सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्ट | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • आईएलओ की रिपोर्ट में सभी श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की मांग की गई है, जिसे जीवन चक्रों में गरीबी और असुरक्षा को रोकने वाली नीतियों के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • सामाजिक सुरक्षा गरीबी की रोकथाम, संकटों से निपटने की क्षमता बढ़ाने, आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और लैंगिक असमानताओं को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भारत उपकर-आधारित कल्याण कोषों, क्षेत्र-विशिष्ट बोर्डों, त्रिपक्षीय शासन और गिग/प्लेटफॉर्म श्रमिकों के संरक्षण कानूनों के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा का विस्तार कर रहा है।

In Summary

“बदलते श्रम बाजारों में सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा: सभी प्रकार के रोजगारों में श्रमिकों की रक्षा” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में सभी प्रकार के कामगारों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों की सिफारिश की गई है।

  • ILO के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा ऐसी नीतियों और कार्यक्रमों का समूह है, जो व्यक्ति के पूरे जीवनकाल में निर्धनता और असुरक्षा को रोकने और कम करने के लिए बनाए जाते हैं।
    • इसमें शामिल हैं: बाल और परिवार हितलाभ, मातृत्व हितलाभबेरोजगारी में सहायतास्वास्थ्य-देखभाल सुरक्षा, वृद्धावस्था पेंशन, आदि।

सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता क्यों है?

  • निर्धनता को रोकना: ऐसी विश्वसनीय प्रणाली बनाने की आवश्यकता है जो लोगों की असुरक्षा या संकट को कम करें और उनकी क्षमताओं को मजबूत करें।
    • उदाहरण के लिएसार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत सब्सिडी पर खाद्यान्न उपलब्ध करना।
  • संकट से निपटने में सक्षम बनाना: मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी में बदलाव और जनसंख्या में बदलाव जैसे संकटों के बीच स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। उदाहरण के लिए: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना। 
  • आर्थिक स्थिरता: वैश्विक स्तर पर, 2019 में कुल कराधान में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अंशदान का हिस्सा 18.8% था।
  • लैंगिक असमानताओं को कम करना: अच्छी तरह से बनाई गई तथा महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखने वाली सामाजिक सुरक्षा प्रणाली, श्रम बाजार में मौजूद असमानताओं को कम करने में मदद करती है। उदाहरण के लिए: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना। 

आगे की राह (ILO के सुझाव)

  • सार्वभौमिक पहुंच की गारंटी: स्व-नियोजित, अस्थायी और अंशकालिक कामगारों सहित सभी कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का व्यापक लाभ सुनिश्चित करना चाहिए।
  • सार्वभौमिक कवरेज के लिए योजनाओं का संयोजन: इसमें व्यापक सामाजिक बीमा को कर से वित्त-पोषित योजनाओं (जैसे सभी बच्चों के लिए लाभ और सामाजिक पेंशन) के साथ जोड़ना शामिल है।
  • राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा के लिए न्यूनतम स्तर सुनिश्चित करना: सभी लोगों के लिए न्यूनतम आय सुरक्षा और पर्याप्त स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं तक प्रभावी पहुँच की गारंटी देने की आवश्यकता है।
  • अन्य सुझाव: महिला अनुकूल व्यवस्थाओं को अपनाने, नीतियों में समन्वय स्थापित करने जैसे उपायों की आवश्यकता है।

सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार के लिए भारत की पहलें

  • उपकर-आधारित कल्याण कोष (Cess-based Welfare Funds): उद्योगों पर लगाया गया उपकर उन कामगारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए उपयोग होता है, जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के दायरे में नहीं आते।
  • क्षेत्रक-विशिष्ट कल्याण बोर्ड: ये बोर्ड खनन, निर्माण, बीड़ी और फिल्म उद्योग जैसे क्षेत्रकों के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्रदान करते हैं।
  • त्रिपक्षीय शासन मॉडल: कल्याण बोर्ड कामगारों, नियोक्ताओं और सरकार का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हैं, जिससे संस्थागत स्तर पर संवाद और जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है।
  • गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों की सुरक्षा: प्लेटफॉर्म कामगार कल्याण लेवी की शुरुआत की गई है और राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023 जैसे कानून बनाए गए हैं।
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प्लेटफॉर्म कामगार कल्याण लेवी (Platform Worker Welfare Levy)

यह एक ऐसा शुल्क या कर है जिसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कामगारों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से लगाया जा सकता है।

गिग और प्लेटफॉर्म कामगार (Gig and Platform Workers)

गिग कामगार वे होते हैं जो अस्थायी, लचीले और परियोजना-आधारित काम करते हैं, जबकि प्लेटफॉर्म कामगार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (जैसे ऐप्स) के माध्यम से काम करते हैं। इन कामगारों को अक्सर पारंपरिक रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा लाभों से बाहर रखा जाता है।

त्रिपक्षीय शासन मॉडल (Tripartite Governance Model)

यह एक शासन संरचना है जिसमें सरकार, नियोक्ता और कामगार (या उनके प्रतिनिधि) शामिल होते हैं। यह मॉडल सामाजिक सुरक्षा नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन में तीनों पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देता है।

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