रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने “मानव रहित विमान (UAV) से दागी जाने वाली प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल” यानी ULPGM-V3 के विकास परीक्षण का चरण पूरा किया।
ULPGM-V3 के बारे में
- यह पूरी तरह स्वदेशी, हल्की, ‘दागो और भूल जाओ’ तकनीक वाली और सटीक लक्ष्य-भेदी मिसाइल है, जिसे मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) से प्रक्षेपित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
- विकासकर्ता: DRDO द्वारा भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और अडानी डिफेंस सिस्टम्स के साथ मिलकर।
प्रमुख क्षमताएं
- अधिकतम मारक क्षमता: 10 किलोमीटर तक
- दोहरा संचालन मोड-
- एयर टू ग्राउंड मोड: एंटी-आर्मर और एंटी-टैंक सटीक हमलों के लिए।
- एयर टू एयर मोड: ड्रोन, हेलीकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अन्य हवाई खतरों के लिए।
- अन्य: एकीकृत ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम; उच्च सटीकता तथा दिन और रात दोनों समय संचालन के लिए ड्यूल-चैनल सीकर प्रणाली युक्त।
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1 sourceकेंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय 'टीम' (TEAM) पहल के माध्यम से भारत के सबसे लघु व्यवसायों के डिजिटल रूपांतरण को गति दे रहा है।
टीम (TEAM) पहल के बारे में
- TEAM का पूर्ण रूप है: ट्रेड इनेबलमेंट एंड एक्सेस टू मार्केट।
- योजना का प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना। इसे 2024 में शुरू किया गया।
- उद्देश्य: सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) को एंड-टू-एंड ई-कॉमर्स सहायता प्रदान करना, ताकि वे 'ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स' (ONDC) के माध्यम से डिजिटल कॉमर्स प्राणलै में प्रभावी ढंग से भाग ले सकें।
- ONDC का उद्देश्य डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान के सभी पहलुओं के लिए खुले नेटवर्क को बढ़ावा देना है।
- यह विश्व बैंक द्वारा समर्थित 'रेजिंग एंड एक्सीलरेटिंग MSME परफॉरमेंस' (RAMP) कार्यक्रम के तहत एक परिवर्तनकारी उप-योजना है।
- MSMEs की कार्यान्वयन क्षमता और पहुंच बढ़ाने के लिए 2022 में RAMP कार्यक्रम शुरू किया गया था।
- कार्यान्वयन अवधि: 2024 से 2027 तक 3 वर्ष।
- कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC)।
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1 sourceन्यायाधीश जांच समिति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत वैधानिक आवश्यकताओं के अनुरूप संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
- यह समिति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए गठित की गई थी।
न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के बारे में
- यह अधिनियम उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के कदाचार या अयोग्यता की जांच और उसे सिद्ध करने की प्रक्रिया को विनियमित करता है।
- प्रक्रिया:
- लोकसभा के मामले में 100 सदस्यों द्वारा तथा राज्यसभा के मामले में 50 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित 'पद से हटाने का प्रस्ताव' लोकसभा अध्यक्ष /राज्यसभा के सभापति को दिया जाता है।
- यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो पीठासीन अधिकारी आरोपों की जांच के लिए 3-सदस्यीय न्यायिक समिति गठित करते हैं। इसके सदस्यों में प्रायः उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के एक मुख्य न्यायाधीश और एक प्रख्यात न्यायविद शामिल होते हैं।
- कदाचार या अक्षमता सिद्ध होने पर इस प्रस्ताव को दोनों सदनों को एक ही सत्र में विशेष बहुमत (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई) से पारित करना होता है।
- इसके बाद, न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति को एक अभ्यावेदन भेजा जाता है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स (EGRs) की शुरुआत करने की घोषणा की है।
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स (EGRs) के बारे में
- EGRs मानकीकृत स्वर्ण से जुड़े एक्सचेंजों में कारोबार होने वाली प्रतिभूतियां हैं। ये बाजार आधारित मूल्य निर्धारण, इलेक्ट्रॉनिक रूप में स्वर्ण धातु धारण करने तथा निश्चित मात्रा और शुद्धता में स्वर्ण की खरीद-बिक्री की सुविधा प्रदान करते हैं।
- निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इसे भौतिक यानी धात्विक स्वर्ण में बदला जा सकता है या धात्विक स्वर्ण को EGR (प्रतिभूति) में परिवर्तित किया जा सकता है।
- विनियामक: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI)
