भारत ने ‘सतत विकास के लिए भू-स्थानिक आधारों को आगे बढ़ाने पर एशिया-प्रशांत फोरम’ की मेजबानी की | Current Affairs | Vision IAS

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  • भविष्य के लिए तैयार शासन के लिए भू-स्थानिक प्रणालियाँ महत्वपूर्ण हैं, जो डेटा विश्लेषण और दृश्यीकरण के लिए जीआईएस, जीपीएस और रिमोट सेंसिंग जैसी प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करती हैं।
  • ये प्रणालियाँ साक्ष्य-आधारित शहरी नियोजन, अवसंरचना विकास (जैसे, त्रिची हवाई अड्डे का आधुनिकीकरण), परिसंपत्ति निगरानी (आरकेवीवाई), आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा का समर्थन करती हैं।
  • भारत की प्रमुख पहलों में राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन, राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022, राष्ट्रीय भू-स्थानिक डेटा भंडार और ई-लोक डिजिटल पता प्रणाली शामिल हैं।

In Summary

इस फोरम में रेखांकित किया गया कि कैसे भू-स्थानिक प्रणालियां (Geospatial Systems) 'फ्यूचर रेडी गवर्नेंस' की कुंजी बन गई हैं।

  • इसमें UN-GGIM (वैश्विक भू-स्थानिक सूचना प्रबंधन पर विशेषज्ञों की संयुक्त राष्ट्र समिति) के तहत वैश्विक ढांचे के महत्व पर भी जोर दिया गया।
    • UN-GGIM संस्था भू-स्थानिक नीति निर्धारण के लिए शीर्ष निकाय के रूप में कार्य करती है। यह संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (UN-ECOSOC) के तहत विशेषज्ञों की एक समिति के रूप में संचालित होती है।

भू-स्थानिक प्रणालियों के बारे में

  • ये ऐसे उपकरण हैं जो स्थान/अवस्थिति से जुड़े आंकड़ों (Spatial Data) को एकत्र करने, विश्लेषण करने और प्रदर्शित करने के लिए बनाए गए हैं।
  • इनमें सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS), ड्रोन और LiDAR जैसी विभिन्न भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों का समावेश होता है।

शासन-प्रशासन में भू-स्थानिक प्रणालियों की भूमिका

  • डेटा-आधारित शहरी नियोजन में: 3D शहर मॉडल की मदद से विकास परियोजनाओं को पहले से देखकर समझा जा सकता है। साथ ही, जलापूर्ति की रियल-टाइम निगरानी, संपत्तियों  का प्रबंधन और बेहतर योजना बनाना आसान हो जाता है।
  • अवसंरचना विकास में: उदाहरण के लिए, ड्रोन आधारित भू-स्थानिक सर्वेक्षण से तमिलनाडु के त्रिची हवाई अड्डे का आधुनिकीकरण किया गया।
  • संपत्तियों की निगरानी में: उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत सृजित परिसंपत्तियों को भुवन (BHUVAN) प्लेटफॉर्म का उपयोग करके जियोटैग किया जाता है।
  • आपदा प्रबंधन में: भू-स्थानिक डेटा की मदद से बाढ़ और चक्रवात जैसी आपदाओं का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है। ड्रोन-आधारित बाढ़ जलभराव (flood inundation) मॉडलिंग से नुकसान का सही आकलन करना आसान हो जाता है।
  • आंतरिक सुरक्षा में: सैटेलाइट इमेजरी की मदद से सीमाओं की सटीक मैपिंग की जा सकती है। GIS तकनीक के जरिए अपराधियों के ठिकानों का पता लगाने में सहायता मिलती है। 

भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी की दिशा में प्रमुख सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन: केंद्रीय बजट (2025-26) में घोषित इस मिशन का उद्देश्य मूलभूत भू-स्थानिक अवसंरचना और डेटा विकसित करना है।
  • राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 (National Geospatial Policy 2022): इसका लक्ष्य भारत को भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी देश बनाना है।
  • राष्ट्रीय भू-स्थानिक डेटा रिपॉजिटरी: यह भू-स्थानिक डेटा प्रबंधन और पहुंच के लिए एक केंद्रीकृत मंच है।
  • eLoc (राष्ट्रीय डिजिटल एड्रेस प्रणाली): इसमें प्रत्येक स्थान के लिए 6 अक्षरों का विशिष्ट  डिजिटल एड्रेस उपलब्ध कराया जाता है; स्थानों के लिए 'आधार' की तरह।
  • अन्य योजनाएं: डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP), स्वामित्व योजना और नक्शा (NAKSHA) कार्यक्रम।
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SWAMITVA Scheme

A scheme that provides integrated property validation solutions for rural India. It involves surveying all inhabited rural areas and mapping land parcels using drone technology and GIS.

DILRMP

Digital India Land Records Modernization Programme. A scheme by the Indian government to modernize land records management, making them more accessible and transparent.

eLoc

A national digital address system that assigns a unique 6-character digital address to every location in India, analogous to an Aadhaar for physical places.

Title is required. Maximum 500 characters.

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