यह शिखर सम्मेलन कोपेनहेगन (2022) और स्टॉकहोम (2018) में आयोजित पिछले दो शिखर सम्मेलनों की अगली कड़ी थी।
- नॉर्डिक समूह 5 विकसित देशों का एक क्षेत्रीय समूह है। इसमें शामिल देश हैं; नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड और डेनमार्क।
तीसरे शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम

- हरित प्रौद्योगिकी: भारत ने नॉर्डिक क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को "हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी" (Green Technology and Innovation Strategic Partnership) का दर्जा प्रदान किया।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार: नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का आधिकारिक तौर पर अपना समर्थन दोहराया।
भारत के लिए नॉर्डिक देश महत्वपूर्ण क्यों हैं?
- आर्थिक और व्यापारिक दृष्टि से: नॉर्डिक समूह लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त GDP वाला एक अति-विकसित क्षेत्र है।
- वर्ष 2024 में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 19 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
- भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) ने ‘व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA)’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका लक्ष्य भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश करना है, जिससे भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- EFTA में शामिल देश हैं; आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड।
- आर्कटिक क्षेत्र तक रणनीतिक पहुंच में: सभी पाँच नॉर्डिक राष्ट्र 'आर्कटिक परिषद' के सदस्य हैं। भारत को इस परिषद में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है। आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग और भागीदारी बढ़ाने में यह परिषद महत्वपूर्ण माध्यम बनती है। इस तरह यह सहयोग आर्कटिक क्षेत्र में चीन की ‘पोलर सिल्क रोड’ पहल के प्रति-संतुलन के रूप में कार्य करेगा।
- प्रौद्योगिकी और हरित क्षेत्रक में विशेषज्ञता का लाभ: उदाहरण के लिए, आइसलैंड को भू-तापीय ऊर्जा में, स्वीडन को अत्याधुनिक विनिर्माण क्षेत्रक में और फिनलैंड को दूरसंचार क्षेत्रक में विशेषज्ञता प्राप्त है। भारत इन विशेषज्ञताओं का लाभ उठा सकता है।