- लाभ: एकीकृत मूल्य निर्धारण (एक राष्ट्र, एक मूल्य), एक्सचेंज पर आसानी से खरीद-बिक्री योग्य, धात्विक स्वर्ण की तुलना में धारण करना अधिक सुविधाजनक, आदि।
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1 sourceहाल ही में, वैज्ञानिकों ने नासा के मावेन (MAVEN) मिशन के आंकड़ों का उपयोग करते हुए पहली बार किसी ग्रह के वायुमंडल में ज्वान-वुल्फ प्रभाव (Zwan-Wolf effect) को दर्ज किया। इससे पहले यह प्रभाव केवल चुंबकमंडल (मैग्नेटोस्फीयर) में ही दर्ज किया गया था।
- मार्स एटमॉस्फ़ेयर एंड वोलेटाइल एवोल्युशन (MAVEN) अंतरिक्ष यान एक रोबोटिक ऑर्बिटर है। इसे मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल का सर्वेक्षण करने के लिए प्रक्षेपित किया गया है।
- चुंबकमंडल किसी ग्रह के चारों ओर का वह क्षेत्र होता है जहां ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र प्रभावी होता है।
ज्वान-वुल्फ प्रभाव के बारे में
- यह एक ऐसी परिघटना है जिसमें विद्युत आवेशित कण चुंबकीय संरचनाओं, जिन्हें फ्लक्स ट्यूब कहा जाता है, के साथ दबाव में आगे बढ़ते हैं, ठीक वैसे ही जैसे टूथपेस्ट ट्यूब से दबाकर बाहर निकाला जाता है।
- यह प्रभाव ग्रह के चारों ओर सौर पवन को विक्षेपित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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1 sourceस्वीडन भारत के 'शुक्रयान' (वीनस ऑर्बिटर) मिशन में शामिल हुआ।
- शुक्र, पृथ्वी का सबसे निकटतम ग्रह है। माना जाता है कि इसका निर्माण पृथ्वी की समान परिस्थितियों में हुआ था।
वीनस ऑर्बिटर मिशन (VOM) के बारे में
- यह शुक्र ग्रह का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया भारत का पहला वैज्ञानिक मिशन है। इसे 2024 में मंजूरी दी गई थी।
- उद्देश्य: शुक्र ग्रह की सतह और उपसतह, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और शुक्र के वायु मंडल पर सूर्य के प्रभाव की बेहतर समझ विकसित करना।
- इसे मार्च 2028 में प्रक्षेपित करने की योजना है।
- अंतरिक्ष यान के विकास और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी इसरो की होगी।
- LVM-3 नामक प्रक्षेपण यान इस अंतरिक्ष मिशन को दीर्घवृत्ताकार पार्किंग कक्षा (Elliptical Parking Orbit - EPO) में स्थापित करेगा।
UNEP और 'ग्लोबल एलायंस फॉर बिल्डिंग्स एंड कंस्ट्रक्शन' (GlobalABC) ने 'ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट फॉर बिल्डिंग्स एंड कंस्ट्रक्शन' (Buildings-GSR) का 10वां संस्करण प्रकाशित किए।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- भवन एवं निर्माण कार्य, वैश्विक GDP में 11-13% का योगदान करते हैं और लगभग 9% वैश्विक कार्यबल को नियोजित किए हुए हैं।
- इस क्षेत्रक की वैश्विक उत्सर्जन में 37%, कुल संसाधन दोहन में 50% (जो किसी भी क्षेत्रक में सर्वाधिक है) और वैश्विक ऊर्जा उपयोग में 28% हिस्सेदारी है।
- ऊर्जा दक्षता में सुधार: वैश्विक बिल्डिंग फ्लोर स्पेस में 20% का विस्तार हुआ, जबकि ऊर्जा की मांग में 11% (2015-2024) की वृद्धि हुई।
- 2024 में, नवीकरणीय ऊर्जा ने भवनों की ऊर्जा मांग का केवल 17.3% ही पूरा किया, जो कि 'नेट जीरो' लक्ष्य के लिए आवश्यक स्तर से काफी कम है।
- यह ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा प्रशासित 'ऊर्जा संरक्षण और सतत भवन संहिता 2024' जैसी कई भारतीय पहलों को रेखांकित करती है।
वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के शिव शक्ति लैंडिंग स्थल पर चंद्रमा की ऊपरी सतह से जुड़ी महत्वपूर्ण नई जानकारियां प्रस्तुत की हैं। ये “हॉप” प्रयोग (Hop Experiment) के दौरान एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर प्राप्त हुई हैं।
हॉप प्रयोग के बारे में
- विक्रम लैंडर की निर्धारित सक्रिय मिशन अवधि के अंत में किए गए इस संचालन ने ISRO की ‘लैंडर के इंजनों को दोबारा प्रज्वलित करने की क्षमता’ को प्रदर्शित किया।
- इस थ्रस्ट ने यान को सफलतापूर्वक चंद्र सतह से ऊपर उठाया, जिससे भविष्य के सैंपल-वापसी मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षमता सिद्ध हुई।
प्रयोग के प्रमुख निष्कर्ष
- परतदार संरचना: चंद्रमा की सतह पर स्पष्ट रूप से “केक जैसी” कई परतें पाई गई हैं, जो लंबे समय तक सूक्ष्म उल्कापिंडों के टकराव से बनी हैं।
- मृदा में विविधता: चंद्रमा की मृदा, सतह के कुछ सेंटीमीटर नीचे अधिक घनी और सघन हो जाती है।
- संध्या कालीन तापीय परिवर्तन: ‘चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (ChaSTE)’ ने चंद्रमा के वायुरहित वातावरण के कारण संध्या समय तापमान में तेज गिरावट दर्ज की।