विश्व में युवाओं द्वारा आत्महत्या करने के सर्वाधिक मामले भारत में दर्ज किए जाते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में होने वाली कुल आत्महत्याओं में से 41% उन युवाओं द्वारा की जाती हैं जिनकी आयु 30 वर्ष से कम है।
भारत में युवाओं द्वारा आत्महत्या करने के प्रमुख कारण
- उच्च बेरोजगारी: भारत में कुल बेरोजगारी दर 3-5% है, जबकि 15-29 वर्ष के युवाओं में यह दर 15-29% तक है।
- मानसिक स्वास्थ्य संकट: 18-24 वर्ष के 50% से अधिक युवाओं ने खराब मानसिक स्वास्थ्य की सूचना दी है।
- संबंधों में समस्याएं: पारिवारिक विवाद, प्रेम प्रसंग और विवाह संबंधी तनाव, 18-30 वर्ष के युवा वयस्कों की लगभग 50% आत्महत्याओं का कारण बनते हैं।
- सांस्कृतिक मान्यताएं: पितृसत्तात्मक व्यवस्था महिलाओं को अधिक प्रभावित करती हैं, जैसे—शिक्षा और रोजगार में बाधाएं, दहेज, घरेलू हिंसा, आदि।
- अन्य कारण: शैक्षणिक प्रदर्शन का दबाव, कर्ज, मदद मांगने पर समाज द्वारा उसे नजरअंदाज करना, सामाजिक भेदभाव आदि।
आगे की राह
- संरचनाओं में बदलाव लाना: आर्थिक विकास, शहरीकरण और शैक्षिक सुधार के माध्यम से युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने की जरूरत है।
- उदाहरण के लिए: उपर्युक्त उपायों से चीन ने 1990 के दशक के बाद आत्महत्या दर को कम किया।
- गेटकीपर प्रशिक्षण यानी संकेतों को समझना: समुदाय के सदस्यों जैसे कि शिक्षकों को युवाओं में आत्महत्या के संकेत (जैसे-सामाजिक अलगाव) पहचानने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।
- सामाजिक सशक्तिकरण: उदाहरण के लिए: लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, जातिगत संरचनाओं को कमजोर करना (जैसे—कैंपस में जातिगत भेदभाव के खिलाफ UGC के नए दिशानिर्देश)।
- अन्य उपाय: आत्महत्या के साधनों तक पहुंच को सीमित करने (जैसे कि राजस्थान में कोटा जिला प्रशासन द्वारा एंटी-सुसाइड फैन रॉड का आदेश) की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम में भावनाओं को नियंत्रित करने और जीवन कौशल से जुड़े विषय को शामिल करना चाहिए, आदि।
युवाओं में आत्महत्या रोकने हेतु भारत में उठाए गए कदम
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