हाल ही में नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System: SRS) की ‘सांख्यिकी रिपोर्ट 2024' के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.9 रह गई है।
कुल प्रजनन दर (TFR) क्या है?
- कुल प्रजनन दर से आशय एक महिला द्वारा अपनी प्रजनन अवधि (15-59 वर्ष) के दौरान जन्म दिए जाने वाले बच्चों की औसत संख्या से है।
- प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन (Replacement Level Fertility): प्रति महिला लगभग 2.1 बच्चों की कुल प्रजनन दर (TFR) को प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है, जहाँ प्रत्येक पीढ़ी अपनी जगह लेने के लिए इतने बच्चों को जन्म देती है, जिससे समय के साथ जनसंख्या स्थिर बनी रहती है।
- यदि कुल प्रजनन दर 2.1 से अधिक हो, तो यह बढ़ती हुई जनसंख्या को दर्शाती है, जबकि 2.1 से कम कुल प्रजनन दर प्रायः घटती जनसँख्या और आबादी में वृद्धों के बढ़ते अनुपात को दर्शाती है।
- उच्च TFR वाले राज्य: बिहार (2.9), उत्तर प्रदेश (2.6), मध्य प्रदेश (2.4)।
- निम्न TFR वाले राज्य/संघ राज्य क्षेत्र: दिल्ली (1.2), केरल (1.3), तमिलनाडु (1.3)।
- भारत में प्रजनन दर में गिरावट के कारण: शिक्षित महिलाओं की संख्या में वृद्धि, परिवार नियोजन पहलें, और देर से विवाह करना, आदि।
प्रजनन दर घटने के प्रभाव
- सकारात्मक प्रभाव:
- संसाधनों का संरक्षण: कम प्रजनन दर से भूमि, जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होता है, जो पर्यावरण की संधारणीयता के लिए बेहतर है।
- शिक्षा में सुधार: कम बच्चे होने से प्रति बच्चा संसाधनों की उपलब्धता बढ़ती है, जिससे बिना अतिरिक्त सरकारी व्यय के शिक्षा के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
- नकारात्मक प्रभाव:
- उच्च आश्रित (निर्भरता) अनुपात: लंबे समय तक कुल प्रजनन दर कम रहने से आबादी में कार्यशील आयु समूह की तुलना में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ जाता है।
- श्रमिकों की कमी: कार्यबल घटने से उत्पादकता और आर्थिक संवृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है; जैसे कि जापान और दक्षिण कोरिया में देखा जा रहा है।
- प्रवासन (Migration) का दबाव: आबादी में बुजुर्गों के अधिक अनुपात वाले देशों को प्रायः कार्यबल की आवश्यक संख्या को पूरा करने के लिए प्रवासियों पर निर्भर रहना पड़ता है।