“बदलते श्रम बाजारों में सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा: सभी प्रकार के रोजगारों में श्रमिकों की रक्षा” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में सभी प्रकार के कामगारों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों की सिफारिश की गई है।
- ILO के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा ऐसी नीतियों और कार्यक्रमों का समूह है, जो व्यक्ति के पूरे जीवनकाल में निर्धनता और असुरक्षा को रोकने और कम करने के लिए बनाए जाते हैं।
- इसमें शामिल हैं: बाल और परिवार हितलाभ, मातृत्व हितलाभ, बेरोजगारी में सहायता, स्वास्थ्य-देखभाल सुरक्षा, वृद्धावस्था पेंशन, आदि।
सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता क्यों है?
- निर्धनता को रोकना: ऐसी विश्वसनीय प्रणाली बनाने की आवश्यकता है जो लोगों की असुरक्षा या संकट को कम करें और उनकी क्षमताओं को मजबूत करें।
- उदाहरण के लिए: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत सब्सिडी पर खाद्यान्न उपलब्ध करना।
- संकट से निपटने में सक्षम बनाना: मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी में बदलाव और जनसंख्या में बदलाव जैसे संकटों के बीच स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। उदाहरण के लिए: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना।
- आर्थिक स्थिरता: वैश्विक स्तर पर, 2019 में कुल कराधान में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अंशदान का हिस्सा 18.8% था।
- लैंगिक असमानताओं को कम करना: अच्छी तरह से बनाई गई तथा महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखने वाली सामाजिक सुरक्षा प्रणाली, श्रम बाजार में मौजूद असमानताओं को कम करने में मदद करती है। उदाहरण के लिए: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना।
आगे की राह (ILO के सुझाव)
- सार्वभौमिक पहुंच की गारंटी: स्व-नियोजित, अस्थायी और अंशकालिक कामगारों सहित सभी कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का व्यापक लाभ सुनिश्चित करना चाहिए।
- सार्वभौमिक कवरेज के लिए योजनाओं का संयोजन: इसमें व्यापक सामाजिक बीमा को कर से वित्त-पोषित योजनाओं (जैसे सभी बच्चों के लिए लाभ और सामाजिक पेंशन) के साथ जोड़ना शामिल है।
- राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा के लिए न्यूनतम स्तर सुनिश्चित करना: सभी लोगों के लिए न्यूनतम आय सुरक्षा और पर्याप्त स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं तक प्रभावी पहुँच की गारंटी देने की आवश्यकता है।
- अन्य सुझाव: महिला अनुकूल व्यवस्थाओं को अपनाने, नीतियों में समन्वय स्थापित करने जैसे उपायों की आवश्यकता है।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार के लिए भारत की पहलें
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