राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 'भारत में अपराध 2024' रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दहेज से जुड़ी हिंसा के कारण प्रतिदिन लगभग 16 महिलाओं की मौत हो जाती है।
- 'दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961' के अनुसार, ‘दहेज से आशय कोई ऐसी संपत्ति या मूल्यवान वस्तु से है, जो विवाह से पहले, विवाह के समय या विवाह के पश्चात विवाह के एक पक्षकार द्वारा दूसरे पक्षकार को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दी जाती है या दी जाने के लिए करार की गई है।
वर्तमान स्थिति (NCRB 2024 रिपोर्ट के अनुसार)
- महिलाओं के विरुद्ध अपराध: कुल 4,41,534 दर्ज मामलों में से 27.2% मामले 'पति द्वारा या पति के नातेदारों द्वारा क्रूरता' के दर्ज किए गए।
- दहेज मृत्यु: लंबे समय में थोड़ी गिरावट के बावजूद, भारत में वर्ष 2024 में दहेज से जुड़ी 5,737 मौतें दर्ज की गईं।
- सर्वाधिक मामले: उत्तर प्रदेश (2,038) में सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए। इसके उसके बाद बिहार और मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए।
संबंधित विधिक प्रावधान
- दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961: दहेज लेने, देने या उसकी मांग करने को आपराधिक कृत्य बनाया गया है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS):
- धारा 80 (पूर्व में IPC की धारा 304B): दहेज मृत्यु के लिए कठोर दंड का प्रावधान करती है।
- धारा 85 (पूर्व में IPC की धारा 498A): पति या उसके नातेदारों द्वारा महिला के साथ की गई क्रूरता के लिए दंड का प्रावधान करती है।
- साक्ष्य: भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 118 (पूर्व में साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 113B) के तहत, आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध करने के लिए 'दोषी होने की धारणा' (Presumption of guilt) को आधार माना जाता है।
- घरेलू हिंसा: 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' महिलाओं को घर में होने वाली हिंसा से संरक्षण के लिए लागू किया गया है।
उच्चतम न्यायालय के 2025 के निर्देश'उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अजमल बेग' वाद में उच्चतम न्यायालय ने निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
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