असम में सात संदिग्ध ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs)’ हिरासत में लिए गए | Current Affairs | Vision IAS

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  • ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) यूएलएफए जैसे प्रतिबंधित समूहों को रसद, धन और भर्ती प्रदान करके उनका समर्थन करते हैं, और विद्रोह के महत्वपूर्ण प्रवर्तक के रूप में कार्य करते हैं।
  • पूर्वोत्तर में उग्रवाद जातीय संघर्षों, सीमा संबंधी मुद्दों, सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन और प्रवासन से उपजा है, हालांकि घटनाओं और नागरिक मौतों में काफी कमी आई है।
  • उग्रवाद का मुकाबला करने के उपायों में शांति समझौते (बोडो, यूएलएफए), विकास योजनाएं (पीएम-डेवीआईएनई), आर्थिक पहल, एएफएसपीए का युक्तिकरण और उग्रवाद विरोधी अभियान शामिल हैं।

In Summary

ये ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) प्रतिबंधित विद्रोही समूह ULFA (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) से जुड़े थे। 

  • ULFA को विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत अवैध संगठन घोषित किया गया है।

ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) कौन हैं?

  • ये वे लोग हैं जो उग्रवादियों को लॉजिस्टिक्स सहायतावित्तपोषणवैचारिक समर्थन प्रदान करते हैं तथा भटके युवाओं की भर्ती में मदद करते हैं।
  • ये प्रत्यक्ष तौर पर हथियार नहीं उठाते लेकिन विद्रोह या विद्रोही समूह के लिए महत्वपूर्ण सूत्रधार के रूप में कार्य करते हैं।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद के कारण

  • नृजातीय और पहचान की सुरक्षा को लेकर संघर्ष: भाषा, नृजातीय विविधता और जनजातियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण प्रायः तनाव उत्पन्न होते हैं।
  • भौगोलिक और सीमा संबंधी समस्याएं: दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ होने के कारण सख्त निगरानी मुश्किल हो जाती है। इससे सीमा पार से घुसपैठ आसान हो जाती है और उग्रपंथियों को सुरक्षित ठिकाने मिल जाते हैं।
  • सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन:  विकास की कमी, बेरोजगारी आदि असंतोष को बढ़ाते हैं।
  • अन्य कारण: बाहरी लोगों के प्रवास से संबंधित मुद्दे, संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा और सीमा पार संपर्क, आदि।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद की वर्तमान स्थिति

  • गैरकानूनी संगठन: लगभग 16 विद्रोही समूह/आतंकवादी संगठन प्रतिबंधित घोषित हैं।  
  • उग्रवाद की घटनाएं: 2004 की 1234 से घटकर नवंबर 2025 तक 143 रह गईं। 
  • उग्रवादी घटनाओं में नागरिकों की मौतें: 414 से घटकर 5 हो गई। 

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • शांति समझौतों पर हस्ताक्षर: उदाहरण के लिए, बोडो शांति समझौता (2020)उल्फा शांति समझौता (2023), तथा  नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT)-ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (ATTF)  शांति समझौता (2024)। 
  • विकास के उपाय:
    • संपर्क योजनाएं: पीएम-डिवाइन/DevINE (प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल), उन्नति-2024, आदि।
    • आर्थिक पहलें: 'राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट' और पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम लिमिटेड (NEDFi) के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देना।
    • सैन्य और सुरक्षा: 
      • सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा) क्षेत्रों में कमी: पूर्वोत्तर क्षेत्र में अफस्पा (AFSPA) के विस्तार में 75% की कमी की गई है।
      • आतंकवाद-रोधी अभियान: 'ऑपरेशन ऑल क्लियर' और 'ऑपरेशन सनराइज' जैसे सफल अभियान चलाए गए हैं। 
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बोडो शांति समझौता (2020)

असम में बोडो उग्रवादी समूहों और केंद्र सरकार तथा असम सरकार के बीच एक समझौता है। इसका उद्देश्य बोडो समुदाय की राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आकांक्षाओं को संबोधित करके दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त करना है।

सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा), 1958

यह एक विवादास्पद भारतीय कानून है जो अशांत क्षेत्रों में सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियाँ प्रदान करता है, जैसे कि बिना वारंट के गिरफ्तारी और किसी भी व्यक्ति को मार गिराने की शक्ति।

पीएम-डिवाइन/DevINE (प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल)

यह पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक योजना है।

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