सिंथेटिक बायोलॉजी की उपयोगिता बढ़ रही है | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • कृत्रिम जीव विज्ञान, जीनोम संपादन द्वारा किए जाने वाले छोटे डीएनए परिवर्तनों से भिन्न, नई क्षमताओं को विकसित करके जीवों को उपयोगी उद्देश्यों के लिए पुन: डिज़ाइन करता है।
  • चुनौतियों में व्यक्तिगत उपचारों की वहनीयता, कृत्रिम रूप से निर्मित जीवों को छोड़ने से उत्पन्न जैव सुरक्षा जोखिम और जैविक हथियारों जैसे जैव सुरक्षा खतरे शामिल हैं।
  • नैतिक चिंताओं में जीवन का निर्माण, जोखिम/लाभ वितरण में समानता और इन प्रौद्योगिकियों तक पहुंच शामिल हैं।

In Summary

हाल के वर्षों में जीन और कोशिकाओं के बारे में हमारी समझ बढ़ी है, साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भी व्यापक प्रगति हुई है। इसके परिणामस्वरूप अब कोशिकाओं और जीवों में वांछित गुण प्राप्त करने के लिए पूरे जीनोम स्तर पर बदलाव करना संभव हो गया है।

सिंथेटिक बायोलॉजी के बारे में:

  • अर्थ: यह सजीवों (ऑर्गनिज्म) को उपयोगी उद्देश्यों के लिए नए गुण प्रदान करके उनका पुनः डिजाइन करने की प्रक्रिया है। 
    • जैसे: उदाहरण के लिए, प्रदूषकों की सफाई के लिए (बायोरेमेडिएशन) सूक्ष्मजीवों का उपयोग करना या विटामिन- A की कमी को पूरा करने हेतु चावल में बीटा-कैरोटीन उत्पादन की क्षमता विकसित करना। 

जीनोम एडिटिंग के साथ तुलना:

  • सिंथेटिक बायोलॉजी में वैज्ञानिक आमतौर पर DNA के लंबे भागों को आपस में जोड़ते हैं (जो या तो पहले से किसी जीव में मौजूद होते हैं या पूरी तरह से नए होते हैं) और उन्हें किसी जीव के जीनोम में प्रवेश कराते हैं।
  • जीनोम एडिटिंग में वैज्ञानिक आमतौर पर किसी जीव के स्वयं के DNA में ही आंशिक बदलाव करने (DNA के छोटे भागों को हटाने या जोड़ने) के लिए विशेष टूल्स का उपयोग करते हैं।

सिंथेटिक बायोलॉजी से जुड़ी चुनौतियां और चिंताएं

  • किफायती नहीं होना: इसके माध्यम से तैयार किए जाने वाले व्यक्तिकृत उपचार (पर्सनलाइज्ड थेरेपी) विशेष रूप से बहुत महंगे हो सकते हैं।
  • बायोसेफ्टी के स्तर पर: आनुवंशिक रूप से संशोधित सूक्ष्मजीवों को पर्यावरण में छोड़ने से अवांछित जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
  • बायोसिक्योरिटी से जुड़े जोखिम: सिंथेटिक बायोलॉजी के अनुचित उपयोग से असामाजिक तत्व जैविक हथियार बना सकते हैं (जैसे कि विषाक्त पदार्थों के विकास को तेज़ करके)।
  • साइबर-बायोसिक्योरिटी: जीव-विज्ञान और स्वचालन (ऑटोमेशन) के बीच बढ़ते तालमेल के कारण साइबर सुरक्षा का खतरा बढ़ रहा है।
  • नैतिकता से संबद्ध चुनौतियां: जीवों में कृत्रिम बदलाव करने; इसके लाभों और जोखिमों के समान वितरण करने तथा सभी लोगों के लिए समान पहुँच सुनिश्चित करने से जुड़े कई नैतिक और सामाजिक प्रश्न उत्पन्न होते हैं
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साइबर-बायोसिक्योरिटी (Cyber-biosecurity)

जीव-विज्ञान और स्वचालन (ऑटोमेशन) के बीच बढ़ते तालमेल के कारण उत्पन्न होने वाले साइबर सुरक्षा के खतरों को संदर्भित करता है।

बायोसिक्योरिटी (Biosecurity)

यह सिंथेटिक बायोलॉजी के अनुचित उपयोग से जुड़े जोखिमों को संदर्भित करता है, जैसे कि असामाजिक तत्वों द्वारा जैविक हथियार बनाने की संभावना।

बायोसेफ्टी (Biosafety)

यह आनुवंशिक रूप से संशोधित सूक्ष्मजीवों को पर्यावरण में छोड़ने से उत्पन्न होने वाले अवांछित जोखिमों से संबंधित चिंताएं हैं।

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