केंद्रीय कृषि मंत्री ने 1 लाख 74 हजार क्विंटल के 'राष्ट्रीय बीज भंडार' (National Seed Reserve) की स्थापना करने की घोषणा की है।
राष्ट्रीय बीज भंडार (NSR) के बारे में
- यह 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन' (NFSNM) के 'कृषोन्नति योजना' के तहत शुरू की गई एक पहल है।
- उद्देश्य: किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित और आधार बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, विशेष रूप से संकट या प्राकृतिक आपदाओं के समय।
- कार्यान्वयन एजेंसियां: राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीज निगम और राज्य सरकारों/ संघ राज्य क्षेत्रों के कृषि विभाग (जहां राज्य बीज निगम मौजूद नहीं हैं)।
- राष्ट्रीय बीज भंडार (NSR) में रखे जाने वाले बीजों का उत्पादन 'साथी/SATHI' (सीड ट्रेसेब्लिटी, ऑथेन्टिकेशन एंड होलिस्टिक इन्वेंट्री) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।
SIDE वर्ष 2023 से जारी की जाने वाली एक वार्षिक रिपोर्ट है। यह रिपोर्ट 'ICRIER-प्रोसस सेंटर फॉर इंटरनेट एंड डिजिटल इकोनॉमी' (IPCIDE) द्वारा जारी की जाती है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
- CHIPS (कनेक्ट-हार्नेस-इनोवेट-प्रोटेक्ट-सस्टेन) फ्रेमवर्क का प्रस्ताव: यह डिजिटलीकरण की एक व्यापक अवधारणा है जो डिजिटल प्रौद्योगिकियों से जुड़े लाभों और जोखिमों,दोनों को समाहित करती है।
- वैश्विक डिजिटलीकरण: भारत की रैंकिंग 2025 में आठवीं से सुधरकर 2026 में पांचवीं हो गई, तथा उसका CHIPS स्कोर 36.90 रहा (अमेरिका शीर्ष स्थान पर और चीन दूसरे स्थान पर है)।
- वैश्विक डिजिटल नेतृत्व: यह हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में स्थानांतरित हो गया है, जहाँ शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में से तीन—चीन, सिंगापुर और भारत—स्थित हैं।
- वैश्विक डिजिटल क्षेत्र का नेतृत्व: अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र की ओर स्थानांतरित हो गया है, जहाँ शीर्ष पाँच डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से तीन—चीन, सिंगापुर और भारत—स्थित हैं।
- वैश्विक डिजिटल परिदृश्य: AI के 72% उपयोगकर्ता विकासशील देशों में हैं, तथा भारत और चीन मिलकर विश्व में AI अपनाने के लगभग ⅖ वां हिस्से का योगदान देते हैं।
केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची VII के दायरे का विस्तार करके कंपनियों को ZCZP के माध्यम से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) दायित्वों को पूरा करने में सक्षम बनाया है।
ZCZP लिखत के बारे में
- यह सेबी द्वारा विनियमित धन जुटाने का एक माध्यम है। इसे सोशल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध गैर-लाभकारी संगठन पात्र सामाजिक परियोजनाओं के लिए जारी करते हैं।
- स्टॉक या बॉण्ड के विपरीत, यह न तो ब्याज प्रदान करता है और न ही मूलधन की वापसी करता है।
- निवेशक वित्तीय रिटर्न के बजाय मापने योग्य सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए वित्तीय योगदान देते हैं।
- 10% की सीमा: किसी कंपनी द्वारा ZCZP लिखतों में निवेश की गई राशि उस वित्तीय वर्ष के कुल कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यय के 10% से अधिक नहीं हो सकती।
CSR के बारे में
- विधिक प्रावधान: कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत कुछ कंपनियों के लिए CSR अनिवार्य है, जिसके अंतर्गत उन्हें देश के सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक विकास में योगदान देने कार्य करना होता है।
- वित्त का आवंटन: कंपनियां अपने पिछले तीन वर्षों के औसत निवल लाभ का कम-से-कम 2% CSR कार्यों पर व्यय करने के लिए बाध्य हैं।
- अधिनियम की अनुसूची VII में उन कार्यों की सूची प्रदान की गई है जिन पर किया गया व्यय CSR के रूप में मान्य है।
Article Sources
1 sourceभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में उल्लेख किया है कि वह 'किल स्विच' (Kill Switch) तंत्र शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
'किल स्विच' के बारे में
- अर्थ: यह किसी आपात स्थिति में या जालसाजों द्वारा हमले का संदेह होने पर किसी भी प्रणाली, डिवाइस, खाते या सेवा को तत्काल निष्क्रिय या अवरुद्ध करने में सहायक है।
