‘मध्य पूर्व में सैन्य तनाव में वृद्धि: एशिया और प्रशांत क्षेत्र में मानव विकास पर प्रभाव’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से दक्षिण एशिया को सवार्धिक सापेक्ष आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
भारत पर संघर्ष का प्रभाव
- मानव विकास पर प्रभाव: यह संकट लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) भारतीयों को निर्धनता में धकेल सकता है।
- ऊर्जा और वित्त प्रभाव: गैस की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया कमजोर हुआ है और कोयले के उपयोग की ओर रुख करना पड़ा है। इससे प्रदूषण और स्वास्थ्य से संबंधित जोखिम बढ़ गए हैं।
- भारत अपने तेल आयात का 40% से अधिक और सभी LPG आयात का 90% पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है।
- व्यापार और स्वास्थ्य-देखभाल से जुड़े निर्यात पर प्रभाव: आपूर्ति बाधित होने (जैसे-एयर कार्गो फंसना) से पश्चिम एशिया को होने वाले लगभग 48 अरब डॉलर के गैर-तेल निर्यात पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
- कृषि और खाद्य पर प्रभाव: पश्चिम एशिया से भारत अपने उर्वरक आयात का 45% से अधिक प्राप्त करता है, और भारत में उत्पादित लगभग 85% यूरिया आयातित तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) पर निर्भर है।
- यदि आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा आती है, तो आने वाले महत्वपूर्ण खरीफ (मानसून) सीजन पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
- श्रम और विप्रेषण (Remittances) पर प्रभाव: खाड़ी देशों में लगभग 93.7 लाख भारतीय काम करते हैं, जिनकी नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। ये लोग भारत को प्राप्त होने वाले कुल विप्रेषण में 38–40% का योगदान देते हैं।
दीर्घकालिक समाधान के लिए नीतिगत प्राथमिकताएं
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