आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और देश को रक्षा विनिर्माण का वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाना | Current Affairs | Vision IAS
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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

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In Summary

  • भारत का रक्षा उत्पादन लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान 33,000 करोड़ रुपये से अधिक है और इसका लक्ष्य 50% से अधिक की भूमिका हासिल करना है।
  • वित्त वर्ष 2025 में रक्षा निर्यात बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये हो गया, जो 100 से अधिक देशों तक पहुंचा, जिससे आत्मनिर्भरता और राजनयिक प्रभाव में वृद्धि हुई।
  • प्रमुख पहलों में सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां, आरडीआई योजना, रक्षा गलियारे, आईडेक्स, श्रीजन और डीएपी 2020 शामिल हैं, जिनमें भारतीय उत्पाद खरीदने को प्राथमिकता दी गई है।

In Summary

हाल ही में, रक्षा मंत्री ने सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में पूरी तरह से स्वचालित मीडियम कैलिबर गोला-बारूद निर्माण सुविधा का उद्घाटन किया।

  • आर्मेनिया के लिए निर्देशित पिनाका रॉकेट्स की पहली खेप को रवाना किया गया।
  • सोलर ग्रुप द्वारा 'नागास्त्र' ड्रोन का विकास और 'भार्गवास्त्र' ड्रोन-रोधी प्रणाली का सफल परीक्षण निजी क्षेत्रक की बढ़ती तकनीकी शक्ति को दर्शाता है।

बढ़ता रक्षा स्वदेशीकरण और निर्यात

  • स्वदेशी रक्षा उत्पादन: भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.51 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो 2014 के ₹46,425 करोड़ से बहुत अधिक है।
  • निजी क्षेत्रक की भूमिका: इस उत्पादन में ₹33,000 करोड़ से अधिक का योगदान निजी क्षेत्रक का है। 
    • सरकार का लक्ष्य रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्रक की हिस्सेदारी को बढ़ाकर  50% या उससे अधिक करना  है।
  • निर्यात: भारत अब संयुक्त राज्य अमेरिका और फ्रांस सहित 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात करता है।
    • रक्षा निर्यात 2014 में  ₹1,000 करोड़ से भी कम था, जो  बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹24,000 करोड़ हो गया है।
  • महत्त्व
    • आत्मनिर्भरता और सामरिक स्वायत्तता: स्वदेशीकरण से विदेशों पर निर्भरता कम होती है; आपूर्ति श्रृंखला की सुभेद्यताएं दूर होती हैं तथा मेंटेनेंस (रखरखाव), रिपेयर (मरम्मत) और ओवरहाल (नवीनीकरण) यानी MRO क्षमताओं में सुधार होता है।
    • आर्थिक गुणक प्रभाव: स्वदेशीकरण घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करता है; रोजगार सृजित करता है और विदेशी मुद्रा की बचत करता है। उदाहरण के लिए- रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में 16,000 MSMEs का एकीकरण।
    • राजनयिक प्रभाव: स्वदेशीकरण और निर्यात प्रोत्साहन भारत को वैश्विक रक्षा मूल्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदार और सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करते हैं।

प्रमुख पहलें

  • स्वदेशीकरण की दिशा में: 'सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां'; ₹1 लाख करोड़ की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना; उत्तर प्रदेश एवं तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारे, iDEX (रक्षा उत्कृष्टता में नवाचार), सृजन/ SRIJAN (संयुक्त कार्रवाई के माध्यम से आत्मनिर्भर पहलें) आदि।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020: इसमें 'बाय इंडियन-IDDM' (स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी को प्राथमिकता दी गई है। इसमें निजी क्षेत्रक की भागीदारी और अनुमोदन में सुगमता शामिल है।
  • रक्षा खरीद नियमावली (DPM) 2025: 'व्यवसाय करने में सुगमता', नवाचार व स्वदेशीकरण के लिए समर्थन; उद्योग-अनुकूल प्रावधान; डिजिटल एकीकरण और पारदर्शिता पर जोर आदि।
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रक्षा खरीद नियमावली (DPM) 2025

DPM 2025 एक नई नियमावली है जो 'व्यवसाय करने में सुगमता', नवाचार, स्वदेशीकरण और डिजिटल एकीकरण पर जोर देती है, ताकि रक्षा खरीद प्रक्रिया अधिक कुशल और उद्योग-अनुकूल बन सके।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020

DAP 2020 भारत की रक्षा खरीद के लिए एक नीतिगत ढाँचा है, जो स्वदेशीकरण, 'बाय इंडियन' श्रेणियों को प्राथमिकता देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुगम बनाने पर केंद्रित है।

बाय इंडियन-IDDM (स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित)

यह रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 में एक श्रेणी है जो उन रक्षा उत्पादों को प्राथमिकता देती है जिनका डिजाइन, विकास और निर्माण भारत में ही हुआ है। यह स्वदेशीकरण और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देता है।

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