- वर्तमान में, ग्राहकों के पास घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कार्ड लेनदेन को शुरू (ऑन) या बंद करने (ऑफ) का विकल्प मौजूद है। RBI इस सुविधा को UPI, इंटरनेट बैंकिंग सहित सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों में शुरू करने पर विचार कर रहा है।
- महत्व: ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाना; डिजिटल अरेस्ट घोटालों की रोकथाम; लेनदेन पर ग्राहकों को अधिक नियंत्रण प्रदान करना, आदि।
सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन चालू वित्तीय वर्ष में भारत के पहले ब्लू बॉण्ड जारी करने जा रही है।
- सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन भारत की समुद्री क्षेत्र पर केंद्रित पहली सरकारी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है।
ब्लू बॉण्ड के बारे में:
- ये ऐसे विशेष वित्तीय लिखत हैं, जिनके माध्यम से जुटाई गई राशि का उपयोग केवल समुद्र-अनुकूल परियोजनाओं और स्वच्छ जल संसाधनों के संरक्षण के लिए किया जाता है।
- सेशेल्स गणराज्य ने 2018 में विश्व का पहला सॉवरेन ब्लू बॉण्ड जारी किया था।
घेपन हिमनद (Ghepan Glacier) के तेजी से पिघलने के कारण हिमाचल प्रदेश के सिसू गांव के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है।
घेपन झील के बारे में
- इसे घेपांग घाट हिमनद झील के रूप में भी जाना जाता है। यह सिसू के ऊपर 4,068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- घेपन झील हिमोढ़-बंध वाली हिमनद झील है। इसका अर्थ है कि इसका निर्माण पिघलते हिमनद द्वारा छोड़े गए पत्थरों, रेत और मलबे से बने प्राकृतिक बांध से हुआ है।
- खतरे: राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के अनुसार, 1989 से 2022 के दौरान, इस झील का आकार लगभग तीन गुना बढ़ गया है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने इस झील को "अत्यधिक संवेदनशील" के रूप में वर्गीकृत किया है, जिससे सिसू में हिमनद झील प्रस्फोट जनित बाढ़ (GLOFs) की आशंका बढ़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट (sc) ने हाल ही में सेवलाइफ फाउंडेशन (2024) रिट याचिका मामले में अंतरिम निर्देश पारित करते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों की आघात देखभाल को जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना है।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रमुख अंतरिम निर्देश
- तीन महीने के भीतर सभी आपातकालीन/एम्बुलेंस हेल्पलाइनों का 112 में पूर्ण तकनीकी और परिचालन एकीकरण पूरा करें।
- नेक इंसानी शिकायत निवारण के लिए कार्यात्मक (भौतिक और डिजिटल) प्रणालियाँ स्थापित करें।
- केंद्र के डेटा प्रारूप दिशानिर्देशों के अनुरूप राज्य स्तरीय आघात रजिस्ट्री स्थापित करें।
- सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए नकद रहित उपचार योजना को 2025 तक पूरी तरह से लागू करें - प्रधानमंत्री राहत।
हाल ही में स्वीकृत मिशन मौसम पहल के तहत भारत, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 'स्काईकास्ट सिस्टम' स्थापित करने वाला विश्व का 19वां देश बन गया है।
स्काईकास्ट सिस्टम के बारे में
- स्काईकास्ट एक अत्याधुनिक वायुमंडलीय निगरानी और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली है, जिसे वास्तविक समय में मौसम संबंधी जानकारी प्रदान करके विमानन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया गया है।
- यह रडार विंड प्रोफाइलर, SODAR, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS), और CL61 लिडार-आधारित सीलोमीटर जैसी तकनीकों को एकीकृत करता है।
- रडार विंड प्रोफाइलर: यह 3 कि.मी. की ऊंचाई तक वायु की गति, दिशा, विक्षोभ, ऊर्ध्वाधर वेग और बाउंड्री लेयर गतिकी को मापता है।
- GFAS: यह कोहरे की बूंदों, एरोसोल और एरोसोल-कोहरे की अंतःक्रियाओं का विश्लेषण करता है।
- CL61 सीलोमीटर: यह कोहरे की ऊर्ध्वाधर संरचना की निगरानी करता है।
- स्काईकास्ट प्रणाली, विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) से प्राप्त अनुभवों और निष्कर्षों पर आधारित है।
- यह परियोजना 2015 में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत शुरू की गई थी।