'हंगर मैप', विश्व खाद्य कार्यक्रम का AI-आधारित खाद्य संकट अलर्ट प्लेटफॉर्म है। यह रियल-टाइम निगरानी को बेहतर बनाता है, ताकि वैश्विक भुखमरी से निपटने के लिए मानवीय प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
विश्व खाद्य कार्यक्रम के बारे में
- मुख्यालय: रोम में
- यह विश्व की सबसे बड़ी मानव-सहायता एजेंसी है। यह एजेंसी आपात स्थितियों में लोगों की जान बचाने के साथ-साथ सहायता प्रदान करके समुदायों को आत्मनिर्भर और संकटों से निपटने हेतु मजबूत बनाने में मदद करती है।
- WFP की स्थापना 1961 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा की गई थी।
- यह संगठन 120 से अधिक देशों में कार्य कर रहा है।
- वित्तपोषण: सरकारों, कॉरपोरेट्स और निजी दाताओं से स्वैच्छिक दान।
- WFP को 2020 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
Article Sources
1 sourceइंडियन ओशन शिप (IOS) सागर, INS सुनयना, सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर पहुंचे।
चांगी नौसैनिक अड्डा के बारे में
- रणनीतिक अवस्थिति: यह मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर तक सीधी पहुंच प्रदान करता है।
- भारत और सिंगापुर के बीच 2017 के लॉजिस्टिक्स समझौते के तहत भारतीय नौसेना को लॉजिस्टिक सहायता के लिए इस अड्डे तक पहुंच प्रदान की गई है।
भारत की रणनीतिक उपस्थिति वाले अन्य विदेशी बंदरगाह
- डुक्म बंदरगाह: दक्षिण-पूर्व ओमान में, अरब सागर के पश्चिमी तट पर अवस्थित है।
- सबांग बंदरगाह: इंडोनेशिया में सुमात्रा के उत्तरी छोर पर, मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर।
- अन्य बंदरगाह: चाबहार बंदरगाह (ईरान); हाइफ़ा बंदरगाह (इजराइल); सित्वे बंदरगाह (म्यांमार); चटगांव और मोंगला बंदरगाह (बांग्लादेश)।
Article Sources
1 sourceभारत ने पहली बार भूमिगत कोयला गैसीकरण (Underground Coal Gasification) तकनीक से जुड़े कोयला खनन की शुरुआत की है, जिसके तहत चार वाणिज्यिक कोयला ब्लॉकों के लिए समझौते किए गए हैं।
- भूमिगत कोयला गैसीकरण वास्तव में एक स्व-स्थाने (in-situ) प्रक्रिया है, जिसमें कोयले को जमीन के अंदर ही गैस में बदल दिया जाता है। इससे पारंपरिक खनन (खोदकर निकालने) की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे लागत और पर्यावरणीय नुकसान, दोनों कम हो सकते हैं।
कोयला गैसीकरण के बारे में
- यह एक ऊष्मा-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें कोयले को गैस के मिश्रण में बदला जाता है, जिसे सिंथेसिस गैस (syngas) कहा जाता है।
- यह मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन से बनी होती है।
- इस सिनगैस का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए ईंधन के रूप में किया जा सकता है, या फिर इससे सिंथेटिक ईंधन और उर्वरक बनाए जा सकते हैं।
- कोल गैसीकरण से कोयले का अपेक्षाकृत स्वच्छ उपयोग संभव होता है। इससे बनने वाली सिनगैस का उपयोग बिजली उत्पादन, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और तरल ईंधन बनाने में किया जा सकता है।
- भारत सरकार ने 'राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन' शुरू किया है। इसका लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण करना है।
Article Sources
1 sourceपौधों से इलेक्ट्रॉनिक्स को जोड़ने में हुई नई प्रगति ने स्मार्ट कृषि के लिए साइबोर्ग बॉटनी क्षेत्र को महत्वपूर्ण बना दिया है।
साइबोर्ग बॉटनी के बारे में
- परिभाषा: साइबोर्ग बॉटनी एक अंतःविषय (interdisciplinary) क्षेत्र है, जिसमें सजीव पौधों को इलेक्ट्रॉनिक घटकों (जैसे सेंसर और सुचालक पदार्थों) के साथ जोड़कर हाइब्रिड सिस्टम बनाए जाते हैं।
- उद्देश्य: इसका लक्ष्य पौधों के अंदर होने वाले जैव-रासायनिक संकेतों को सीधे स्रोत पर समझना है। इससे पौधें जा जीव खुद एक “जीवित सर्किट बोर्ड” की तरह कार्य करने लगते हैं, जो अपने पर्यावरण की स्थिति की निगरानी करके जानकारी दे सकते हैं।
- वैज्ञानिकों का लक्ष्य प्रिसिजन एग्रीकल्चर में इन प्रणालियों का उपयोग करके पौधों में दो प्रकार के तनावों का आकलन करना है:
