यह 10 दिनों का ऐतिहासिक मिशन है। नासा के अपोलो मिशन (1969-72) के बाद पिछले 50 वर्षों में पहली बार है जब इंसानों को चंद्रमा के निकट रवाना किया गया है।
आर्टेमिस मिशन के बारे में
- आर्टेमिस नासा का प्रमुख ‘मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम’ है। इसका उद्देश्य इंसानों को चंद्रमा पर फिर से भेजना है।
- वर्ष 2020 में आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) शुरू किए गए थे। यह वास्तव में अंतरिक्ष अन्वेषण में शांतिपूर्ण और पारदर्शी सहयोग सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौतों का समूह है। अब तक 60 से अधिक देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत वर्ष 2023 में इस समझौते में शामिल हुआ।
- आर्टेमिस मिशनों की श्रृंखला:
- आर्टेमिस I (2022): यह मानव-रहित मिशन था। इसके तहत चंद्रमा के चारों ओर स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान का सफल परीक्षण किया गया।
- आर्टेमिस II (2026): आर्टेमिस श्रृंखला में यह पहला मानवयुक्त मिशन है। इसमें चंद्रमा के चारों ओर फ्लाईबाय किया जाएगा, लेकिन इंसान चंद्रमा पर नहीं उतरेगा।
- भविष्य के चरण:
- आर्टेमिस III (2027): वाणिज्यिक लैंडर्स के परीक्षण के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में प्रदर्शन मिशन।
- आर्टेमिस IV (2028): आर्टेमिस मिशन के तहत पहली बार अंतरिक्ष-यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे।
- आर्टेमिस V (2028): आर्टेमिस मिशन के तहत दूसरी बार इंसान चंद्रमा पर उतरेगा। इस मिशन में वैज्ञानिक अनुसंधान और चंद्रमा पर बेस (आधार) बनाने की शुरुआत शामिल हैं।
चंद्रमा के अन्वेषण में वैज्ञानिकों की अभिरुचि क्यों बढ़ी है?
- वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति हेतु: वैज्ञानिक पृथ्वी और सौरमंडल की उत्पत्ति एवं उद्विकास को अच्छी तरह समझना चाहते हैं।
- आर्थिक अवसर: अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु और संसाधनों (वाटर-आइस, हीलियम-3) के उपयोग हेतु।
- डीप स्पेस का प्रवेश द्वार: भविष्य में मंगल और अन्य ग्रहों के बारे में अध्ययन के लिए लंबी अवधि वाले मिशनों के परीक्षण हेतु।
- रणनीतिक महत्व: राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और अंतरिक्ष शक्ति में वृद्धि के लिए।
चंद्र-अन्वेषण हेतु विभिन्न देशों की प्रमुख पहलें
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