"भारत में अनुसंधान एवं विकास सुगमता रिपोर्ट” (Ease of Doing Research & Development in India Report) के अनुसार, भारत का सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) जीडीपी का लगभग 0.65% है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका (लगभग 3.5%), चीन (लगभग 2.4%) और कोरिया गणराज्य (लगभग 4.5%) की तुलना में कम है।
- इसके अतिरिक्त, वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index: GII) 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति मिलियन पूर्णकालिक समकक्ष (FTE) शोधकर्ताओं की संख्या 262 है, जबकि अमेरिका में यह 4,821 और चीन में 1,585 है।
भारत की अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्रणाली की मुख्य चुनौतियां:
- R&D में अपर्याप्त वित्तपोषण: भारत में न केवल सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय कम है, बल्कि यह सार्वजनिक यानी सरकारी वित्तपोषण (लगभग 64%) पर अत्यधिक निर्भर है। वहीं, अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में R&D बजट का 60% निजी क्षेत्र द्वारा वहन किया जाता है।
- गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन को आकर्षित करना और बनाए रखना: छात्रवृत्ति वितरण में विलंब की घटनाओं तथा शोधकर्ताओं को अपने पेटेंट/प्रकाशनों को उत्पादों में बदलने के लिए प्रोत्साहन की कमी के कारण कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।
- प्रौद्योगिकी का व्यावहारिक उपयोग और व्यावसायीकरण: बहुत कम अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्थानों, जैसे CSIR प्रयोगशालाओं, में तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और व्यावसायीकरण से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्र व्यवसाय प्रभाग हैं।
- राज्य संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास (R&D): R&D के लिए कम वित्तपोषण और कमजोर बुनियादी ढांचे प्रमुख समस्याएं हैं। साथ ही, संबद्धता (Affiliations) से जुड़े नियमों के अनुपालन में शिक्षकों का अधिकतम समय और ऊर्जा बर्बाद होता है।
मुख्य सिफारिशें:
- अगले चार से पांच वर्षों में सकल R&D व्यय को बढाकर GDP का कम से कम 2% करना चाहिए।
- फेलोशिप के वित्तपोषण और वितरण में होने वाली देरी को दूर करने के लिए ‘विज्ञान निधि’ नामक एकीकृत फेलोशिप प्रणाली बनाई जाए।
- उच्चतर शिक्षण संस्थानों (HEIs), R&D संस्थानों, MSMEs, PSUs और उद्योग जगत को एकीकृत करके राज्य-स्तरीय RDI क्लस्टर गठित किए जाएं।
- दक्षिण कोरिया की STEPI और जापान की NISTEP पहलों की तर्ज पर नीति, कार्यान्वयन और निगरानी से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान नीति एवं शासन संस्थान (NISPG) की स्थापना की जा सकती है।
