हाल ही में, राजस्थान के कुछ भागों में आई भीषण ‘धूल भरी आँधियों’ (डस्ट स्टॉर्म) ने अरावली पर्वतमाला के पारिस्थितिक दृष्टिकोण से महत्व को रेखांकित किया है।
- यह आंधी पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्पन्न हुई। यह विक्षोभ उच्च वेग वाली पवनें लेकर आया। पश्चिमी राजस्थान में गर्मी के कारण उष्ण वायु ऊपर उठने लगी।
- अरावली पर्वतमाला थार रेगिस्तान और गंगा के मैदानी इलाकों के बीच एक प्राकृतिक ढाल है। इस पर्वतमाला की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचने से दिल्ली और उत्तरी मैदानी इलाकों में तेज आंधियां आने लगी हैं।
अरावली पर्वतमाला का महत्व
- भौगोलिक दृष्टि से महत्व: यह विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमालाओं (fold mountain ranges) में से एक है। यह गुजरात से दिल्ली तक लगभग 700 किलोमीटर में विस्तृत है।

- रेगिस्तान के प्रसार को रोकने में सहायक: अरावली थार रेगिस्तान को पूर्व की ओर विस्तारित होने से रोकती है और उत्तर भारत में धूल भरी आंधियों की प्रबलता को कम करती है।
- पारिस्थितिक दृष्टि से महत्व: यह पर्वतमाला अपने वनों, घास के मैदानों और वन्यजीवों के पर्यावास के माध्यम से समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित रखती है।
- जल संसाधन की दृष्टि से महत्व: यह पर्वतमाला एक प्रमुख जलसंभर (वाटरशेड) के रूप में कार्य करती है। यह चंबल, साबरमती, लूनी और बनास जैसी नदियों का स्रोत है।
- आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्व: यह पर्वतमाला कृषि, पशुपालन और खनन जैसे आर्थिक क्रियाकलापों में योगदान देती है। साथ ही यहां कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक स्थल भी स्थित हैं।
अरावली के संरक्षण के उपाय
- अरावली ग्रीन वॉल पहल: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संचालित यह पूर्व की स्थिति बहाल करने वाला एक कार्यक्रम है। इसमें वनीकरण, घासभूमि को वापस लाने, आर्द्रभूमियों के कायाकल्प आदि पर ध्यान दिया जा रहा है।
- खनन पर नियंत्रण: अवैध खनन और अतिक्रमण पर रोक लगाई गई है। साथ ही उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
- मृदा संरक्षण: चेक डैम, समोच्च खाइयों (कॉन्टूर ट्रेंच) तथा वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।