वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास के लिए ‘विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs)’ को मजबूती देना | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • सीबीआईसी ने एसईजेड इकाइयों को 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक रियायती सीमा शुल्क पर घरेलू स्तर पर माल बेचने के लिए एकमुश्त राहत की पेशकश की है।
  • एसईजेड अधिनियम 2005 द्वारा शासित एसईजेड, शुल्क-मुक्त क्षेत्र हैं जिन्होंने महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित किया है और दिसंबर 2025 तक 31.73 लाख से अधिक नौकरियां सृजित की हैं।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) निर्यात वृद्धि, अवसंरचना विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में योगदान करते हैं, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में।

In Summary

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने वन-टाइम राहत योजना शुरू की है। इसके तहत पात्र विनिर्माण इकाइयों को विशेष आर्थिक क्षेत्रों से देश के भीतर यानी घरेलू बाजारों में रियायती सीमा शुल्क दरों पर वस्तुएँ बेचने की अनुमति दी गई है।

  • यह राहत योजना 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार में व्यवधानों से निपटने में विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विनिर्माताओं को सहायता प्रदान करना है।

विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) के बारे में

  • परिचय: ये विशेष रूप से निर्धारित, शुल्क-मुक्त क्षेत्र होते हैं। इन्हें व्यापार संचालन और सीमा शुल्क के लिए विदेशी क्षेत्र के रूप में माना जाता है।
  • वर्तमान स्थिति: फरवरी 2026 तक भारत में 368 अधिसूचित विशेष आर्थिक क्षेत्र हैं।
  • विधिक प्रावधान: इनका संचालन विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 और विशेष आर्थिक क्षेत्र नियम, 2006 के तहत होता है। ये सरल विनियामक ढांचा प्रदान करते हैं।

विशेष आर्थिक क्षेत्रों का महत्व

  • निर्यात वृद्धि: दिसंबर 2025 तक 11.70 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ।
  • निवेश केंद्र: SEZs ने दिसंबर 2025 तक कुल 7.86 लाख करोड़ रुपये का घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित किया।
  • रोजगार सृजन: दिसंबर 2025 तक 31.73 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए।
  • अवसंरचना विकास: मुंद्रा बंदरगाहकांडला बंदरगाहश्री सिटी और गिफ्ट सिटी जैसे आर्थिक केंद्रों का विकास हुआ।
  • प्रौद्योगिकी और नवाचार: विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और अर्धचालक क्षेत्रकों में उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी अपनाने को बढ़ावा मिला।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि: अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के लिए भारत को एक स्थिर और विश्वसनीय गंतव्य के रूप में स्थापित किया। 
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रियायती सीमा शुल्क दरें

ये मानक सीमा शुल्क दरों से कम दरें होती हैं जिन्हें सरकार विशेष परिस्थितियों या क्षेत्रों के लिए लागू करती है, ताकि व्यापार को प्रोत्साहित किया जा सके या विशिष्ट आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके।

विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005

यह अधिनियम भारत में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) की स्थापना और संचालन के लिए एक विधिक ढांचा प्रदान करता है, जिसमें उनके उद्देश्य, अधिकार और नियम शामिल हैं।

विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)

ये विशेष रूप से अधिसूचित क्षेत्र होते हैं जहाँ से व्यवसाय संचालित करने के लिए विशेष नियम और प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं। SEZ से जुड़े छूट और अनुकूलनों का लाभ बीमा कंपनियों को नवाचार और लचीलेपन को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

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