यूएनडीपी की रिपोर्ट में भारत पर पश्चिम एशिया संघर्ष के आर्थिक प्रभाव को रेखांकित किया गया | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष से दक्षिण एशिया को सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे संभावित रूप से 25 लाख भारतीय गरीबी की चपेट में आ सकते हैं।
  • गैस की बढ़ती कीमतें भारतीय रुपये को कमजोर करती हैं, कोयले की ओर रुझान बढ़ाती हैं, और उर्वरक आयात पर निर्भरता के कारण लगभग 48 अरब अमेरिकी डॉलर के गैर-तेल निर्यात और महत्वपूर्ण खरीफ सीजन को खतरे में डालती हैं।
  • नीतिगत प्राथमिकताओं में झटकों के प्रति संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा, लघु और मध्यम उद्यमों का लचीलापन, नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से संरचनात्मक जोखिम को कम करना और ऊर्जा/खाद्य सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करना शामिल है।

In Summary

‘मध्य पूर्व में सैन्य तनाव में वृद्धि: एशिया और प्रशांत क्षेत्र में मानव विकास पर प्रभाव’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से दक्षिण एशिया को सवार्धिक सापेक्ष आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

भारत पर संघर्ष का प्रभाव

  • मानव विकास पर प्रभाव: यह संकट लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) भारतीयों को निर्धनता में धकेल सकता है।
  • ऊर्जा और वित्त प्रभाव: गैस की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया कमजोर हुआ है और कोयले के उपयोग की ओर रुख करना पड़ा है। इससे प्रदूषण और स्वास्थ्य से संबंधित जोखिम बढ़ गए हैं।
    • भारत अपने तेल आयात का 40% से अधिक और सभी LPG आयात का 90% पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है।
  • व्यापार और स्वास्थ्य-देखभाल से जुड़े निर्यात पर प्रभाव: आपूर्ति बाधित होने (जैसे-एयर कार्गो फंसना) से पश्चिम एशिया को होने वाले लगभग 48 अरब डॉलर के गैर-तेल निर्यात पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • कृषि और खाद्य पर प्रभाव: पश्चिम एशिया से भारत अपने उर्वरक आयात का 45% से अधिक प्राप्त करता है, और भारत में उत्पादित लगभग 85% यूरिया आयातित तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) पर निर्भर है।
    • यदि आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा आती है, तो आने वाले महत्वपूर्ण खरीफ (मानसून) सीजन पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।  
  • श्रम और विप्रेषण (Remittances) पर प्रभाव: खाड़ी देशों में लगभग 93.7 लाख भारतीय काम करते हैं, जिनकी नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। ये लोग भारत को प्राप्त होने वाले कुल विप्रेषण में 38–40% का योगदान देते हैं।

दीर्घकालिक समाधान के लिए नीतिगत प्राथमिकताएं

  • संकट-अनुरूप सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनाना: सभी को एक समान सब्सिडी देने के बजाय लक्षित नकद अंतरण (कैश ट्रांसफर) प्रक्रिया अपनानी चाहिए। इसमें असंगठित क्षेत्र के कामगारों, प्रवासियों और महिलाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • आजीविका की सुरक्षा और MSME क्षेत्रक की मजबूती: लघु व्यवसायों को कम ब्याज दर पर ऋण, सरकारी गारंटी, और कारोबार को जारी रखने के लिए सहायता प्रदान करनी चाहिए।
  • अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए संरचनात्मक सुधार: नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करने, संसाधनों के स्रोतों में विविधता लाने, और घरेलू खाद्य प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है। इससे बाह्य संकट के समय आपूर्ति बाधित होने से जुड़े खतरों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
  • क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना: रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए संयुक्त रणनीतियां बनाई जाएँ (जैसे आपूर्ति के विविध स्रोत और भंडारण प्रबंधन)।
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खाद्य सुरक्षा

इसका अर्थ है कि सभी लोगों के पास, हर समय, भौतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक पहुंच हो जो उनकी आहार संबंधी आवश्यकताओं और खाद्य वरीयताओं को जीवन जीने के लिए पूरा करे।

नवीकरणीय ऊर्जा

Renewable Energy. Energy derived from natural sources that are replenished at a higher rate than they are consumed, such as solar, wind, and hydro power. The CCPI encourages a shift towards these sources.

MSME क्षेत्र

Micro, Small, and Medium Enterprises (MSME) sector, a vital part of the economy contributing to employment and growth. These businesses often face challenges during economic downturns and require government support for survival.

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