इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) ने ‘ब्लॉकचेन इंडिया चैलेंज’ शुरू किया है।
- इसका उद्देश्य भारतीय स्टार्ट-अप्स को अत्याधुनिक ब्लॉकचेन-आधारित डिजिटल गवर्नेंस समाधानों को प्रस्तुत करने और उनके प्रायोगिक परीक्षण के लिए प्रोत्साहित करना है।
ब्लॉकचेन क्या है?
- यह एक विकेंद्रीकृत और वितरित खाता-बही (लेजर) तकनीक है। यह हेर-फेर मुक्त, पारदर्शी और ऑडिट योग्य रिकॉर्ड-रखरखाव सुनिश्चित करती है।
- यह अपरिवर्तनीयता, सर्वसम्मति और क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा के सिद्धांतों पर कार्य करती है। इससे डेटा में हेर-फेर करना लगभग असंभव हो जाता है।
शासन में ब्लॉकचेन की भूमिका
- प्रमाण-पत्र एवं दस्तावेज: नकली दस्तावेजों और दस्तावेज जारी करने में होने वाली देरी की समस्या को दूर करने के लिए, NIC ने रिकॉर्ड के सुरक्षित भंडारण एवं पुनर्प्राप्ति हेतु ‘सर्टिफिकेट चेन’ विकसित की है।
- लॉजिस्टिक्स: उदाहरण के लिए- कर्नाटक की 'औषध' (Aushada) प्रणाली विनिर्माता से अस्पतालों तक दवाओं की आवाजाही और उनके गुणवत्ता परीक्षण को ट्रैक करती है।
- रोगी दवा विनिर्माता, एक्सपायरी डेट और गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं। इससे नकली दवाओं की रोकथाम होती है तथा पारदर्शिता बढ़ती है।
- न्यायपालिका: उदाहरण के लिए- 'अंतर्संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली' (ICJS) केस रिकॉर्ड, सबूतों और दस्तावेजों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपराधिक न्याय तंत्र को जोड़ती है।
- संपत्ति: उदाहरण के लिए- ‘ब्लॉकचेन-आधारित संपत्ति प्रबंधन प्रणाली’ संपत्ति के सभी लेन-देन का रिकॉर्ड रखती है। इससे स्वामित्व, अधिकार और देनदारियों का सत्यापन आसान हो जाता है। यह मुकदमेबाजी को कम करती है और विवाद समाधान में तेजी लाती है।
- अन्य: रिमोट वोटिंग (दूरस्थ मतदान), GST निगरानी, ब्लड बैंक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए भी अतिरिक्त 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' (PoC) विकसित किए जा रहे हैं।
सरकार द्वारा अन्य प्रमुख ब्लॉकचेन पहलें
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