प्रारंभिक चरण के वित्त-पोषण हेतु मदद के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्ट-अप्स (FFS) का निर्माण किया गया है।
    • क्षेत्रक-विशिष्ट नीतियां: इसमें जैव प्रौद्योगिकी, कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रकों  के लिए नीतियां शामिल हैं।
  • स्टार्ट-अप इंडिया के अंतर्गत प्रमुख योजनाएं
    • स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS): यह चार साल की योजना है। यह स्टार्ट-अप्स को प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइप विकास, वाणिज्यीकरण आदि क्षेत्रों में सहायता प्रदान करती है।
    • स्टार्ट-अप्स के लिए ऋण गारंटी योजना (CGSS): यह योजना पात्र स्टार्टअप्स को दिए गए ऋणों पर गारंटी प्रदान करती है।
    • फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्ट-अप्स (FFS) योजना: इसका उद्देश्य भारतीय स्टार्ट-अप्स की घरेलू पूंजी तक पहुंच को बढ़ाना है।

इसके तहत हासिल प्रमुख उपलब्धियां 

  • स्टार्ट-अप्स की संख्या में वृद्धि: DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स की संख्या 2016 की 500 से बढ़कर वर्तमान 2025 में 1.59 लाख हो गई है।
  • स्टार्ट-अप इकोसिस्टम: भारत 100 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन गया है।
  • रोजगार सृजन: इसके तहत 31 अक्टूबर 2024 तक 16.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन हुआ है।
  • महिला सशक्तीकरण: 73,151 मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स में कम-से-कम एक महिला निदेशक है।

स्टार्ट-अप इंडिया के तहत अन्य पहलें 

  • भारत स्टार्ट-अप नॉलेज एक्सेस रजिस्ट्री (भास्कर) प्लेटफॉर्म: इसे 2024 में लॉन्च किया गया था। यह उद्यमियों, निवेशकों, सलाहकारों, नीति निर्माताओं और अन्य स्टार्ट-अप इकोसिस्टम हितधारकों को आपस में जोड़ता है।
  • MAARG मेंटरशिप प्लेटफॉर्म: यह प्लेटफॉर्म सलाहकारों और स्टार्ट-अप्स के बीच सही मिलान करने में मदद करता है, ताकि प्रभावी मार्गदर्शन व समर्थन प्राप्त हो सके।
  • स्टार्ट-अप इंडिया हब पोर्टल: यह एक व्यापक डिजिटल मंच है, जो उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों को सेवाएं प्रदान करता है।
  • राज्य स्टार्ट-अप रैंकिंग फ्रेमवर्क: यह पहल क्षेत्रीय स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह क्षमता निर्माण कार्यशालाओं के माध्यम से राज्य स्तर पर स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करती है।
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