- जैविक तनाव (Biotic Stress): कीटों का संक्रमण और बीमारियाँ।
- अजैविक तनाव (Abiotic Stress): पर्यावरणीय कारक जैसे सूखा और उच्च तापमान।
- वैज्ञानिकों का लक्ष्य प्रिसिजन एग्रीकल्चर में इन प्रणालियों का उपयोग करके पौधों में दो प्रकार के तनावों का आकलन करना है:
पाकिस्तान ने भारत की जल विद्युत परियोजनाओं पर अपनी आपत्तियों का दायरा बढ़ाते हुए चिनाब नदी पर कीरू और कावर जलविद्युत परियोजनाओं को भी शामिल कर लिया है। हालांकि, ये परियोजनाएँ औपचारिक रूप से सिंधु जल संधि के तहत मध्यस्थता के दायरे में नहीं आती हैं।
सिंधु जल संधि (IWT) के बारे में
- इस संधि पर 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए गए थे।
- पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज): अबाध उपयोग के लिए भारत को पूर्ण नियंत्रण प्रदान किया गया।
- पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब): इन नदियों का जल मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित किया गया है, जिन पर भारत को भी सीमित अधिकार दिए गए हैं।
IWT के तहत विवाद समाधान-तंत्र (त्रिस्तरीय श्रेणीबद्ध तंत्र)
- स्थायी सिंधु आयोग (PIC): यह प्रथम स्तर का निकाय है। इसमें भारत और पाकिस्तान जल से जुड़े आंकड़ों का आदान-प्रदान करते हैं और संधि की व्याख्या या संभावित उल्लंघनों से जुड़े सवालों का समाधान करते हैं।
- तटस्थ विशेषज्ञ: किसी मुद्दे को जब स्थायी सिंधु आयोग (PIC) समाधान करने में विफल रहता है, तो तकनीकी विवादों को हल करने के लिए (विश्व बैंक या भारत और पाकिस्तान की सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से) तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाती है।
- माध्यस्थम अधिकरण (Court of Arbitration): यह स्थायी सिंधु आयोग या तटस्थ विशेषज्ञ स्तरों पर अनसुलझे विवादों को कानूनी रूप से हल करने के लिए 7-सदस्यीय अधिकरण है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और OPEC+ से बाहर निकलने की घोषणा की।
OPEC के बारे में
- यह तेल निर्यातक विकासशील देशों का एक स्थायी अंतर-सरकारी संगठन है।
- स्थापना: इसकी स्थापना 1960 में बगदाद सम्मेलन में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला ने की थी।
- अन्य सदस्यों में अल्जीरिया, कांगो, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, लीबिया और नाइजीरिया शामिल हैं।
- मुख्यालय: वियना (ऑस्ट्रिया)
- उद्देश्य: सदस्य देशों में पेट्रोलियम से जुड़ी नीतियों का समन्वय और एकीकरण करना, और पेट्रोलियम उत्पादकों के लिए उचित व स्थिर मूल्य सुनिश्चित करना।
- OPEC+: अमेरिकी शेल तेल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण तेल की गिरती कीमतों से निपटने के लिए, ओपेक के सदस्य देशों ने 2016 में ओपेक+ के गठन के लिए 10 अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
- ओपेक के सदस्य देशों के अलावा इसमें रूस, अजरबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कजाकिस्तान, मैक्सिको, मलेशिया, ओमान, दक्षिण सूडान और सूडान शामिल हैं।
भारतीय नौसेना का एक फास्ट अटैक क्राफ्ट (FAC), INS कल्पेनी, अड्डू एटोल पहुंच गया है। यह भारत और मालदीव के बीच जारी सामुद्रिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- INS कल्पेनी कार-निकोबार श्रेणी का वाटरजेट फास्ट अटैक क्राफ्ट है। इसे 2010 में कमीशन किया गया था।
- इसका नाम लक्षद्वीप समूह के कल्पेनी द्वीप के नाम पर रखा गया है।
अड्डू एटोल के बारे में
- यह मालदीव का सबसे दक्षिणी एटोल है। यह मध्य हिंद महासागर में चागोस द्वीपसमूह के उत्तर में स्थित है।
- एटोल वास्तव में वलय (रिंग) के आकार का द्वीप होता है, जो प्रवाल (कोरल) से बना होता है और अपने चारों ओर एक लैगून (अनूप झील) से भरा क्षेत्र घेरता है।।
- इसमें एक अर्ध-संलग्न लैगून के चारों ओर व्यवस्थित 30 द्वीप शामिल हैं।
- यह यूनेस्को के 'मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम' का भी हिस्सा है।