ऊर्जा संकट के बीच श्रीलंका भारत द्वारा सहायता प्राप्त त्रिंकोमाली परियोजना को विकसित करने पर विचार कर रहा है।

- त्रिंकोमाली श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित एक प्राकृतिक बंदरगाह है। यह दुनिया का दूसरा सर्वोत्तम प्राकृतिक बंदरगाह है।
त्रिंकोमाली परियोजना के बारे में
- वर्ष 2022 में, भारत-श्रीलंका ने त्रिंकोमाली ऑयल टैंक फार्म के संयुक्त विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
- इस ऑयल फार्म का निर्माण 1930 के दशक में अंग्रेजों द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नौसेना को ईंधन की आपूर्ति करना था।
- उद्देश्य: पेट्रोलियम भंडारण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना।
- रणनीतिक और वाणिज्यिक भूमिका: यह हिंद महासागर के प्रमुख समुद्री मार्गों के पास स्थित है। यह भारत के महासागर (MAHASAGAR) विजन और नेबरहुड फर्स्ट नीति के अनुरूप है।
ईरान युद्ध के कारण LNG जहाजों के यातायात में वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप पनामा नहर अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रही है।

पनामा नहर के बारे में
- यह एक कृत्रिम अंतर-महासागरीय जलमार्ग है। यह जलमार्ग लॉक सिस्टम का उपयोग करता है, जो वाटर लिफ्ट के रूप में कार्य करता है और जहाजों को ऊपर उठाता एवं नीचे लाता है।
- अवस्थिति: पनामा जलडमरूमध्य, मध्य अमेरिका।
- संपर्क बिंदु: यह नहर अटलांटिक महासागर (कैरिबियन सागर) और प्रशांत महासागर को जोड़ती है।
- लंबाई: लगभग 82 किमी।
- परिचालन: वर्ष 1914 से कार्यशील।
- रणनीतिक महत्व: यह वैश्विक व्यापार मार्गों को लगभग 8,000 समुद्री मील कम कर देता है।
CSIR-कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (CCMB), हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने भारतीय शहरी अपशिष्ट जल में पहला व्यापक AMR मानचित्र प्रकाशित किया है।
- अध्ययन से पता चलता है कि बैक्टीरिया उन जीनों के माध्यम से प्रतिरोधी बन जाते हैं जो एंटीबायोटिक दवाओं के विरुद्ध कोशिका की दीवारों को मजबूत करते हैं। ये जीन एंटीबायोटिक अणुओं को बेअसर या निष्कासित कर देते हैं। ये प्रतिरोधी गुणधर्म संतान और पड़ोसी रोगाणुओं, दोनों में फैल सकते हैं।
रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के बारे में
- AMR तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी रोगाणुरोधी दवाओं के प्रतिरोधी हो जाते हैं।
- रोगाणुरोधी दवाएं (जैसे एंटीबायोटिक, एंटीवायरल आदि) वे दवाएं हैं जिनका उपयोग मनुष्यों, जानवरों और पौधों में संक्रामक रोगों को रोकने और उनके उपचार के लिए किया जाता है।
- कारण:
- रोगाणुरोधी दवाओं का दुरुपयोग और अत्यधिक उपयोग।
- वाटर, सैनिटेशन और हाइजीन (WASH) तक पहुंच की कमी।
- संक्रमण और रोग निवारण एवं नियंत्रण प्रणालियों की कमियां।
- गुणवत्तापूर्ण और किफायती वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स और दवाओं की कम उपलब्धता।
माइनर प्लैनेट सेंटर (MPC) ने 15 नए चंद्रमाओं की खोज की घोषणा की है। इनमें 4 बृहस्पति के चारों ओर और 11 शनि के चारों ओर खोजे गए हैं।
माइनर प्लैनेट सेंटर (MPC) के बारे में
- यह लघु ग्रहों, धूमकेतुओं और प्रमुख ग्रहों के बाहरी अनियमित प्राकृतिक उपग्रहों के अवलोकनों के लिए विश्व का एकमात्र समेकित केंद्र है।
- कार्य: यह अवलोकनों और कक्षाओं की मास्टर फाइलों को सुरक्षित रखता है। यह प्रत्येक पिंड की खोजकर्ता का रिकॉर्ड रखता है और दुनिया के समक्ष नई खोजों की घोषणा करता है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) के तहत स्मिथसोनियन एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी में संचालित होता है।
- यह NASA के नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम द्वारा प्रायोजित है।
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1 sourceभारतीय नौसेना के INS त्रिकंड ने सेशेल्स में आयोजित लामितिये अभ्यास 2026 में भाग लिया।
लामितिये अभ्यास के बारे में
- यह भारत और सेशेल्स के बीच आयोजित होने वाला द्विवार्षिक सैन्य अभ्यास है। इसका आयोजन वर्ष 2001 से सेशेल्स में किया जा रहा है।
- 2026 का संस्करण इस अभ्यास की शुरुआत के बाद से पहला त्रि-सेवा अभ्यास था।
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1 sourceईरान ने डिएगो गार्सिया पर दो ‘मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें’ दागीं।

