एक्सेस नाउ एनजीओ ने 'कीपिटऑन गठबंधन' के लिए 'इंटरनेट शटडाउन 2025' रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • 2025 में 52 देशों में इंटरनेट बंद होने की वैश्विक संख्या रिकॉर्ड 313 तक पहुंच गई; भारत में यह संख्या 65 रही, जो 2017 के बाद सबसे कम है, लेकिन किसी लोकतंत्र में सबसे अधिक है।
  • इंटरनेट बंद होने से मानवाधिकार संबंधी चिंताएं बढ़ती हैं, डीबीटी जैसी शासन व्यवस्था बाधित होती है, अनुच्छेद 21 और 19 के तहत मौलिक अधिकारों पर प्रभाव पड़ता है और लोकतांत्रिक कमी पैदा होती है।
  • भारत में, दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत शटडाउन को नियंत्रित किया जाता है, जिसके आदेश गृह सचिवों द्वारा जारी किए जाते हैं, जो 15 दिनों तक सीमित होते हैं और इसके लिए औचित्य का प्रकाशन आवश्यक होता है।

In Summary

कीपिटऑन (Keepiton) गठबंधन 'एक्सेस नाउ' द्वारा संचालित एक वैश्विक नागरिक-समाज गठबंधन है। यह इंटरनेट शटडाउन को समाप्त करने के लिए कार्य कर रहा है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • वैश्विक स्थिति: वर्ष 2025 में 52 देशों में रिकॉर्ड 313 इंटरनेट शटडाउन दर्ज किए गए। यह स्थिति 2023 से बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है।
  • भारत में स्थिति: भारत में 65 इंटरनेट शटडाउन दर्ज किए गए। यह 2017 के बाद सबसे कम है, लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक देश के मामले में सर्वाधिक है। भारत कुल मिलाकर दूसरे स्थान पर है। 
    • भारत का अपवाद: रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत में इंटरनेट शटडाउन के आदेश विधिवत रूप से प्रकाशित किए जाते हैं, लेकिन फिर भी शटडाउन को लोकतंत्र के साथ असंगत माना गया है।

इंटरनेट शटडाउन से जुड़ी चिंताएं

  • मानवाधिकारों का उल्लंघन: अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने इंटरनेट शटडाउन को 'मानवता के खिलाफ अपराधों' से जोड़ा है, क्योंकि इससे ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले को जवाबदेही से बचने में मदद मिलती है।
  • शासन और कल्याण: उदाहरण के लिए, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) में व्यवधान पहुंचता है।
  • आर्थिक प्रभाव: इंटरनेट शटडाउन के कारण 2024 में भारत को लगभग 323 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
  • मूल अधिकारों पर प्रभाव: फहीमा शिरिन बनाम केरल राज्य, 2019 मामले में न्यायालय ने 'इंटरनेट तक पहुँच' को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शिक्षा के अधिकार और निजता के अधिकार का भाग माना। 
  • अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ मामले में न्यायालय ने निर्णय दिया कि ‘इंटरनेट के माध्यम से व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता’ संविधान के अनुच्छेद 19 का भाग है।
  • लोकतंत्र को कमजोर करना: इंटरनेट शटडाउन प्रेस की स्वतंत्रता, सूचना के अधिकार और नागरिक समाज की लामबंदी में बाधा डालता है।

भारत में इंटरनेट शटडाउन के लिए विधिक प्रावधान

  • विधिक आधार: यह दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 द्वारा शासित है।
  • प्राधिकारी: इंटरनेट शटडाउन के आदेश केंद्रीय गृह सचिव या राज्य के गृह सचिव द्वारा जारी किए जाते हैं।
  • आपात स्थिति में: संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी द्वारा आदेश   जारी किया जा सकता है लेकिन 24 घंटे के भीतर सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
  • प्रकाशन अनिवार्य: इंटरनेट शटडाउन के विस्तृत औचित्य, लागू होने की भौगोलिक सीमा और प्रभावित होने वाली सेवाओं की जानकारी प्रकाशित करना अनिवार्य है।
  • निलंबन की अवधि: इंटरनेट शटडाउन 15 दिनों से अधिक नहीं हो सकता।
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163: यह मजिस्ट्रेटों को लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट शटडाउन का आदेश जारी करने का अधिकार देती है।
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