भारतीय कृषि क्षेत्रक ने अपनी मजबूती दिखाते हुए वर्ष 2024-25 में अब तक का सर्वाधिक उत्पादन दर्ज किया | Current Affairs | Vision IAS

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  • भारत की कृषि सकल वैश्विक मूल्य (जीवीएसी) में लगभग 20% का योगदान देती है, 46% कार्यबल को रोजगार प्रदान करती है, और 2024-25 में खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
  • भारत दालों, बाजरा और सूखे प्याज के निर्यात में वैश्विक स्तर पर पहले स्थान पर है, जबकि अनाज, फल और सब्जियों के निर्यात में दूसरे स्थान पर है, जिसका निर्यात वित्त वर्ष 2025 में 51.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
  • प्रमुख पहलों में पीएम-किसान, पीएमएफबीवाई, केसीसी के माध्यम से संस्थागत ऋण, खाद्य सुरक्षा के लिए लक्षित मिशन और ई-एनएएम के माध्यम से डिजिटल एकीकरण शामिल हैं, साथ ही साथ एफपीओ को बढ़ावा देना भी शामिल है।

In Summary

कृषि, भारत के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में लगभग पांचवें हिस्से का योगदान देती है और देश के लगभग 46% कार्यबल को रोजगार प्रदान करती है।

भारतीय कृषि क्षेत्रक का प्रदर्शन (2024-25 में)

  • रिकॉर्ड उत्पादनखाद्यान्न उत्पादन 357.73 मिलियन टन (MT) तक पहुंच गया। बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन रहा, जो उच्च मूल्य वाली फसलों की कृषि की ओर बढ़ते रुझान का संकेत है।
  • विश्व में भारत का स्थान:
    • विश्व में प्रथम स्थान: दलहन, मिलेट्स, सूखी प्याज (विश्व उत्पादन का लगभग 25%), नारियल और मसाला उत्पादन के मामले में।
    • विश्व में द्वितीय स्थान: अनाज (चावल एवं गेहूं), फल एवं सब्जियों, नकदी फसलों (गन्ना, कपास और चाय) के मामले में।
  • कृषि निर्यात: वित्त वर्ष 2020 के 34.5 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 51.1 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
    • प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2018 की लगभग 15% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 20.4% हो गई। यह वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय उच्च-मूल्य वाले खाद्य पदार्थों के एकीकरण का संकेत है। 

भारत में कृषि क्षेत्रक को बढ़ावा देने हेतु शुरू की गई पहलें:

  • वित्तीय पहलें:
    • आय सहायता: पीएम-किसान (PM-KISAN) योजना के तहत मार्च 2026 तक 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई।
    • जोखिम प्रबंधन: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2024-25 में 4.19 करोड़ किसानों का फसल बीमा किया गया।
    • संस्थागत ऋण: वर्तमान में 7.72 करोड़ सक्रिय किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) खाते मौजूद हैं।
  • लक्षित मिशन:
    • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन: चावल, गेहूं, दालों और पोषक अनाज के लिए।
    • दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2025–31)।
    • राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन।
  • अन्य पहलें:
    • 2025 तक 25 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए 6.85 लाख बीज ग्राम (Seed Villages) की स्थापना की गई। 
    • डिजिटल एकीकरण: राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नाम (e-NAM) से 1.8 करोड़ किसान जुड़ चुके हैं।
    • फरवरी 2026 तक 10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPOs) स्थापित किए गए, जिससे इन किसानों की सामूहिक सौदेबाजी को बढ़ावा मिला।  
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किसान उत्पादक संगठन (FPOs)

किसानों द्वारा गठित एक निकाय है जो कृषि उपज के उत्पादन, खरीद, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात के लिए सामूहिक रूप से कार्य करता है। यह किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होता है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM)

राष्ट्रीय कृषि बाजार (National Agriculture Market), जिसे ई-नाम (e-NAM) के नाम से जाना जाता है, भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच है। इसका उद्देश्य कृषि उपज के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाना है, जिससे किसानों को अपनी उपज को बेहतर मूल्य पर बेचने के लिए अधिक विकल्प मिल सकें।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड

मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) एक सरकारी पहल है जो किसानों को मिट्टी के पोषक तत्वों की स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करती है। यह कार्ड मिट्टी के स्वास्थ्य और उर्वरता के आधार पर उर्वरकों के उचित उपयोग की सिफारिशें भी देता है, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और लागत कम होती है।

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