कुरुम्बा चित्रकला | Current Affairs | Vision IAS

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कुरुम्बा चित्रकला के विलुप्त होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह कुरुम्बा जनजाति की कला परंपरा है। 

कुरुम्बा चित्रकला के बारे में

  • इतिहास: यह लगभग 3000 वर्ष पुरानी जनजातीय लोक चित्रकला है।
  • यह चित्रकारी मुख्य रूप से तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में रहने वाली कुरुम्बा जनजाति द्वारा की जाती है।
    • कुरुम्बा जनजाति को "विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)" के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • चित्रकला के विषय: इसमें अनुष्ठान, आध्यात्मिक विश्वास, त्योहार, प्रकृति, पशु और सामुदायिक जीवन को दर्शाया जाता है।
  • सामग्री: चित्रकारी के लिए वन से प्राप्त प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है, जैसे पेड़ की राल (resin) और कुचली हुई पत्तियां।
  • शैली: इसकी विशेषता सरल रेखीय आकृतियाँ, बिंदु, रेखाएं और ज्यामितीय पैटर्न हैं।
  • सांस्कृतिक भूमिका: 
    • पारंपरिक रूप से यह घरों की दीवारों पर और मंदिरों में बनाई जाती है।
    • यह जनजातीय परंपराओं तथा कहानियों की दृश्यात्मक प्रस्तुति को संरक्षित करने का माध्यम है। 

भारत सरकार ने भारत के पोत-परिवहन क्षेत्रक में उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड (NSB) के साथ एक उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की।

राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड (NSB) के बारे में:

  • यह वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 1958 की धारा 4 के तहत 1959 में स्थापित एक स्थायी सांविधिक निकाय है।
  • मंत्रालय: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय।
  • उद्देश्य: भारत की समुद्री नीति के विकास सहित पोत परिवहन से संबंधित मामलों पर सरकार को सलाह देना।
  • संरचना: इसमें एक अध्यक्ष और अन्य सदस्य होते हैं:
    • संसद द्वारा निर्वाचित छह सदस्य: लोकसभा से चार सदस्य और राज्यसभा से दो सदस्य। ये सभी संबंधित सदन के सदस्यों में से निर्वाचित होते हैं।  
    • अन्य सदस्य: केंद्र सरकार द्वारा उचित समझे जाने वाले सदस्यों की संख्या, जिनकी अधिकतम संख्या 16 होनी चाहिए। 

वैसे तो होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से अधिकतर वैध टैंकर का आवागमन बंद हो गया है, लेकिन वैश्विक "शैडो फ्लीट" (Shadow Fleet) के जहाज सामान्य नियमों के बाहर संचालित होते हुए तेल का परिवहन जारी रखे हुए हैं। 

शैडो फ्लीट के बारे में:

  • इसे 'डार्क फ्लीट' के रूप में भी जाना जाता है। यह जहाजों के उस समूह को संदर्भित करता है जो अपने वास्तविक शुरुआत स्रोत, स्वामित्व आदि को छुपाते हैं तथा प्रतिबंधित या उच्च जोखिम वाली वस्तुओं का परिवहन करने के लिए भ्रामक शिपिंग गतिविधियों पर भरोसा करते हैं। 
  • आधुनिक शैडो फ्लीट का विस्तार 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेजी से हुआ, क्योंकि कई देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वैकल्पिक परिवहन तरीकों की आवश्यकता बढ़ गई।
  • शैडो फ्लीट के जहाज आमतौर पर अपने रेडियो ट्रांसपोंडर (AIS) बंद कर देते हैं, जिससे जहाज से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती।
  • ‘समुद्र में जीवन की सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (International Convention for the Safety of Life at Sea: SOLAS)’ जहाजों की प्रासंगिक जानकारी एकत्र करने के लिए रेडियो ट्रांसपोंडर को चालू रखना अनिवार्य करता है। 

उच्चतम न्यायालय ने टिप्पणी की है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमीलेयर की श्रेणी केवल माता-पिता की आय के आधार पर तय नहीं की जा सकती।

  • शीर्ष न्यायालय ने कहा कि क्रीमीलेयर निर्धारित करने के लिए निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारियों के साथ सरकारी कर्मचारियों की तुलना में अलग व्यवहार करना भेदभाव होगा।

क्रीमी लेयर के बारे में

  • क्रीमीलेयर  वास्तव में OBC में सामाजिक-आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत अधिक संपन्न सदस्य हैं। इसकी अवधारणा 1992 के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी वाद से उत्पन्न हुई।
    • इंदिरा साहनी वाद में उच्चतम न्यायालय ने नागरिक सेवा (सिविल) के पदों में OBC के लिए 27% आरक्षण को बहाल रखा। हालांकि, क्रीमीलेयर को इस वर्ग से बाहर रखने का निर्णय दिया। 
  • राम नंदन प्रसाद समिति ने क्रीमीलेयर के लिए निम्नलिखित मानदंडों की सिफारिश की: 
    • वे लोग जिनके माता-पिता कुछ श्रेणी की सरकारी सेवाओं में हैं या थे; और
    • वे लोग जिनकी आय एक निर्धारित सीमा से अधिक है।
    • आय की सीमा (थ्रेशोल्ड) को 2017 में बढ़ाकर 8 लाख रुपये वार्षिक कर दिया गया।  

