उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य और उसके आसपास लगातार जारी अवैध रेत खनन पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों की आलोचना की है।
अवैध रेत खनन के बारे में
- विधिक स्थिति: 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) (MMDR) अधिनियम, 1957' के तहत रेत (सैंड) को 'लघु खनिज' (Minor mineral) माना गया है।
- परिभाषा: 'खनिज रियायत नियम, 2016' के अनुसार, बिना आवश्यक अनुमति के सर्वेक्षण, अन्वेषण और खनन करना अवैध खनन है।
- MMDR अधिनियम के तहत, बिना वैध लाइसेंस या पट्टे या समेकित लाइसेंस के खनिजों का खनन या परिवहन करना, या धारा 23C के तहत राज्य सरकारों द्वारा लागू नियमों का उल्लंघन करना अवैध खनन के अंतर्गत आता है।
- दुष्प्रभाव:
- पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है,
- जैव विविधता कम होती है,
- खनन माफियाओं के कारण विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है, तथा
- राजस्व की हानि जैसी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां भी सामने आती हैं।
अवैध रेत खनन रोकने के लिए सुरक्षा उपाय
- दिशानिर्देश: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 'सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देश (2016)' और 'प्रवर्तन एवं निगरानी दिशानिर्देश (2020)' जारी किए गए हैं।
- तकनीक की सहायता से निगरानी: 'खनन निगरानी प्रणाली (MSS)' के जरिए सैटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों के माध्यम से निगरानी की जाती है।
- खनिज संरक्षण और विकास नियम, 2017: इसमें खनिज खनन की पूरी प्रक्रिया की निगरानी को अनिवार्य बनाया गया है।
- जुर्माना और दंड: 'MMDR संशोधन अधिनियम, 2015' के तहत भारी जुर्माने, 5 वर्ष तक कारावास की सजा तथा मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष न्यायालयों का गठन जैसे प्रावधान किए गए हैं।
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के बारे में
घड़ियाल (गेवियलिस गैंगेटिकस) के बारे में
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