वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन ने वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 रिपोर्ट जारी की है। यह एटलस बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे के वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अनुमान प्रदान करता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मोटापे यानी ओबेसिटी को एक पुरानी, बार-बार होने वाली बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसमें शरीर में असामान्य या अत्यधिक वसा का संचय होता है जो स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है।
- इसका निदान लोगों के वजन और लंबाई (कद) को मापने और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) की गणना करके किया जाता है:
- BMI = वजन (किलोग्राम) / लंबाई² (मीटर²)
- स्कूली-आयु के बच्चों (5–19 वर्ष) के लिए, मोटापा तब माना जाता है जब यह WHO ग्रोथ रेफरेंस मीडियन से 2 मानक विचलन (standard deviations) से अधिक हो।
- इसका निदान लोगों के वजन और लंबाई (कद) को मापने और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) की गणना करके किया जाता है:
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
वैश्विक परिदृश्य

- मोटापा: स्कूली उम्र के बच्चों (5-19 वर्ष) में मोटापे का प्रसार 1975 के 4% से बढ़कर 2022 में लगभग 20% हो गया।
- इनमें से अधिकांश बच्चे मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं।
- प्रभाव: बचपन का मोटापा अक्सर वयस्क होने तक बना रहता है। इससे गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे कि मधुमेह, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
- मोटापा का उच्च प्रसार वाले देश: केवल दस देशों में ही उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले 20 करोड़ से अधिक स्कूली बच्चे रहते हैं। इनमें चीन, भारत और अमेरिका में सबसे अधिक बच्चे हैं।
भारतीय परिदृश्य
- उच्च प्रसार: अधिक वजन और मोटापे के साथ जी रहे बच्चों के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है।
- भारत में स्कूली उम्र के 4.1 करोड़ बच्चों का BMI उच्च है।
- गंभीर बीमारी के संकेतक: 2025 में, लगभग 83.9 लाख बच्चों में BMI-जनित 'मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड लिवर डिजीज' (MASLD) दर्ज की गई। वहीं, 29.8 लाख बच्चे BMI-जनित उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से पीड़ित थे।