एकीकृत विनिर्माण हब (Integrated Manufacturing Hubs) ऐसे नियोजित विनिर्माण क्षेत्र होते हैं जहां पहले से तैयार (प्लग एंड प्ले) अवसंरचनाएं उपलब्ध होती हैं। इनमें साझा यूटिलिटी सुविधाएं, सरकारी अनुमति और सहायता, मल्टीमोडल कनेक्टिविटी और आपूर्तिकर्ता एक ही स्थान पर उपलब्ध होते हैं, जिससे उद्योगों को आसानी से स्थापित और संचालित किया जा सके।
- लक्ष्य: वर्तमान में विनिर्माण क्षेत्रक का देश की जीडीपी में योगदान 16-17% है। यह क्षेत्रक लगभग 27 मिलियन लोगों को रोजगार देता है। इस नीति का लक्ष्य 2047 तक जीडीपी में विनिर्माण की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 25% करना और भारत को 30-35 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के विजन को साकार करना है।
एकीकृत विनिर्माण हब विनिर्माण को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं?
- प्रतिस्पर्धात्मकता: एक ही स्थान पर सभी सुविधाओं के उपलब्ध होने से लेन-देन की लागत कम होती है। इससे कंपनियों को विनिर्माण का विस्तार और दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है।
- ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) के साथ एकीकरण: प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्लस्टर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करते हैं और निर्यात को बढ़ावा देते हैं।
- उदाहरण के लिए: चीन का ग्रेटर बे एरिया, देश की 1% से भी कम भूमि पर स्थित होने के बावजूद उसके कुल निर्यात में 35% का योगदान करता है।
- नवाचार को बढ़ावा: जब कई कंपनियां अनुसंधान और विकास (R&D) केंद्रों के साथ समन्वय में कार्य करती हैं, तो प्रौद्योगिकी और कुशल श्रम का आदान-प्रदान स्वाभाविक रूप से होता है।
- MSMEs का एकीकरण: विनिर्माण क्लस्टर MSMEs को नेटवर्क और साझा सुविधाओं के माध्यम से प्रौद्योगिकी की कमी और आपूर्ति-श्रृंखला की सीमाओं को दूर करने में मदद करते हैं।
- ध्यातव्य है कि MSMEs देश के विनिर्माण क्षेत्रक के उत्पादन में 35.4% का योगदान देते हैं।
- व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा: प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, विकेंद्रीकृत विनियामक मंजूरी और एक ही जगह पर सेवाएँ मिलने से व्यवसाय करना आसान होता है।
वर्तमान चुनौतियां:
- क्लस्टर का लघु आकार: बड़े विनिर्माण समूहों के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं है।
- मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी की कमी: कई क्लस्टरों में सुदृढ़ कनेक्टिविटी न होने से ग्लोबल वैल्यू चेन के साथ एकीकृत होने में समस्या उत्पन्न होती है।
- सख्त नियम: सख्त श्रम कानून, निर्माण से जुड़े सख्त नियम और सख्त व्यावसायिक प्रक्रियाओं की वजह से वैश्विक कंपनियों को तेजी और स्पष्टता नहीं मिलती, जिससे वे निवेश करने से हिचकिचाती हैं।
भारत में एकीकृत विनिर्माण के लिए प्रमुख पहलें:
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