स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के अनुसार, पिछले एक दशक में अंग प्रत्यारोपण की संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई है। 2013 में यह संख्या 5,000 से कम थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 20,000 हो गई है।
- इनमें से लगभग 18% प्रत्यारोपण मृत दाताओं द्वारा दान किए गए अंगों से जुड़े हैं, जो कैडेवरिक (मृतक दाता) दान में वृद्धि को दर्शाता है।
अंगदान/ प्रत्यारोपण में बढ़ती सफलता के लिए उत्तरदायी कारक
- संस्थागत क्षमता में मजबूती: राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने राष्ट्रीय समन्वय प्राधिकरण के रूप में कार्य किया है। साथ ही, राज्य और क्षेत्रीय OTTOs की क्षमताओं को भी मजबूत किया गया है।
- हरित गलियारे को बढ़ावा: निकाले गए अंगों को तेजी से ले जाने के लिए विशेष यातायात मुक्त मार्ग बनाया जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक बाधाएं कम हुई हैं।
- जनता का सकारात्मक दृष्टिकोण: 17 सितंबर, 2023 से अब तक 4.8 लाख से अधिक नागरिकों ने आधार-आधारित सत्यापन प्रणाली के माध्यम से अंग और ऊतक दान के लिए पंजीकरण कराया है।
- बेहतर अवसंरचना: अस्पतालों में दाताओं की पहचान, अंगों की प्राप्ति और उनके आवंटन के लिए बेहतर प्रणाली विकसित की गई है। इसमें केंद्र, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय शामिल है।
भारत में अंग प्रत्यारोपण संबंधी फ्रेमवर्क
- कानूनी ढांचा: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 (THOTA)।
- विनियामक तंत्र (THOTA, 1994 के तहत त्रि-स्तरीय संरचना:
- NOTTO: अंग/ ऊतक दान एवं प्रत्यारोपण के समन्वय, नेटवर्किंग और पंजीकरण के लिए सर्वोच्च निकाय।
- ROTTO: क्षेत्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन।
- SOTTO: राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन।
- राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (NOTP): यह एक केंद्रीय क्षेत्रक का कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद नागरिकों के लिए अंग प्रत्यारोपण तक पहुंच में सुधार करना है।