डिएगो गार्सिया के बारे में
- अवस्थिति: यह मध्य हिंद महासागर में चागोस द्वीपसमूह का सबसे बड़ा द्वीप है। यह मालदीव से 500 किमी दक्षिण में स्थित है।
- स्वामित्व: वर्ष 2025 में, यूनाइटेड किंगडम ने चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को स्थानांतरित कर दी थी। इसके साथ ही, डिएगो गार्सिया को अगले 99 वर्षों के लिए तुरंत यूके को वापस पट्टे पर दे दिया गया था।
- महत्व: यहां संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम का संयुक्त सैन्य अड्डा स्थित है।
- यह बाब-अल-मंडेब और मलक्का जलडमरूमध्य, दोनों से लगभग 3,000 किमी दूर स्थित है। यह अवस्थिति लंबी दूरी के बमवर्षकों को इन प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट्स को कवर करने में सक्षम बनाती है।
- यह अड्डा अमेरिकी अंतरिक्ष बल की निगरानी अवसंरचनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशानुसार, NBA ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत आक्रामक विदेशी प्रजातियों पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
NBA के बारे में
- मुख्यालय: चेन्नई में
- सांविधिक निकाय: यह जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत सांविधिक निकाय है। इसका गठन वर्ष 2003 में किया गया था।
- मंत्रालय: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय।
- संरचना:
- इसमें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष होते हैं।
- इसके अतिरिक्त 10 पदेन सदस्य और 5 गैर-सरकारी विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
- कार्य: इसके कार्यों में जैव विविधता का संरक्षण और जैविक संसाधनों का संधारणीय उपयोग शामिल है। यह संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत साझाकरण को सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक, विनियामक और परामर्शी कार्य करता है।
- भारतीय जैविक संसाधन पर आधारित किसी भी प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) चाहने वाले किसी भी व्यक्ति/संस्था को NBA से पूर्व अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है।
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1 sourceसरकार ने MSME की सहायता के लिए म्यूच्यूअल क्रेडिट गारंटी योजना में संशोधन किया है।
MSMEs के लिए म्यूच्यूअल क्रेडिट गारंटी योजना (2025) के बारे में
- यह केंद्रीय क्षेत्रक योजना है।
- उद्देश्य: यह मशीनरी या उपकरण की खरीद के लिए MSMEs को ₹100 करोड़ तक के ऋण प्रदान करती है। यह नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से सदस्य ऋण संस्थानों (MLIs) को 60% क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराती है।
प्रमुख संशोधन
- पात्रता का विस्तार: सेवा क्षेत्रक के MSMEs अब इस योजना के पात्र हैं।
- उपकरण लागत सीमा: इसे कुल परियोजना लागत के पिछले 75% की आवश्यकता से घटाकर अब 60% कर दिया गया है।
- गारंटी अवधि: क्रेडिट गारंटी कवर 10 वर्षों के बाद समाप्त हो जाएगा।
- इस योजना में निर्यातकों के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। उदाहरण के लिए, ₹20 करोड़ की गारंटीकृत ऋण राशि आदि।
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1 sourceUN-वाटर ने विश्व जल दिवस 2026 की थीम 'वाटर एंड जेंडर' पर आधारित संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2026 जारी की है।
- यह रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि लैंगिक अंतराल (SDG 5) को समाप्त किए बिना सार्वभौमिक जल सुरक्षा (SDG 6) प्राप्त नहीं की जा सकती।
मुख्य विशेषताएं
- जल उपलब्धता का अभाव: वैश्विक स्तर पर 2.1 बिलियन लोगों के पास अभी भी सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल की कमी है।
- स्वच्छता का अभाव: 3.4 बिलियन लोगों के पास सुरक्षित रूप से प्रबंधित स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच नहीं है।
- लैंगिक अंतराल: महिलाएं और लड़कियां जल की प्राथमिक संग्राहक हैं। वे प्रतिदिन 250 मिलियन घंटे से अधिक समय जल की व्यवस्था करने में व्यतीत करती हैं। यह स्थिति उनकी शिक्षा और आय-अर्जन को प्रभावित करती है।
- इस स्थिति की वजह से उन्हें शारीरिक तनाव और लैंगिक हिंसा का सामना करना पड़ता है। जलवायु परिवर्तन इन समस्याओं को और अधिक बढ़ा देता है।
- जल शासन और प्रबंधन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी कम है।