हाल ही में, रक्षा मंत्री ने सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में पूरी तरह से स्वचालित मीडियम कैलिबर गोला-बारूद निर्माण सुविधा का उद्घाटन किया।
- आर्मेनिया के लिए निर्देशित पिनाका रॉकेट्स की पहली खेप को रवाना किया गया।
- सोलर ग्रुप द्वारा 'नागास्त्र' ड्रोन का विकास और 'भार्गवास्त्र' ड्रोन-रोधी प्रणाली का सफल परीक्षण निजी क्षेत्रक की बढ़ती तकनीकी शक्ति को दर्शाता है।
बढ़ता रक्षा स्वदेशीकरण और निर्यात
- स्वदेशी रक्षा उत्पादन: भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.51 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो 2014 के ₹46,425 करोड़ से बहुत अधिक है।
- निजी क्षेत्रक की भूमिका: इस उत्पादन में ₹33,000 करोड़ से अधिक का योगदान निजी क्षेत्रक का है।
- सरकार का लक्ष्य रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्रक की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50% या उससे अधिक करना है।
- निर्यात: भारत अब संयुक्त राज्य अमेरिका और फ्रांस सहित 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात करता है।
- रक्षा निर्यात 2014 में ₹1,000 करोड़ से भी कम था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹24,000 करोड़ हो गया है।
- महत्त्व
- आत्मनिर्भरता और सामरिक स्वायत्तता: स्वदेशीकरण से विदेशों पर निर्भरता कम होती है; आपूर्ति श्रृंखला की सुभेद्यताएं दूर होती हैं तथा मेंटेनेंस (रखरखाव), रिपेयर (मरम्मत) और ओवरहाल (नवीनीकरण) यानी MRO क्षमताओं में सुधार होता है।
- आर्थिक गुणक प्रभाव: स्वदेशीकरण घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करता है; रोजगार सृजित करता है और विदेशी मुद्रा की बचत करता है। उदाहरण के लिए- रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में 16,000 MSMEs का एकीकरण।
- राजनयिक प्रभाव: स्वदेशीकरण और निर्यात प्रोत्साहन भारत को वैश्विक रक्षा मूल्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदार और सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करते हैं।
प्रमुख पहलें
|