भारत ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की ओर से बहरीन द्वारा प्रस्तुत उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की गई है। इस प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में मतदान होना है।

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बारे में 

  • मुख्यालय: रियाद (सऊदी अरब)
  • स्थापना: खाड़ी के छह देशों के बीच एक सहकारी समझौते के माध्यम से 25 मई, 1981 को स्थापित
  • सदस्य (6): संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, कतर, कुवैत।
  • उद्देश्य: सदस्य देशों के बीच समन्वय, एकीकरण और सहयोग को बढ़ावा देकर अधिक क्षेत्रीय एकता सुनिश्चित करना।
  • संस्थागत संरचना: 
    • सुप्रीम काउंसिल: उच्चतम प्राधिकरण; विवाद निपटान आयोग की निगरानी करती है; 
    • मंत्रिस्तरीय परिषद
    • महा-सचिवालय (Secretariat General)। 

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने GLP-1 दवाइयों के बढ़ते दुरुपयोग की चिंताओं के बीच फार्मास्यूटिकल कंपनियों को इन दवाइयों का विज्ञापन करने से प्रतिबंधित कर दिया है।

GLP-1 दवाइयों के बारे में:

  • GLP-1 से आशय है; ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट।  
  • यह दवाइयों का एक वर्ग है। ये दवाइयां शरीर में प्राकृतिक GLP-1 हार्मोन की तरह कार्य करती हैं और ब्लड शुगर स्तर तथा भूख को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
  • इन दवाइयों में ओज़ैम्पिक, वेगोवी, आदि शामिल हैं।
  • इन्हें मूल रूप से टाइप 2 मधुमेह के प्रबंधन के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन अब इनका उपयोग मोटापा कम करने और वजन घटाने के लिए भी किया जा रहा है।
  • ये दवाइयां भोजन के पाचन की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं और पेट भरे होने का एहसास बढ़ाती हैं। इससे भोजन का सेवन कम हो जाता है।
  • कुछ GLP-1 दवाइयां दिल का दौरा, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर के जोखिम को कम करने के साथ-साथ टाइप-2 मधुमेह, किडनी और लिवर रोगों की संभावना को भी कम कर सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने 'सहमति निष्कर्ष' (Agreed Conclusions) नामक एक नया वैश्विक फ्रेमवर्क अपनाया है। इसका उद्देश्य विश्व भर में महिलाओं और लड़कियों के लिए न्याय प्राप्ति में सुधार लाना है। 

  • इसे "महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW)’ के 70वें सत्र के दौरान व्यापक सहमति से अपनाया गया। यह सत्र न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में आयोजित हो रहा है। 

फ्रेमवर्क के मुख्य बिंदु

  • स्वरूप: यह फ्रेमवर्क कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।
  • प्रमुख सिफारिशें :
    • महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करने वाले भेदभावपूर्ण कानूनों को निरस्त करना।
    • ऑनलाइन और ऑफलाइन हिंसा से सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और पीड़ितों के लिए तेजी से न्याय प्राप्ति सुनिश्चित करना।
    • डिजिटल न्याय प्रणाली को बढ़ावा देना।
    • "संपूर्ण-सरकार" (whole-of-government) दृष्टिकोण अपनाना, जिसमें पुलिस, न्यायालय, स्वास्थ्य-देखभाल सेवाएँ और सामाजिक सेवाएं आपस में समन्वय में कार्य करें।
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कुरुम्बा चित्रकला

लगभग 3000 वर्ष पुरानी एक जनजातीय लोक चित्रकला परंपरा, जिसे कुरुम्बा जनजाति द्वारा अपनी अनुष्ठानिक, आध्यात्मिक, त्योहारों, प्रकृति, पशुओं और सामुदायिक जीवन की अभिव्यक्तियों को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसमें प्राकृतिक रंगों और सरल रेखीय आकृतियों, बिंदुओं, रेखाओं व ज्यामितीय पैटर्न का प्रयोग होता है।

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)

जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा पहचाने गए सबसे पिछड़े और कमजोर जनजातीय समूहों का एक उप-समूह। इन समूहों को विशेष सहायता और संरक्षण प्रदान किया जाता है ताकि उनके विकास को सुनिश्चित किया जा सके।

कुरुम्बा जनजाति

तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में निवास करने वाली एक जनजातीय समुदाय, जो अपनी पारंपरिक चित्रकला के लिए जानी जाती है। इन्हें 'विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

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