भारत में इमिडाज़ोलिनोन-प्रतिरोधी (IMI-resistant) सरसों हाइब्रिड किस्मों की खेती प्रारंभ करने की तैयारी | Current Affairs | Vision IAS

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भारत में बड़े पैमाने पर सरसों की इमिडाज़ोलिनोन (IMI)-प्रतिरोधी संकर (हाइब्रिड) किस्मों की खेती की शुरुआत होने वाली है। इस पहल का उद्देश्य देश में सरसों की पैदावार बढ़ाना है।  

  • सरसों एक प्रमुख तिलहन फसल है। भारत ने 2024-25 में लगभग ₹1.6 लाख करोड़ मूल्य के लगभग 16 मिलियन टन खाद्य तेल का आयात किया था।

IMI-प्रतिरोधी सरसों संकर किस्म के बारे में

  • इसे उत्परिवर्तन जनन (म्यूटेशन ब्रीडिंग) नामक प्रक्रिया के माध्यम से विकसित किया गया है। इसमें वैज्ञानिक फसलों में होने वाले उपयोगी प्राकृतिक आनुवंशिक उत्परिवर्तनों (म्यूटेशन) को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए उनका चयन कर जनन (ब्रीडिंग) प्रक्रिया पूरी करते हैं।
  • आधार: यह प्रक्रिया 'एसिटोलैक्टेट सिंथेस' (ALS) नामक एंजाइम पर आधारित है, जो पादपों की वृद्धि के लिए आवश्यक है।
    • सामान्य पादप: IMI शाकनाशी (हर्बिसाइड्स) ALS एंजाइम को बाधित करते हैं, जिससे पादपों की वृद्धि बाधित हो जाती है और वे नष्ट हो जाते हैं।
    • IMI-प्रतिरोधी संकर किस्में: इनमें एक आनुवंशिक परिवर्तन ALS एंजाइम की संरचना को बदल देता है, जिससे शाकनाशी उससे जुड़ नहीं पाता और पौधा सुरक्षित रहता है।

IMI-प्रतिरोधी संकर किस्मों के लाभ

  • खरपतवार प्रबंधन: यह 'ओरोबंकी/फेलिपंकी’ को प्रभावी तरीके से नियंत्रित करने में सक्षम है।
    • ओरोबंकी एक प्रकार का परजीवी खरपतवार है जो सरसों की जड़ों से जुड़कर मेजबान पादप से जल और पोषक तत्व अवशोषित कर लेता है।
  • श्रम पर कम निर्भरता: इससे हाथ से खरपतवार निकालने (निराई-गुड़ाई) जैसे श्रम-गहन कार्यों की आवश्यकता कम हो जाती है।
  • अन्य: बेहतर उत्पादकता, आदि।

संकर (हाइब्रिड) और आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) पादपों में अंतर

  • संकर पादप: आनुवंशिक रूप से भिन्न दो मूल पादपों के संकरण (क्रॉस-ब्रीडिंग) द्वारा विकसित किए जाते हैं, ताकि उनकी वांछित विशेषताओं को एक साथ जोड़ा जा सके।
  • GM पादप: आनुवंशिक अभियांत्रिकी (जेनेटिक इंजीनियरिंग) तकनीकों का उपयोग करके जीनों को सीधे जोड़कर या संशोधित करके विकसित की जाती हैं।
    • उदाहरण: बीटी कपास (जिसमें बैसिलस थुरिंजिएंसिस का जीन डाला गया है), GM सरसों
    • जैव-सुरक्षा (बायोसेफ्टी) और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण जीएम फसलों पर सख्त विनियामक नियंत्रण और विस्तृत परीक्षण लागू होते हैं।
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जैव-सुरक्षा (Biosecurity)

यह जैविक जोखिमों, जैसे रोगजनकों या आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने के उपायों को संदर्भित करता है। GM फसलों के संदर्भ में, यह यह सुनिश्चित करने से संबंधित है कि वे पर्यावरण या मानव स्वास्थ्य के लिए कोई खतरा पैदा न करें।

आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) पादप

ये पादप आनुवंशिक अभियांत्रिकी (genetic engineering) तकनीकों का उपयोग करके विकसित किए जाते हैं, जिसमें बाहरी जीनों को सीधे जोड़ा या संशोधित किया जाता है। GM फसलों पर जैव-सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण सख्त विनियामक नियंत्रण होते हैं।

संकर (हाइब्रिड) पादप

ये दो आनुवंशिक रूप से भिन्न मूल पादपों के संकरण (cross-breeding) से विकसित किए जाते हैं, जिसका उद्देश्य उनकी वांछित विशेषताओं को एक साथ लाना होता है। संकर पादप अक्सर बेहतर उपज और अन्य वांछनीय गुण प्रदर्शित करते हैं।

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