भारत में अग्नि-सुरक्षा में बार-बार होने वाली चूकें व्यवस्था में निहित कमियों को उजागर करती हैं | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • दिल्ली और कटक में हाल ही में हुई आग की घटनाओं से पता चलता है कि भारत में फायर सेफ्टी में लगातार कमियां हो रही हैं।
  • इन कमियों की वजहों में पर्यावरण की स्थिति, असुरक्षित शहरी डिज़ाइन, बिल्डिंग कोड का उल्लंघन और नियमों का ठीक से पालन न होना शामिल हैं।
  • आगे बढ़ने के लिए रेगुलेटरी नियमों का पालन पक्का करना, लोगों में जागरूकता बढ़ाना, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना और फायर सेफ्टी के लिए पैसे सुरक्षित करना शामिल है।

In Summary

हाल ही में, दिल्ली और कटक (ओडिशा) में आग लगने की घटनाओं ने अग्नि सुरक्षा में लगातार हो रही चूकों को उजागर किया है।

भारत में अग्नि-सुरक्षा में चूकों के कारण

  • पर्यावरणीय कारक: उच्च तापमान और शुष्क दशाएं आग लगने के जोखिम को बढ़ाती हैं। उदाहरण के लिए: कोच्चि के ब्रह्मपुरम अपशिष्ट निस्तारण संयंत्र में आग लगने की घटना (2023)
  • असुरक्षित शहरी डिजाइन एवं उच्च घनत्व: भूमि का मिश्रित उपयोग (आवासीय भवनों में ही वाणिज्यिक गतिविधियां संचालन), भीड़भाड़ और अवैध निर्माण आग लगने के जोखिम को बढ़ाते हैं। उदाहरण के लिए: दिल्ली में व्यावसायिक-सह-आवासीय भवन में आग लगना (2026)
  • भवन निर्माण संरचना से जुड़े नियमों का उल्लंघन: निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री, बदले हुए डिज़ाइन और असुरक्षित विद्युत प्रणाली आग लगने के जोखिम बढ़ाते हैं तथा बचाव कार्य को कठिन बनाते हैं। उदाहरण के लिए: कटक अस्पताल में आग लगने की घटना (2026)।
  • नियमों के अनुपालन एवं लागू करने में कोताहीराष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) का अनुपालन न होना, आग लगने की दशा में सुरक्षित निकास की कमी, खराब सुरक्षा प्रणालियां और अग्नि सुरक्षा की निरंतर जांच नहीं होना।
  • अपर्याप्त अग्निशमन अवसंरचना एवं त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता: फायर स्टेशनों, कर्मियों और उपकरणों की कमी समय पर कार्रवाई को प्रभावित करती है।
  • अन्य कारक: विद्युत शॉर्ट सर्किट, खराब रखरखाव और जन जागरूकता की कमी, आदि।

आगे की राह 

  • अग्नि सुरक्षा से संबंधित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना: किसी तीसरे पक्ष द्वारा भवनों में अग्नि सुरक्षा की अनिवार्य रूप से जांच करानी चाहिए, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने से पहले उचित जांच करनी चाहिए, संबंधित अधिकारियों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • अग्नि सुरक्षा के बारे में सामुदायिक जागरूकता एवं भागीदारी बढ़ाना: उदाहरण के लिए चीन में अग्नि सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाता है। सामुदायिक आधारित अग्नि रोकथाम कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जो लोगों को आग लगने से जुड़े जोखिमों और आपातकालीन कदम उठाने के बारे में शिक्षित करते हैं।
  • प्रौद्योगिकियों का उपयोग: AI आधारित “खतरे की पहचान और जोखिम मूल्यांकन (Hazard Identification & Risk Assessment: HIRA)”, घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए मोबाइल ऐप शुरू करने, फायर स्टेशन की बेहतर योजना बनाने, आदि पर बल देना चाहिए।
  • वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करना: उदाहरण के लिए: उपकरणों और अवसंरचना में सुधार  के लिए फायर टैक्स लगाने की शुरुआत करनी चाहिए।

भारत में अग्नि सुरक्षा विनियमन 

  • संवैधानिक प्रावधान: अग्निशमन सेवाएँ राज्य सूची का विषय है और 12वीं अनुसूची (अनुच्छेद 243W) के अंतर्गत आती हैं। इस तरह यह जिम्मेदारी शहरी स्थानीय निकायों को दी गई है।
  • राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC): यह भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी की गई है। इसमें भवनों में आग लगने की रोकथाम और सुरक्षा प्रणालियों के लिए व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
  • मॉडल भवन-निर्माण उपविधि (मॉडल बिल्डिंग बायलॉज), 2016: केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा जारी इन उप-नियमों का उद्देश्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को शहरी नियोजन में अग्नि सुरक्षा मानकों को शामिल करने के लिए मार्गदर्शन देना है।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देश: ये अस्पतालों, सार्वजनिक भवनों और शहरी क्षेत्रों सहित अग्नि सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश हैं।
  • अग्निशमन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण योजना: यह योजना केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर लागू की गई है। इसका उद्देश्य अग्निशमन अवसंरचना और क्षमता में सुधार करना है।
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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)

यह भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक शीर्ष निकाय है। यह आपदाओं की रोकथाम, शमन, क्षमता निर्माण और प्रतिक्रिया के लिए नीतियों, योजनाओं और दिशानिर्देशों के निर्माण और कार्यान्वयन का समन्वय करता है।

मॉडल भवन-निर्माण उपविधि

केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा जारी की गई ये उप-नियम राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों को शहरी नियोजन में अग्नि सुरक्षा मानकों को प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)

भारत का राष्ट्रीय मानक निर्धारक निकाय है, जिसकी स्थापना BIS अधिनियम, 2016 के तहत वस्तुओं के मानकीकरण, अंकन (marking) और गुणवत्ता प्रमाणन की गतिविधियों के सुसंगत विकास के लिए की गई थी। यह उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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