पार्कर सोलर प्रोब सूर्य के करीब उड़ान भरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना | Current Affairs | Vision IAS
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नासा के पार्कर सोलर प्रोब ने उपसौर (Perihelion) बिंदु पर सोलर फ्लाई का प्रदर्शन किया। 

  • उपसौर किसी ग्रह या अन्य खगोलीय पिंड की कक्षा में उस बिंदु को संदर्भित करता है, जिस पर वह सूर्य के सबसे निकट होता है।
    • उपसौर का विपरीत अपसौर (Aphelion) होता है, जिसमें कोई ऑब्जेक्ट या पिंड सूर्य से सबसे दूर होता है।
  • इस मिशन के दौरान पार्कर सोलर प्रोब की गति लगभग 700,000 किलोमीटर प्रति घंटा थी। ऐसा करके वह इतिहास में सबसे तेज मानव निर्मित ऑब्जेक्ट बन गया है।
  • यह अंतरिक्ष यान शुक्र ग्रह के नजदीक से 7 बार गुजरने (Flybys) के दौरान गुरुत्वाकर्षण बल की मदद से गति और दिशा को नियंत्रित कर सूर्य के इतने करीब पहुंचा है।

पार्कर सोलर प्रोब (2018) के बारे में

  • उद्देश्य: इसे सूर्य के बाहरी वायुमंडल, जिसे कोरोना कहा जाता है का अध्ययन करने के लिए लॉन्च किया गया है। इसका उद्देश्य सौर पवनों के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाना है।
    • सौर पवनें सूर्य के कोरोना से प्रोटॉन्स और इलेक्ट्रॉन्स का सतत प्रवाह है।
  • प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण: फ़ील्ड्स एक्सपेरिमेंट (FIELDS), इंटीग्रेटेड साइंस इन्वेस्टीगेशन ऑफ द सन (IS☉IS), आदि। 

सौर गतिविधि का अध्ययन करना क्यों महत्वपूर्ण है? 

  • अंतरिक्ष मौसम को समझना: सौर ज्वालाएं और कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) जैसी सौर गतिविधियां अंतरिक्ष मौसम को प्रभावित करती हैं। इससे सैटेलाइट्स ठीक से कार्य नहीं कर पाती हैं। अत: इन सौर गतिविधियों का अध्ययन करना महत्वपूर्ण हो जाता है। 
  • इलेक्ट्रिक ग्रिड और प्रौद्योगिकी सुरक्षा उपाय: सौर गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाले भू-चुंबकीय तूफान विद्युत ग्रिड्स में करंट उत्पन्न कर सकते हैं। इससे ब्लैकआउट या भारी उपकरण क्षति हो सकती है।
  • अन्य: अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आदि।
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