भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और प्रतीक्षा ट्रस्ट ने ब्रेन को-प्रोसेसर पर 'मूनशॉट' परियोजना शुरू की | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • मूनशॉट प्रोजेक्ट, संपूर्ण संज्ञानात्मक चक्र को लक्षित करते हुए, तंत्रिका संबंधी डिकोडिंग और री-एनकोडिंग के लिए एआई-संचालित, द्विदिशात्मक मस्तिष्क सह-प्रोसेसर विकसित करता है।
  • नॉन-इनवेसिव ब्रेन स्टिमुलेशन (एनआईबीएस) तकनीकें जैसे कि टीएमएस और टीडीसीएस, बिना किसी इम्प्लांट के मस्तिष्क की गतिविधि को नियंत्रित करती हैं, जिससे तंत्रिका संबंधी विकारों पर शोध में सहायता मिलती है।
  • नैतिक चिंताओं में तंत्रिका संबंधी डेटा की गोपनीयता, स्वायत्तता, सुरक्षा जोखिम और संभावित दुरुपयोग शामिल हैं, जिसके लिए मजबूत नियामक ढांचे की आवश्यकता है।

In Summary

मूनशॉट परियोजना का उद्देश्य शरीर के अंदर लगाने योग्य (इम्प्लांटेबल) और नॉन-इनवेसिव (बिना सर्जरी के इस्तेमाल होने वाले) ब्रेन को-प्रोसेसर विकसित करना है।

  • ये उपकरण मस्तिष्क से मिलने वाले संकेतों (न्यूरल गतिविधि) को रिकॉर्ड करके उन्हें समझेंगे और संसाधित करेंगे, और फिर न्यूरल स्टिमुलेशन (तंत्रिका उद्दीपन) के माध्यम से इन संकेतों को दोबारा मस्तिष्क में भेजेंगे।

ब्रेन को-प्रोसेसर के बारे में

  • ब्रेन को-प्रोसेसर ऐसे AI-आधारित, द्विदिशीय (बिडायरेक्शनल) न्यूरल इंटरफेस होते हैं, जो मस्तिष्क से आने वाले संकेतों को समझते (डिकोड) और उनका विश्लेषण करते हैं, और फिर उन्हें दोबारा मस्तिष्क में भेजते हैं (री-एन्कोड)।
  • सामान्य ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) से अलग, ये केवल संकेत पढ़ने तक सीमित नहीं होते। ये मस्तिष्क की पूरी संज्ञानात्मक प्रक्रिया जैसे अनुभूति (Perception)ध्यान (Attention), निर्णयन और शरीर की गतिविधियों का नियंत्रण (मोटर कंट्रोल) को ध्यान में रखकर कार्य करते हैं। 
  • प्राथमिक लक्ष्य: स्ट्रोक से प्रभावित लोगों में हाथ को आगे बढ़ाने और चीज़ों को पकड़ने की क्षमता को फिर से बहाल करना।

नॉन-इनवेसिव ब्रेन स्टिमुलेशन (NIBS) के बारे में

  • यह एक ऐसी तकनीक है जो सर्जिकल प्रत्यारोपण के बिना मस्तिष्क की गतिविधि को नियंत्रित करती है।
  • इसमें ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (TMS) और ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (tDCS) जैसी पद्धतियों का उपयोग किया जाता है।
    • TMS और tDCS में मस्तिष्क के खुले हिस्से पर इलेक्ट्रोड लगाने की आवश्यकता नहीं होती और इनका उपयोग न्यूरोलॉजिकल, मनोचिकित्सीय और न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों पर शोध में किया जाता है।

ब्रेन को-प्रोसेसर से जुड़ी चिंताएं 

  • नैतिक चिंता: मस्तिष्क से जुड़ा डेटा (न्यूरल डेटा) की गोपनीयता (प्राइवेसी) और व्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चिंता।
  • सुरक्षा जोखिम: लंबे समय तक मस्तिष्क की गतिविधि में बदलाव (न्यूरल मॉड्यूलेशन) या मशीन लगाने के कारण स्वास्थ्य से जुड़े खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
  • दुरुपयोग की आशंका: इस तकनीक का गलत उपयोग संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ाने (कॉग्निटिव एन्हांसमेंट) या निगरानी (सर्विलांस) के लिए किया जा सकता है।

उपाय: 

  • उपर्युक्त तकनीक के उपयोग के लिए सख्त नियम-कानून बनाने और नैतिकता आधारित निगरानी  की जरूरत है। 
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

कॉग्निटिव एन्हांसमेंट (Cognitive Enhancement)

यह किसी व्यक्ति की संज्ञानात्मक क्षमताओं, जैसे स्मृति, ध्यान, या समस्या-समाधान कौशल को कृत्रिम रूप से बेहतर बनाने की प्रक्रिया है। इसमें दवाएं, तकनीकें या मस्तिष्क उत्तेजना जैसी विधियाँ शामिल हो सकती हैं।

न्यूरल मॉड्यूलेशन (Neural Modulation)

यह मस्तिष्क में तंत्रिका गतिविधि को बदलने या विनियमित करने की प्रक्रिया है। यह न्यूरोलॉजिकल और मनोवैज्ञानिक विकारों के उपचार के लिए एक उभरता हुआ क्षेत्र है।

ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (tDCS)

यह एक नॉन-इनवेसिव ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक है जो इलेक्ट्रोड के माध्यम से खोपड़ी पर कम-शक्ति वाली डायरेक्ट करंट लागू करती है, जिससे मस्तिष्क के गतिविधि के पैटर्न को बदला जा सके।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet