यह आह्वान जल के संधारणीय उपयोग के लिए जल शासन (Water Governance) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
दक्षतापूर्ण जल शासन की आवश्यकता क्यों है?
- जल संकट से निपटने हेतु: भारत में विश्व की लगभग 18% आबादी रहती है, लेकिन विश्व का केवल 4% ताजा जल संसाधन भारत में उपलब्ध है।
- आर्थिक विकास के लिए: नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार जल प्रबंधन में दक्षता की कमी के कारण वर्ष 2050 तक GDP में 6% तक की हानि हो सकती है।
- जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए: पारिस्थितिक-अनुकूल जल चक्र (Eco-hydrological cycle) को बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए समेकित जल संसाधन प्रबंधन (IWRM) आवश्यक है।
जल शासन की चुनौतियां
- जल शासन के लिए अलग-अलग निकाय: भूजल, सतही जल, सिंचाई और घरेलू उपयोग हेतु जल के प्रबंधन के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), केंद्रीय जल आयोग (CWC) जैसी कई संस्थाएं मौजूद हैं। हालांकि ये सभी अलग-थलग कार्य करती हैं और इनमें समन्वय का अभाव है।
- अत्यधिक दोहन: सब्सिडी वाली बिजली और विनियमन की कमी के कारण भूजल जलभृतों के स्तर में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है।
- समान पहुंच का अभाव: सतत जल स्रोतों तक पहुंच की कमी कमजोर वर्गों के विकास में बाधा बनती है। जैसे—महिलाएं और स्वच्छता से जुड़ी आवश्यकताएं।
- जलवायु परिवर्तन: जल चक्र (Hydrological Cycle) को प्रभावित करता है।
आगे की राह
- जल संसाधन का समेकित प्रबंधन: नदी घाटियों को एक इकाई के रूप में मानने तथा भूमि, जल और पारिस्थितिकी तंत्र को आपस में जोड़ने की जरूरत है।
- व्यवहार परिवर्तन, सामुदायिक भागीदारी, चक्रीय जल अर्थव्यवस्था (Circular Water Economy) और महिला अनुकूल जल शासन को बढ़ावा देना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: जन भागीदारी— ग्राम पंचायतों और गांव समितियों को स्थानीय जल प्रणालियों के प्रबंधन के लिए सशक्त बनाती है।
भारत में जल शासन
भूजल शासन के लिए पहलें
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