IAEA के अनुसार SMRs बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लघुरूप हैं, जो प्रति मॉड्यूल 300 मेगावाट (MWe) तक परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। यह पारंपरिक परमाणु ऊर्जा रिएक्टर्स की क्षमता का लगभग एक-तिहाई है।
भारत के स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs)
- जहां SMRs पूरी तरह से एक नई अवधारणा हैं, वहीं भारत स्मॉल रिएक्टर्स (BSRs) भारत की मौजूदा PHWR (प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर) तकनीक पर आधारित हैं।
- परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा विकसित किए जा रहे 3 SMR मॉडल्स:
- भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR) 200MWe: इसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
- यह PWR (प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर) तकनीक पर आधारित है। इसमें ईंधन के रूप में अल्प संवर्धित यूरेनियम (SEU) का उपयोग किया जाएगा। इसका निर्माण तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र, महाराष्ट्र में किया जाना प्रस्तावित है।
- SMR-55MWe: यह भी PWR तकनीक पर आधारित है और इसमें ब्लॉक-टाइप, अत्यधिक मॉड्यूलर डिजाइन की सुविधा है। इसका निर्माण भी तारापुर में होगा।
- 5 MW तक का हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर: इसका उद्देश्य हाइड्रोजन उत्पादन है। इसे BARC विज़ाग, आंध्र प्रदेश में बनाया जाएगा।
भारत के लिए SMRs का महत्व
- मॉड्यूलर: इनके हिस्सों को कारखाने में बनाया जा सकता है और निर्धारित स्थलों पर जोड़ा जा सकता है। इससे निर्माण में लगने वाला समय कम होता है और 'इकोनॉमी ऑफ स्केल' का लाभ मिलता है।
- स्केलेबिलिटी: बढ़ती ऊर्जा मांग के अनुसार इन्हें धीरे-धीरे (Incremental) तैनात किया जा सकता है।
- अधिक सुरक्षित: इनमें स्वाभाविक और 'निष्क्रिय' सुरक्षा विशेषताएं होती हैं, जिन्हें सिस्टम को बंद करने के लिए मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती।
- अन्य: यह कम कार्बन वाली ऊर्जा का स्रोत हैं; और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आदि के उदय के कारण बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में सक्षम हैं।

भारत का परमाणु ऊर्जा पर बल
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