भारत तीन विभिन्न प्रकार के स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) विकसित कर रहा है | Current Affairs | Vision IAS

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  • भारत तीन एसएमआर मॉडल विकसित कर रहा है: बीएसएमआर 200 मेगावाट (पीडब्ल्यूआर, एसईयू ईंधन, तारापुर), एसएमआर-55 मेगावाट (पीडब्ल्यूआर, मॉड्यूलर, तारापुर), और 5 मेगावाट एचटीजीआर (हाइड्रोजन उत्पादन, विशाखापत्तनम)।
  • एसएमआर मॉड्यूलरिटी, स्केलेबिलिटी और पैसिव फीचर्स के साथ बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं, जो 2033 तक पांच ऑपरेशनल एसएमआर और 2047 तक 100 गीगावाट क्षमता के लिए भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन का समर्थन करते हैं।
  • शांति अधिनियम, 2025 का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के इस विस्तार का समर्थन करने के लिए भारत के परमाणु कानूनी ढांचे का आधुनिकीकरण करना है।

In Summary

IAEA के अनुसार SMRs बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लघुरूप हैं, जो प्रति मॉड्यूल 300 मेगावाट (MWe) तक परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। यह पारंपरिक परमाणु ऊर्जा रिएक्टर्स की क्षमता का लगभग एक-तिहाई है।

भारत के स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs)

  • जहां SMRs पूरी तरह से एक नई अवधारणा हैं, वहीं भारत स्मॉल रिएक्टर्स (BSRs) भारत की मौजूदा PHWR (प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर) तकनीक पर आधारित हैं।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा विकसित किए जा रहे 3 SMR मॉडल्स:
    • भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR) 200MWe: इसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
  • यह PWR (प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर) तकनीक पर आधारित है। इसमें ईंधन के रूप में अल्प संवर्धित यूरेनियम (SEU) का उपयोग किया जाएगा। इसका निर्माण तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र, महाराष्ट्र में किया जाना प्रस्तावित है।
  • SMR-55MWe: यह भी PWR तकनीक पर आधारित है और इसमें ब्लॉक-टाइप, अत्यधिक मॉड्यूलर डिजाइन की सुविधा है। इसका निर्माण भी तारापुर में होगा।
  • 5 MW तक का हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर: इसका उद्देश्य हाइड्रोजन उत्पादन है। इसे BARC विज़ाग, आंध्र प्रदेश में बनाया जाएगा।

भारत के लिए SMRs का महत्व

  • मॉड्यूलर: इनके हिस्सों को कारखाने में बनाया जा सकता है और निर्धारित स्थलों पर जोड़ा जा सकता है। इससे निर्माण में लगने वाला समय कम होता है और 'इकोनॉमी ऑफ स्केल' का लाभ मिलता है।
  • स्केलेबिलिटी: बढ़ती ऊर्जा मांग के अनुसार इन्हें धीरे-धीरे (Incremental) तैनात किया जा सकता है।
  • अधिक सुरक्षित: इनमें स्वाभाविक और 'निष्क्रिय' सुरक्षा विशेषताएं होती हैं, जिन्हें सिस्टम को बंद करने के लिए मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती।
  • अन्य: यह कम कार्बन वाली ऊर्जा का स्रोत हैं; और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आदि के उदय के कारण बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में सक्षम हैं।

भारत का परमाणु ऊर्जा पर बल

  • परमाणु ऊर्जा मिशन: केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित इस मिशन का लक्ष्य SMRs का अनुसंधान और विकास (R&D) है। इसका उद्देश्य 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए और परिचालनात्मक SMRs विकसित करना है।
  • परमाणु ऊर्जा लक्ष्य: 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य।
  • शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025: भारत के परमाणु कानूनी फ्रेमवर्क को समेकित और आधुनिक बनाना।
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SHANTI Act, 2025

A comprehensive umbrella law governing India's nuclear power sector, replacing previous legislation. It aligns with international nuclear commerce norms and permits both public and private entities to establish nuclear power plants and engage in related activities, including the transport, storage, and export of nuclear materials.

Nuclear Energy Mission

A government initiative focused on advancing nuclear energy research and development, particularly in the area of Small Modular Reactors (SMRs), with specific targets for operational SMRs by a set date.

Passive Safety Features

Passive safety features in nuclear reactors are systems that rely on natural forces like gravity, convection, or pressure differences to operate, rather than active components requiring external power or human intervention. This enhances reactor safety by ensuring shutdown or cooling even in the absence of power or operator action.

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