आर्टेमिस-II मिशन ने बाह्य-अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों को प्रक्षेपित किया | Current Affairs | Vision IAS

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  • आर्टेमिस नासा का प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस भेजना है, और आर्टेमिस समझौते अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
  • आर्टेमिस मिशन श्रृंखला में मानवरहित (आर्टेमिस I) और मानवयुक्त चंद्र फ्लाईबाई (आर्टेमिस II) मिशन शामिल हैं, जिनके भविष्य के चरणों का लक्ष्य चंद्र लैंडिंग और बेस निर्माण है।
  • वैज्ञानिक प्रगति, आर्थिक अवसरों, गहरे अंतरिक्ष में प्रवेश द्वार बनने की क्षमता और रणनीतिक महत्व के कारण चंद्रमा के अन्वेषण में वैश्विक स्तर पर फिर से रुचि पैदा हुई है।

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यह 10 दिनों का ऐतिहासिक मिशन है। नासा के अपोलो मिशन (1969-72) के बाद पिछले 50 वर्षों में पहली बार है जब इंसानों को चंद्रमा के निकट रवाना किया गया है।

आर्टेमिस मिशन के बारे में

  • आर्टेमिस नासा का प्रमुख ‘मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम’ है। इसका उद्देश्य इंसानों को चंद्रमा पर फिर से भेजना है।
    • वर्ष 2020 में आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) शुरू किए गए थे। यह वास्तव में अंतरिक्ष अन्वेषण में शांतिपूर्ण और पारदर्शी सहयोग सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौतों का समूह है। अब तक 60 से अधिक देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत वर्ष 2023 में इस समझौते में शामिल हुआ।  
  • आर्टेमिस मिशनों की श्रृंखला:
    • आर्टेमिस I (2022): यह मानव-रहित मिशन था। इसके तहत चंद्रमा के चारों ओर स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान का सफल परीक्षण किया गया।
    • आर्टेमिस II (2026): आर्टेमिस श्रृंखला में यह पहला मानवयुक्त मिशन है। इसमें चंद्रमा के चारों ओर फ्लाईबाय किया जाएगा, लेकिन इंसान चंद्रमा पर नहीं उतरेगा
    • भविष्य के चरण:
      • आर्टेमिस  III (2027): वाणिज्यिक लैंडर्स के परीक्षण के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में प्रदर्शन मिशन।
      • आर्टेमिस  IV (2028): आर्टेमिस मिशन के तहत पहली बार अंतरिक्ष-यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे।
      • आर्टेमिस  V (2028): आर्टेमिस मिशन के तहत दूसरी बार इंसान चंद्रमा पर उतरेगा। इस मिशन में वैज्ञानिक अनुसंधान और चंद्रमा पर बेस (आधार) बनाने की शुरुआत शामिल हैं।

चंद्रमा के अन्वेषण में वैज्ञानिकों की अभिरुचि क्यों बढ़ी है?

  • वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति हेतु: वैज्ञानिक पृथ्वी और सौरमंडल की उत्पत्ति एवं उद्विकास को अच्छी तरह समझना चाहते हैं।
  • आर्थिक अवसर: अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु और संसाधनों (वाटर-आइस, हीलियम-3) के उपयोग हेतु।
  • डीप स्पेस का प्रवेश द्वार: भविष्य में मंगल और अन्य ग्रहों के बारे में अध्ययन के लिए लंबी अवधि वाले मिशनों के परीक्षण हेतु।
  • रणनीतिक महत्व: राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और अंतरिक्ष शक्ति में वृद्धि के लिए।

चंद्र-अन्वेषण हेतु विभिन्न देशों की प्रमुख पहलें

  • भारत (चंद्रयान श्रृंखला): चंद्रमा पर जल अणुओं की खोज; दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश।
  • चीन: चांग-ई 6-चंद्रमा से सैंपल लेकर पृथ्वी पर वापस आने वाला रोबोटिक मिशन।
  • जापान: स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून (SLIM) मिशन ने चंद्रमा पर पहली बार बहुत सटीक (पिनपॉइंट) लैंडिंग हासिल की।
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