सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उच्च संवृद्धि दर होने के बावजूद, मध्यम वर्ग का संकट देश में वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग, आर्थिक स्थिरता और भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए खतरा बन रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मध्यम वर्ग ही लगभग 60% घरेलू खपत में योगदान देता है।
मध्यम वर्ग का आर्थिक संकट
- आय में ठहराव:
- ठहराव: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) जैसे प्रमुख क्षेत्रकों में आय/वेतन वृद्धि लगभग रुक सी गई है, जिससे मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक क्रय शक्ति कम हो रही है।
- प्रौद्योगिकी की वजह से विस्थापन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन को तेजी से अपनाए जाने के कारण करियर में आगे बढ़ने के अवसर सीमित हो रहे हैं।
- पारंपरिक क्षेत्रक की सीमाएं: मध्यम वर्ग के लिए बैंकिंग और सरकारी नौकरियां जैसे पारंपरिक अवसर सुरक्षित तो हैं, लेकिन इनमें आय बढ़ने की संभावनाएं सीमित हैं।
- लागत मुद्रास्फीति (Cost Inflation):
- विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों तथा मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर जैसे महानगरों में घर बहुत महंगे हो गए हैं।
- अत्यधिक प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक वातावरण के कारण शिक्षा के खर्चों में वृद्धि हो गई है।
- अवहनीय स्वास्थ्य-देखभाल सेवा: यह वर्ग सरकारी स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं का लाभ उठाने की पात्रता नहीं रखता है, लेकिन निजी अस्पतालों का खर्च भी उठा नहीं पाता।
- बेहतर अवसंरचनाओं का अभाव:
- जीवन-यापन की छिपी हुई लागत: बार-बार बिजली कटौती, जल की अनियमित आपूर्ति और धीमी इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण लोगों को निजी व्यवस्था करनी पड़ती है, जिससे खर्च बढ़ता है।
- उत्पादकता की हानि: खराब सड़कें, सीमित सार्वजनिक परिवहन और ट्रैफिक जाम के कारण कार्य के कई बहुमूल्य घंटे बर्बाद होते हैं।
आगे की राह
- ADAPT फ्रेमवर्क को अपनाना:
- आकलन (Assessment): नकदी (आय) के आने-जाने के पैटर्न, कर्ज चुकाने की क्षमता, और बीमा कवरेज में मौजूद कमियों का विश्लेषण करना चाहिए।
- विविधीकरण (Diversification): आय अर्जन के एक से अधिक स्रोतों के बारे में सोचना चाहिए।
- स्वचालन (Automation): प्रबंधन के बोझ को कम करने के लिए स्वचालित वित्तीय प्रक्रियाओं का उपयोग करना चाहिए।
- कौशल विकास की योजना (Planning): लगातार नए कौशल सीखने में निवेश करना चाहिए।
- निगरानी और सुधार (Tracking and Adjustment): स्वयं के बजट के प्रदर्शन, खर्च के पैटर्न और निवेश के रिटर्न पर नजर रखनी चाहिए और जरूरत के अनुसार बदलाव करना चाहिए।
- नीतिगत उपाय:
- लक्षित कर छूट देना।
- स्वास्थ्य देखभाल सेवा और शिक्षा में सब्सिडी बढ़ाना।
- संरचनात्मक सुधार जैसे कौशल आधारित भर्ती, उद्यमिता को बढ़ावा देना, आदि।