विश्व जल दिवस (22 मार्च) के अवसर पर प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • Efficient water governance is crucial for India due to its large population, limited freshwater resources, and potential GDP loss of 6% by 2050.
  • Challenges include fragmented management by multiple bodies, over-exploitation of groundwater due to subsidies and lack of regulation, and unequal access to water sources.
  • Way forward involves integrated water resource management, promoting community participation, circular water economy, and empowering women in water governance, supported by constitutional provisions and schemes like JJM and Namami Gange.

In Summary

यह आह्वान जल के संधारणीय उपयोग के लिए जल शासन (Water Governance) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।

दक्षतापूर्ण जल शासन की आवश्यकता क्यों है?

  • जल संकट से निपटने हेतु: भारत में विश्व की लगभग 18% आबादी रहती है, लेकिन विश्व का केवल 4% ताजा जल संसाधन भारत में उपलब्ध है।
  • आर्थिक विकास के लिए: नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार जल प्रबंधन में दक्षता की कमी के कारण वर्ष 2050 तक GDP में 6% तक की हानि हो सकती है। 
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए: पारिस्थितिक-अनुकूल जल चक्र (Eco-hydrological cycle) को बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए समेकित जल संसाधन प्रबंधन (IWRM) आवश्यक है।

जल शासन की चुनौतियां

  • जल शासन के लिए अलग-अलग निकाय: भूजल, सतही जल, सिंचाई और घरेलू उपयोग हेतु जल के प्रबंधन के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), केंद्रीय जल आयोग (CWC) जैसी कई संस्थाएं मौजूद हैं। हालांकि ये सभी अलग-थलग कार्य करती हैं और इनमें समन्वय का अभाव है।
  • अत्यधिक दोहन: सब्सिडी वाली बिजली और विनियमन की कमी के कारण भूजल जलभृतों के स्तर में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है।
  • समान पहुंच का अभाव: सतत जल स्रोतों तक पहुंच की कमी कमजोर वर्गों के विकास में बाधा बनती है। जैसे—महिलाएं और स्वच्छता से जुड़ी आवश्यकताएं
  • जलवायु परिवर्तन: जल चक्र (Hydrological Cycle) को प्रभावित करता है।

आगे की राह  

  • जल संसाधन का समेकित प्रबंधन: नदी घाटियों को एक इकाई के रूप में मानने तथा भूमि, जल और पारिस्थितिकी तंत्र को आपस में जोड़ने की जरूरत है।
  • व्यवहार परिवर्तन, सामुदायिक भागीदारी, चक्रीय जल अर्थव्यवस्था (Circular Water Economy) और महिला अनुकूल जल शासन को बढ़ावा देना चाहिए।
    • उदाहरण के लिएजन भागीदारी— ग्राम पंचायतों और गांव समितियों को स्थानीय जल प्रणालियों के प्रबंधन के लिए सशक्त बनाती है।

भारत में जल शासन

  • संवैधानिक स्थिति: ‘जल’ भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत राज्य सूची का विषय है, जबकि ‘अंतरराज्यीय नदियों का विनियमन और विकास’ संघ-सूची का विषय है।
    • अनुच्छेद 262: संसद को अंतरराज्यीय नदी विवादों के निपटारे के लिए प्रावधान करने की शक्ति देता है।
  • विधिक ढांचा:
    • अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (अधिकरण/ट्रिब्यूनल के गठन का प्रावधान)
    • नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 (अंतरराज्यीय नदियों के विनियमन हेतु नदी बोर्ड की स्थापना का प्रावधान)
    • जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974

भूजल शासन के लिए पहलें

  • केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय का गठन  (2019 में): जल संसाधन के लिए समेकित दृष्टिकोण और समग्र योजना निर्माण के लिए।
  • जल जीवन मिशन (JJM)हर घर नल कनेक्शन; जल समितियों में कम से कम 50% सदस्य महिलाएं होनी चाहिए।
  • नमामि गंगे: यह नदी कायाकल्प पर केंद्रित एक समेकित संरक्षण मिशन है।
  • अटल भूजल योजना: इसका उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से भूजल प्रबंधन है।

 

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अटल भूजल योजना

यह सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक योजना है, जिसका उद्देश्य भूजल स्तर को स्थिर करना और टिकाऊ बनाना है।

नमामि गंगे

यह गंगा नदी के कायाकल्प और संरक्षण के लिए भारत सरकार का एक एकीकृत मिशन है, जिसमें नदी प्रदूषण को कम करना और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना शामिल है।

जल जीवन मिशन (JJM)

यह एक केंद्र सरकार की योजना है जिसका उद्देश्य भारत के सभी ग्रामीण घरों में व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे पूरा करने के लिए अतिरिक्त 1.51 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

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