भारत के सामान्य सरकारी ऋण में राज्यों की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है और वे प्रमुख लोक सेवाओं को प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, उनकी वित्त व्यवस्था का व्यवस्थित मूल्यांकन करना आवश्यक हो जाता है।
FHI 2026 की प्रमुख विशेषताएं
- शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य: 'अचीवर' (Achiever) श्रेणी के तहत ओडिशा शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य बना हुआ है।
- इसके बाद गोवा और झारखंड का स्थान है, जो अचीवर राज्यों के रूप में उभरे हैं।
- इन राज्यों में स्वयं के कर की उच्च हिस्सेदारी, बड़ा पूंजीगत परिव्यय (GSDP का 4-5%), कम राजकोषीय घाटा (GSDP के 3% से नीचे) और मध्यम ऋण स्तर देखा गया है।
- निचले पायदान वाले राज्य: पंजाब, पश्चिम बंगाल और केरल का प्रदर्शन निम्नतम रहा है, जहां गैर-विकासात्मक व्यय अधिक है तथा राजकोषीय पैटर्न कम टिकाऊ है।
- उत्तर-पूर्वी (NE) और हिमालयी राज्यों का समावेश: इस संस्करण में 10 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों को शामिल किया गया है, जिनका मूल्यांकन व रैंकिंग प्रमुख राज्यों से अलग की गई है।
- शीर्ष राज्य (अचीवर): अरुणाचल प्रदेश (उच्चतम रैंक) और उत्तराखंड।
- निचले राज्य: हिमाचल प्रदेश और मणिपुर (कमजोर राजस्व और निरंतर राजकोषीय तनाव के कारण)।
- राज्यों के राजकोषीय स्वास्थ्य में सुधार के लिए नीतिगत प्राथमिकताएं
- राजस्व जुटाने में वृद्धि करना और स्वयं की कर क्षमता को मजबूत करना।
- पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में सुधार लाना।
- सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करना और 'ऑफ-बजट' उधारियों की निगरानी करना।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI), 2026 के बारे में
- 5 मुख्य स्तंभ: व्यय की गुणवत्ता, राजस्व संग्रहण, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण संधारणीयता।
- श्रेणियां: राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है: अचीवर (Achiever), फ्रंट रनर (Front Runner), परफॉर्मर (Performer) और एस्पिरेशनल (Aspirational)।
- डेटा स्रोत: यह सूचकांक भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के आंकड़ों का उपयोग करता है।
- उप-संकेतक: उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए संकेतकों को परिष्कृत किया गया है, ताकि उनकी अनूठी विशेषताओं जैसे दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र, कम जनसंख्या घनत्व, सीमित राजस्व क्षमता और केंद्रीय हस्तांतरण पर अधिक निर्भरता को शामिल किया जा सके।