यूएन-हैबिटैट ने 'वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट 2026' जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • यूएन-हैबिटैट की यह रिपोर्ट "द ग्लोबल हाउसिंग क्राइसिस: पाथवेज़ टू एक्शन" शीर्षक से जारी की गई है।
  •  लगभग 1.1 अरब लोग झुग्गी-झोपड़ियों या अनौपचारिक बस्तियों में रह रहे हैं, जहाँ मूलभूत शहरी सेवाओं और अवसंरचनाओं का अभाव है।
  • विश्व भर में औसत आवास मूल्य-आय अनुपात 2010 के 9.5 से बढ़कर 2023 में 11.7 हो गया। इसका अर्थ है कि एक घर की कीमत, एक औसत परिवार की वार्षिक आय से 11.7 गुना तक हो सकती है।

In Summary

यूएन-हैबिटैट की यह रिपोर्ट "द ग्लोबल हाउसिंग क्राइसिस: पाथवेज़ टू एक्शन" शीर्षक से जारी की गई है। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि आवास की वहनीयता से जुड़ी समस्याएंव्यापक अनौपचारिकता या गैर विनियमित आवासीय इकाइयां, और बढ़ते जलवायु-संबंधी जोखिम आदि आपस में जुड़े हुए और एक-दूसरे को गंभीर करने वाली चुनौतियां हैं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • आवास संकट का दायरा: विश्व भर में लगभग 3.4 अरब लोगों के पास पर्याप्त आवासीय सुविधाएं नहीं हैं।  
    • इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल होमलेसनेस के अनुसार, भारत में बेघर लोगों की दर प्रति 10,000 आबादी पर 13 है।
  • अनौपचारिक बस्तियां: लगभग 1.1 अरब लोग झुग्गी-झोपड़ियों या अनौपचारिक बस्तियों में रह रहे हैं, जहाँ मूलभूत शहरी सेवाओं और अवसंरचनाओं का अभाव है।
  • जलवायु संबंधी खतरे: रिपोर्ट का अनुमान है कि 2040 तक जलवायु संबंधी खतरों के कारण 167 मिलियन घर नष्ट हो सकते हैं।
    • आवासन क्षेत्रक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लगभग 17-21% के लिए जिम्मेदार है।
  • अप्रभावी राष्ट्रीय आवासन नीतियां: विश्व भर में औसत आवास मूल्य-आय अनुपात 2010 के 9.5 से बढ़कर 2023 में 11.7 हो गया। इसका अर्थ है कि एक घर की कीमत, एक औसत परिवार की वार्षिक आय से 11.7 गुना तक हो सकती है। 
    • भारत के संदर्भ में, मुंबई और दिल्ली में यह अनुपात क्रमशः 14.3 और 10.1 दर्ज किया गया।

रिपोर्ट में की गई प्रमुख सिफारिशें

  • समग्र किफायती रणनीतियां: इनमें शामिल हैं; भूमि शासन को मजबूत करना, किराये और गैर-बाजार आधारित आवासीय विकल्पों का विस्तार करना, विनियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना आदि।
  • आवास खरीदने के लिए सुलभ वित्तपोषण: अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों एवं महिला-प्रधान परिवारों सहित कमजोर और कम आय वाले समूहों को वित्तपोषण में प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • जलवायु-अनुकूल नीतियां: आवासन नीतियों में 'ग्रीन जेंट्रीफिकेशन' (पर्यावरण में सुधार के नाम पर गरीबों का विस्थापन) जैसी बहिष्करण नीतियों और हरित भूमि हड़पने वाली प्रवृत्तियों को रोकने की आवश्यकता है।  
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हरित भूमि हड़पना

पर्यावरण संरक्षण या हरित परियोजनाओं के बहाने सार्वजनिक या निजी भूमि का अधिग्रहण, जिससे अक्सर स्थानीय समुदायों या पारंपरिक भूमि उपयोग पैटर्न पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ग्रीन जेंट्रीफिकेशन

पर्यावरण सुधार परियोजनाओं या हरित पहलों के परिणामस्वरूप किसी क्षेत्र की लागत में वृद्धि, जिससे निम्न-आय वाले निवासियों का विस्थापन हो सकता है क्योंकि वे बढ़े हुए किराए या संपत्ति करों का भुगतान करने में असमर्थ होते हैं।

आवास मूल्य-आय अनुपात

एक घर की कीमत और एक औसत परिवार की वार्षिक आय का अनुपात, जो आवास की सामर्थ्य का एक संकेतक है। उच्च अनुपात इंगित करता है कि घर खरीदना अधिक महंगा है।

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