गृह मंत्रालय ने भारत की नई राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति 'प्रहार' (PRAHAAR) का अनावरण किया है।
- यह आतंकवाद के खिलाफ 'शून्य सहिष्णुता' की सैद्धांतिक नीति पर आधारित है।
भारत द्वारा सामना की जाने वाली आतंकवाद संबंधी चुनौतियां
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प्रहार (PRAHAAR) रणनीति के मुख्य स्तंभ
- आतंकवादी हमलों की रोकथाम: वास्तविक समय (रियल-टाइम) में सूचना साझा करने के लिए मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) और आसूचना पर संयुक्त कार्य बल (JTFI) के माध्यम से एक सक्रिय व खुफिया-निर्देशित दृष्टिकोण अपनाना।
- प्रतिक्रिया: स्थानीय पुलिस 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' के रूप में कार्य करेगी, जिन्हें राज्य/ केंद्रीय आतंकवाद-रोधी बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) (गृह मंत्रालय के तहत नोडल बल) का समर्थन प्राप्त होगा।
- राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) और राज्य एजेंसियां गहन जांच एवं उच्च दोषसिद्धि दर सुनिश्चित करेंगी, ताकि अपराधियों में भय उत्पन्न हो।
- क्षमताओं का एकत्रीकरण: कानून प्रवर्तन एजेंसियों का आधुनिकीकरण और सभी राज्यों में समान आतंकवाद-रोधी संरचनाओं का मानकीकरण किया जाएगा। इसमें पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी शामिल है।
- मानवाधिकार और विधि के शासन पर आधारित प्रक्रियाएँ: रणनीति इस पर जोर देती है कि सभी आतंकवाद-रोधी कानूनों को मौलिक मानवाधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। साथ ही, जिला अदालतों से लेकर उच्चतम न्यायालय तक कानूनी निवारण के स्तर प्रदान करने चाहिए।
- आतंकवाद के अनुकूल परिस्थितियों को कम करना: भटके युवाओं के लिए श्रेणीबद्ध पुलिस प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कट्टरपंथ के खिलाफ सामुदायिक नेताओं, गैर-सरकारी संगठनों और उदार धर्मगुरुओं को शामिल किया जाएगा।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को आकार देना: पारस्परिक विधिक सहायता संधियों (MLATs) और प्रत्यर्पण संधियों के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त किया जाएगा और आतंकवाद के वित्त-पोषण पर रोक लगाई जाएगी।
- समाज के सामूहिक प्रयास से बहाली और लचीलापन: किसी भी घटना के बाद तेजी से सुधार और सामान्य स्थिति सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को अपनाया जाएगा।